
संवाद 24 | श्रीनगर
8 दिसंबर 1989 को श्रीनगर में तत्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का जिस हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग कांड ने पूरे देश को हिला दिया था, उसी मामले में 35 साल बाद एक बड़ी गिरफ्तारी हुई है। CBI ने सोमवार को श्रीनगर से भगोड़ा शफात अहमद शांगलू को गिरफ्तार किया, जो JKLF टेरर मॉड्यूल का हिस्सा माना जाता है। उस पर 10 लाख रुपये का इनाम था।
शांगलू पर आरोप है कि उसने यासीन मलिक और उसके साथियों के साथ मिलकर रुबैया के अपहरण की साजिश और उसे अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई। CBI के अनुसार, शांगलू JKLF संगठन में एक महत्वपूर्ण पद पर था और फाइनेंस ऑपरेशन संभालता था। उसे अब जम्मू TADA कोर्ट में पेश किया जाएगा।
1989 की घटना जिसने सरकार को झुका दिया
रुबैया सईद उस वक्त श्रीनगर के लाल देद अस्पताल में डॉक्टर थीं और रोजाना बिना सिक्योरिटी मिनी बस से घर लौटती थीं। 8 दिसंबर 1989 को घर से आधा किलोमीटर पहले ही JKLF आतंकियों ने उनका अपहरण कर लिया।
किडनैपिंग का मास्टरमाइंड JKLF नेता अशफाक माजिद वानी था, जो बाद में एक एनकाउंटर में मारा गया।
आतंकियों ने उनकी रिहाई के बदले अपने 7 साथियों की रिहाई की मांग रखी, जिनमें से सरकार ने 5 आतंकियों—शेख हामिद, शेर खान, नूर मोहम्मद कलवल, जावेद जगरार और गुलाम नबी भट—को रिहा किया।
सरकार के झुकने के बाद 13 दिसंबर की शाम रुबैया को छोड़ा गया। इस घटना ने पूरे देश में सुरक्षा तंत्र पर गहरा सवाल खड़ा किया।
रुबैया आज सरकारी गवाह
CBI ने रुबैया को सरकारी गवाह बनाया है। उन्होंने अपनी पहचान में यासीन मलिक और 4 अन्य आरोपियों को इस किडनैपिंग में शामिल बताया है।
TADA कोर्ट पहले ही इस केस में मलिक और 9 अन्य पर चार्ज फ्रेम कर चुका है।
किडनैपिंग से घाटी के हालात बिगड़े
इस किडनैपिंग को कई विशेषज्ञ कश्मीर में आधुनिक आतंकवाद की शुरुआत मानते हैं।
अलगाववादी नेता हिलाल वार ने अपनी किताब में दावा किया है कि “रुबैया किडनैपिंग एक ड्रामा था जिसने घाटी में उग्रवाद के तूफान की नींव रखी।”
उन्होंने लिखा कि इस घटना के बाद कश्मीर में अपहरण और हत्या का दौर बढ़ गया, जिसने हालात को विस्फोटक बना दिया।
NSG अधिकारी का दावा—रुबैया मिल चुकी थी
2012 में NSG के पूर्व मेजर जनरल ओपी कौशिक ने दावा किया था कि अपहरण के 5 मिनट के भीतर NSG को रुबैया के ठिकाने का पता चल गया था, लेकिन तत्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने ऑपरेशन रोक दिया और कहा कि “NSG पीछे हटे।”
इस दावे ने उस समय बड़ी राजनीतिक बहस खड़ी कर दी थी।
35 साल बाद गिरफ्तारी क्यों अहम?
CBI जिस केस को 1990 से देख रही थी, उसमें शफात शांगलू ही अकेला आरोपी था जो अभी तक फरार था।
उसकी गिरफ्तारी से अब कोर्ट में केस का पूरा चेन ऑफ एविडेंस मजबूत होगा और यासीन मलिक के खिलाफ चल रहे ट्रायल पर भी असर पड़ेगा।






