
संवाद 24 झारखंड। लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ राजधानी रांची में छात्रों का आंदोलन उग्र होता जा रहा है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले कई दिनों से सत्याग्रह और आमरण अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों से गतिरोध खत्म करने के लिए अंततः राज्य सरकार ने प्रशासनिक पहल शुरू कर दी है। रांची के उप-विभागीय अधिकारी (SDO) कुमार रजत और अपर जिला मजिस्ट्रेट (ADM) धनंजय कुमार भारी प्रशासनिक दल के साथ जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरना स्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने आंदोलनकारी छात्रों से सीधा संवाद स्थापित किया और उन्हें ‘छोटे भाई’ संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझ रहा है और समाधान निकालने के उद्देश्य से बात करने आया है।
CM आवास पर 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता का न्योता
एसडीओ कुमार रजत ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से प्रदर्शनकारी छात्रों को औपचारिक प्रस्ताव दिया। प्रशासन ने आंदोलनकारियों से अनुरोध किया कि वे अपनी ओर से 5 से 7 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का चयन करें, जो मुख्यमंत्री आवास जाकर मुख्यमंत्री के साथ सीधी वार्ता में अपनी मांगें रख सके। प्रशासनिक अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार छात्रों के सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने और पारदर्शी तरीके से समाधान निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है।
छात्रों की शर्त: “बंद कमरे में नहीं, कैमरे और मीडिया के सामने होगी बात”
प्रशासन के इस प्रस्ताव पर अभ्यर्थियों ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट रूप से बंद कमरे में प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता करने का प्रस्ताव खारिज कर दिया। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह मुद्दा केवल 5-7 व्यक्तियों का नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य का है। छात्र नेताओं ने शर्त रखी कि सरकार के साथ कोई भी बातचीत पूरी तरह से पारदर्शी होनी चाहिए और यह वार्ता मीडिया व कैमरों की मौजूदगी में सार्वजनिक रूप से आयोजित की जाए। छात्रों ने प्रशासनिक प्रस्ताव पर आपस में विचार-विमर्श करने के लिए 2 घंटे का समय मांगा।
मांगों पर अड़े छात्र, 10 अगस्त को ‘विधानसभा घेराव’ की चेतावनी
परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली, सीट बेचे जाने और पेपर लीक के आरोप लगा रहे अभ्यर्थियों का अनशन जारी है। कई अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ने की खबर है, फिर भी वे अपनी मांगों पर डटे हुए हैं।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें हैं:
विवादित परीक्षाओं को रद्द करना: विवादित परीक्षाओं की प्रक्रिया को तत्काल रोककर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
CBI एवं ED जांच: पूरी भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों में हुए भ्रष्टाचार की केंद्रीय एजेंसियों से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
संरचनात्मक सुधार: JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली और परीक्षा प्रणाली में पूरी तरह से पारदर्शिता लाते हुए अमूल्य बदलाव किए जाएं।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों को जल्द स्वीकार नहीं करती है, तो आगामी 10 अगस्त को राज्य भर से हजारों छात्र एकजुट होकर झारखंड विधानसभा का घेराव करेंगे।
राजनीतिक सरगर्मी तेज, राजभवन तक पहुंचा मामला
इस बीच, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राजभवन जाकर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की और छात्रों के आंदोलन व आयोग की भर्ती प्रक्रियाओं पर विस्तृत जानकारी दी। राज्यपाल ने परीक्षा प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। वहीं, विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि राज्य में नौकरियों की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा यह मामला अब पूरे राज्य में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बन चुका है।






