
संवाद 24 मुंबई। मायानगरी मुंबई की रफ्तार और तड़क-भड़क अक्सर सुर्खियों में रहती है, लेकिन रविवार की अलसुबह शहर के सबसे आधुनिक समुद्री गलियारे ‘मुंबई कोस्टल रोड’ पर एक ऐसा खौफनाक मंजर देखने को मिला जिसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए। मरीन ड्राइव से हाजी अली की तरफ हवा से बातें करती हुई जा रही एक लग्जरी काली बीएमडब्ल्यू (BMW) कार अनियंत्रित होकर पुल की रेलिंग और डिवाइडर को तोड़ते हुए हवा में उछल गई और लगभग 50 से 75 फीट नीचे चल रहे निर्माण स्थल पर जा गिरी। इस दिल दहला देने वाले सड़क हादसे में तीन होनहार छात्रों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनका एक साथी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।
सुबह 5:20 बजे का सन्नाटा और सीसीटीव में कैद ‘मौत की छलांग’
यह रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सुबह करीब सवा पांच बजे के आसपास का है। लाला लाजपत राय कॉलेज और लोटस जेट्टी के पास का इलाका सुबह के शांत पहर में डूबा हुआ था। इसी दौरान कोस्टल रोड के कंट्रोल रूम और पास लगे सीसीटीवी कैमरों में जो कैद हुआ, वह किसी हॉलीवुड फिल्म के स्टंट दृश्य जैसा था, लेकिन उसका अंजाम बेहद कड़वी और त्रासद हकीकत था। सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि तेज गति से दौड़ रही लग्जरी कार अचानक बेकाबू होती है। चालक स्टीयरिंग से पूरी तरह संतुलन खो बैठता है। गाड़ी सड़क किनारे बने डिवाइडर से टकराने के बाद हवा में कई कलाबाजियां (मिड-एयर फ्लिप) खाती है और पुल से लटके बड़े साइनबोर्ड को चीरते हुए नीचे सीधे अंडर-कंस्ट्रक्शन पार्किंग एरिया में गिर जाती है। जमीन से टकराते ही जोरदार धमाका होता है और कार के परखच्चे उड़ जाते हैं।
गुजरात से मुंबई पढ़ने आए थे चार दोस्त, एक झटके में उजड़ी दुनिया
पुलिस और अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कार में सवार चारों युवक मूल रूप से गुजरात के अहमदाबाद के रहने वाले थे। वे मुंबई के विले पार्ले स्थित एनएमआईएमएस (NMIMS) कॉलेज के छात्र थे और जुहू इलाके में बतौर पेइंग गेस्ट (पीजी) साथ रह रहे थे। वीकेंड पर चारों दोस्त मरीन ड्राइव पर वक्त बिताने गए थे और तड़के वापस अपने कमरे की ओर लौट रहे थे। हादसे का शिकार हुए युवकों में 21 वर्षीय शनय गज्जल, 17 वर्षीय धैर्य सेठ और 19 वर्षीय आदित्य जकासनिया शामिल हैं, जिन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं, 20 वर्षीय आदित्य ओसवाल इस भीषण हादसे में एकमात्र जीवित बचे हैं, जिनका नायर अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में गंभीर हालत में इलाज जारी है। हादसे की सूचना मिलते ही छात्रों के परिजनों में कोहराम मच गया और वे अहमदाबाद से मुंबई के लिए रवाना हो गए।
200 किमी/घंटा से अधिक की गति का अंदेशा, सुरक्षा मानकों पर खड़े हुए सवाल
घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य के लिए पहुंची पुलिस व आपातकालीन टीमों को कार के अंदर फंसे युवकों को बाहर निकालने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। कार की छत पूरी तरह पिचक चुकी थी, विंडस्क्रीन चूर-चूर हो गई थी और इंजन मलबे में तब्दील हो चुका था। प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि गाड़ी की गति 200 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास हो सकती है। इतनी भीषण रफ्तार के कारण चालक मोड़ या उतार पर गाड़ी को नियंत्रित नहीं कर सका। पुलिस इस बात की भी फोरेंसिक और चिकित्सकीय जांच कर रही है कि कहीं रात के समय शराब या किसी अन्य मादक पदार्थ का सेवन तो नहीं किया गया था।
हाई-स्पीड कॉरिडोर या ‘डेथ ट्रैक’? प्रशासन और रईसजादों की रेसिंग पर सवाल
10.58 किलोमीटर लंबा मुंबई कोस्टल रोड शहर के ट्रैफिक को सुगम और निर्बाध बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। लेकिन शुरुआत से ही यह रात के वक्त रईसजादों और तेज रफ्तार के शौकीनों के लिए अवैध रेस ट्रैक बनता नजर आ रहा है। अभी कुछ ही दिन पहले 3 सितंबर को इसी कोस्टल रोड टनल में लेम्बोर्गिनी और बीएमडब्ल्यू जैसी सुपरकारों की रेसिंग का वीडियो वायरल हुआ था, जिस पर पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। ताजा हादसे ने एक बार फिर यह कड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर करोड़ों की लागत से बने इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर स्पीड लिमिट और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं हैं? क्या केवल ऑटोमैटिक कैमरों के चालान से ऐसी जानलेवा रफ्तार पर लगाम लगाई जा सकती है? चार होनहार युवाओं के साथ हुए इस हादसे ने न केवल उनके परिवारों की खुशियां छीन ली हैं, बल्कि यह सबक भी दिया है कि सड़क पर चंद सेकंड का रोमांच जिंदगी भर का मातम बन सकता है।






