
संवाद 24 नई दिल्ली। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच नई दिल्ली में एक अहम द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई। सात वर्षों के अंतराल के बाद भारत यात्रा पर पहुंचे चीनी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई इस बातचीत में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति, सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता, द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच संबंधों के निरंतर और सहज विकास के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता सबसे बुनियादी शर्त है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन के संबंध ‘तीन पारस्परिक’ सिद्धांतों – आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित – पर आधारित होने चाहिए।
सीमा विवाद और मौजूदा समझौतों के पालन पर जोर
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच बातचीत सार्थक माहौल में हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने तियानजिन में हुई अपनी पिछली बैठक के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की। प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद समझौतों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करने की आवश्यकता दोहराई। विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच के मतभेद कभी विवाद का रूप नहीं लेने चाहिए। दोनों नेताओं ने सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान तक पहुंचने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
‘एक-दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं दोनों देश’: शी चिनफिंग
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने द्विपक्षीय संवाद में सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि चीन ने हमेशा भारत के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियां भले ही अलग हों, लेकिन वे एक-दूसरे की खूबियों और क्षमताओं से सीख सकते हैं और साझा विकास के रास्ते पर आगे बढ़ सकते हैं। चिनफिंग ने यह भी याद दिलाया कि दोनों नेताओं के बीच अब तक 21 बैठकें हो चुकी हैं, जिन्होंने रिश्तों को आगे बढ़ाने में मदद की है।
ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन का आभार
प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में उनके सकारात्मक रुख और भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन द्वारा दिए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि स्थिर भारत-चीन संबंध न केवल दोनों देशों की जनता के हित में हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र और वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।






