
हसेरन/तिर्वा, कन्नौज। हसेरन गांव में करीब आठ दशक से चली आ रही रामलीला एवं मेला आयोजन की परंपरा को इस वर्ष भी सर्वसम्मति के साथ आगे बढ़ाया गया। रामलीला मेला अध्यक्ष पद के लिए हुई बैठक में शिवम भदौरिया को सर्वसम्मत से अध्यक्ष चुना गया। खास बात यह रही कि उन्हें लगातार दूसरी बार इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना गया है।
दो दावेदारों के सामने आने के बाद बढ़ी थी चर्चा
रामलीला कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर करीब एक सप्ताह पहले आयोजित बैठक में अध्यक्ष पद के लिए दो दावेदार सामने आए थे। इसके बाद गांव में अध्यक्ष पद को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। स्थानीय स्तर पर कई सामाजिक बैठकें हुईं और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने का प्रयास किया गया।
बुजुर्गों की बैठक में निकला सर्वसम्मत समाधान
करीब पांच दिन बाद शनिवार दोपहर गांव के बुजुर्गों और सम्मानित लोगों की मौजूदगी में दोबारा बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों दावेदारों को बुलाकर आपसी सहमति बनाने का प्रयास किया गया। चर्चा के बाद सभी की सहमति से शिवम भदौरिया को दूसरी बार मेला अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपने पर सहमति बनी।इस दौरान पूर्व मेला अध्यक्ष महावीर गुप्ता ने भी अपने सुझाव रखे। सर्वसम्मति से निर्णय होने के बाद दोनों दावेदारों ने एक-दूसरे को बधाई देकर आपसी सौहार्द का संदेश दिया।
हर वर्ष अध्यक्ष चुनने की चली आ रही है परंपरा
रामलीला संरक्षक सुशील दुबे के अनुसार हसेरन में रामलीला और मेले की व्यवस्थाओं के लिए हर वर्ष बैठक कर अध्यक्ष का चयन करने की परंपरा रही है। उन्होंने बताया कि इस बार भी शुरुआत में दो दावेदार सामने आए थे, लेकिन गांव के बुजुर्गों और सम्मानित लोगों के प्रयास से आपसी मतभेद दूर करते हुए सर्वसम्मति से अध्यक्ष का चयन कर लिया गया।रामलीला जैसी लोक-परंपराएं ग्रामीण समाज में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सहभागिता का भी माध्यम रही हैं। कन्नौज में रामलीला की पुरानी परंपराओं का उल्लेख विभिन्न स्रोतों में मिलता है। कन्नौज शहर में रामलीला आयोजन और रावण दहन से जुड़ी विशिष्ट परंपराओं का इतिहास भी काफी पुराना बताया गया है।
समिति से जुड़े लोगों की मौजूदगी
बैठक में किशोर दुबे, सुरेंद्र सिंह, सुशील गुप्ता, सतीश चंद्र गुप्ता, मुकेश, मुन्ना लाल रावत, राहुल, नौशाद, अरमान खान, सुशील दुबे और जोनू पंडित सहित कई ग्रामीण एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
आपसी सहमति ने दिया आयोजन को नई दिशा
अध्यक्ष पद को लेकर सामने आए दो दावेदारों के बीच सहमति बनने के बाद गांव में रामलीला एवं मेले की आगामी तैयारियों का रास्ता साफ हो गया है। सर्वसम्मति से चयन की प्रक्रिया ने न केवल वर्षों पुरानी व्यवस्था को आगे बढ़ाया, बल्कि ग्रामीणों के बीच आपसी सहयोग और सामाजिक सौहार्द का संदेश भी दिया।






