मिट्टी, गोबर और बांस से आकार ले रहे गणपति, कन्नौज में पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल

उमर्दा/कन्नौज। गणेश महोत्सव की तैयारियों के बीच कन्नौज जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम तेज हो गया है। खास बात यह है कि इस बार कई स्थानीय कारीगर पारंपरिक और पर्यावरण अनुकूल सामग्री से प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। प्राकृतिक चिकनी मिट्टी, गोबर तथा बांस-लकड़ी के फ्रेम से बनाई जा रही इन प्रतिमाओं में धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिखाई दे रहा है।

प्राकृतिक सामग्री से बन रही आकर्षक प्रतिमाएं

कारीगर गणपति बप्पा को अलग-अलग आकार और स्वरूप में गढ़ रहे हैं। कमल के आसन पर विराजमान गणेश प्रतिमाओं को विशेष रूप से आकर्षक रूप दिया जा रहा है। प्रतिमाओं की सजावट में भी प्राकृतिक विकल्पों को प्राथमिकता देने की कोशिश की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनके रंग-रोगन में वॉटर कलर और हर्बल रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

विसर्जन के बाद प्रदूषण कम करने की पहल

POP से बनी प्रतिमाओं की तुलना में मिट्टी जैसी प्राकृतिक सामग्री से बनी प्रतिमाओं को पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प माना जाता है। प्रतिमा निर्माण में प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल और प्राकृतिक रंगों को प्राथमिकता देने से विसर्जन के बाद जलस्रोतों पर प्रदूषण का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाओं की मांग लगातार बढ़ने की बात सामने आ रही है।

ऑर्डर के अनुसार तैयार हो रही गणपति की प्रतिमाएं

स्थानीय कारीगर ग्राहकों की जरूरत के अनुसार प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। बड़े आकार की प्रतिमाओं के साथ घरों में स्थापना के लिए छोटी प्रतिमाओं की भी मांग है। कई ग्राहक पहले से ऑर्डर देकर अपनी पसंद के आकार और स्वरूप की प्रतिमा तैयार करा रहे हैं।

उमर्दा से ठठिया तक गांवों में चल रहा मूर्ति निर्माण

कन्नौज जिले के उमर्दा, तिर्वा, औसैर, ठठिया और सुर्सी पट्टी सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय कारीगर गणेश प्रतिमाओं को तैयार करने में जुटे हैं। ठठिया क्षेत्र के बल्लपुरवा गांव में एक परिवार करीब दो दशक से मूर्ति निर्माण के कार्य से जुड़ा बताया जाता है। परिवार द्वारा तैयार की गई प्रतिमाओं की मांग आसपास के गांवों के अलावा दूसरे जिलों तक भी पहुंचती है।

14 सितंबर से शुरू होगा गणेश उत्सव

पंचांग संबंधी उपलब्ध स्रोतों के अनुसार, गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह तक रहेगी। गणेश उत्सव का प्रमुख समापन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर होगा, जब बड़े स्तर पर गणपति विसर्जन किया जाएगा। हालांकि परिवारों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार कुछ प्रतिमाओं का विसर्जन इससे पहले भी किया जाता है।

आस्था के साथ पर्यावरण का संदेश

कन्नौज के ग्रामीण अंचल में तैयार हो रही ये इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की तस्वीर भी प्रस्तुत कर रही हैं। मिट्टी, गोबर और प्राकृतिक रंगों से प्रतिमा निर्माण की यह परंपरा स्थानीय कारीगरों की कला और बदलते समय के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण की सोच, दोनों को सामने लाती है।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

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