वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल के बीच भारत बना भरोसेमंद साझीदार, ब्रिक्स बिजनेस फोरम में विदेश मंत्री ने दिया आर्थिक मजबूती का रोडमैप

संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक भू-राजनीतिक टकरावों, चरमराती आपूर्ति श्रृंखलाओं और लगातार गहराते आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भारत ने दुनिया के सामने एक मजबूत और विश्वसनीय व्यापारिक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के औपचारिक आगाज से ठीक पहले आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में आ रहे व्यापक संरचनात्मक बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय समुदाय अभूतपूर्व उथल-पुथल, अस्थिरता और जटिलताओं का सामना कर रहा है। ऐसे दौर में भारत न केवल अपनी आंतरिक आर्थिक बुनियाद को मजबूत बनाए हुए है, बल्कि वह विश्व अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाला एक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद साझीदार बनकर उभरा है।

भू-राजनीतिक संकट और महामारियों के झटकों पर सीधी बात
फोरम में शामिल सदस्य देशों के शीर्ष व्यापारिक दिग्गजों, नीति-निर्माताओं और उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय एक साथ कई संकटों से जूझ रही है। भू-राजनीतिक तनाव, हालिया वर्षों में झेली गई महामारियों के दूरगामी दुष्प्रभाव और जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाली अप्रत्याशित आपदाएं वैश्विक विकास की रफ्तार को धीमा कर रही हैं। इन चुनौतियों ने यह साबित कर दिया है कि किसी एक क्षेत्र या देश पर आर्थिक निर्भरता पूरी व्यवस्था को जोखिम में डाल सकती है। ऐसे समय में आर्थिक नीतियों का मुख्य उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि व्यवस्था को किसी भी झटके से बचाने के लिए लचीला और विविधतापूर्ण बनाना होना चाहिए।

सप्लाई चेन की विश्वसनीयता और बाजार विस्तार का मंत्र
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में व्यावहारिक व्यापारिक प्राथमिकताओं पर जोर देते हुए कहा कि सदस्य देशों का मुख्य ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि कारोबारी गतिविधियों को कैसे सुगम और बाधा-मुक्त बनाया जाए। उन्होंने कहा कि व्यापारिक साझेदारों की खोज को आसान बनाना, नए बाजारों तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करना और आपूर्ति नेटवर्क को आपस में मजबूती से जोड़ना समय की सबसे बड़ी मांग है। इसके अलावा एक-दूसरे की तकनीकी और संसाधनगत खूबियों को सक्रिय व्यावसायिक साझेदारियों में बदलना ही ब्रिक्स देशों की वास्तविक ताकत बन सकता है। भारत इस दिशा में सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर आपूर्ति श्रृंखला को विविधतापूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है।

डिजिटलाइजेशन और तकनीकी प्रगति से खुल रहे नए रास्ते
आर्थिक चुनौतियों के बीच तकनीकी क्रांति को उम्मीद की किरण बताते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि डिजिटल बुनियादी ढांचे के तीव्र विस्तार और उन्नत तकनीकों ने विकास की नई संभावनाएं खोली हैं। भारत ने अपने घरेलू स्तर पर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का जो मजबूत नेटवर्क तैयार किया है, वह आज विश्व भर के लिए अनुकरणीय मॉडल बन चुका है। फिनटेक, क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल पेमेंट्स और राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापारिक लेन-देन को बढ़ावा देकर अंतरराष्ट्रीय कारोबार को काफी हद तक सुरक्षित और लागत-कुशल बनाया जा सकता है। इसके साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (ग्लोबल वैल्यू चेन्स) से जोड़ना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना आर्थिक प्रगति की नई दिशा तय करेगा।

विकासशील देशों के साझा आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने का संकल्प
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के मूल उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि समूह का उद्देश्य बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों में व्यापक सुधार लाना और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उचित प्रतिनिधित्व दिलाना है। ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन और सतत विकास के लिए जरूरी वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना ब्रिक्स के प्राथमिक एजेंडे में शामिल है। नई दिल्ली में आयोजित यह बिजनेस फोरम आगामी 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आर्थिक प्रारूप की दिशा तय करने में बेहद निर्णायक साबित होगा, जहां शीर्ष नेता वैश्विक आर्थिक स्थिरता के नए उपायों पर अपनी सहमति की मुहर लगाएंगे।

Madhvi Singh
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