
संवाद 24 नई दिल्ली। बदलते वैश्विक समीकरणों और सीमाओं पर बढ़ती चुनौतियों के बीच भारतीय सेनाओं को अत्याधुनिक हथियारों और साजो-सामान से लैस करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक अभूतपूर्व फैसला लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की उच्चस्तरीय बैठक में भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना के लिए करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खरीद प्रस्तावों (AoN – Acceptance of Necessity) को ऐतिहासिक मंजूरी दे दी गई है। इस मेगा रक्षा सौदे की सबसे क्रांतिकारी और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि कुल स्वीकृत राशि का लगभग 98 प्रतिशत साजो-सामान सीधे घरेलू भारतीय उद्योगों से खरीदा जाएगा। यह फैसला ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा विनिर्माण के सफर में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
थलसेना की ताकत में इजाफा: सीबीआरएन वाहन और सर्वत्र ब्रिज सिस्टम से लैस होंगे जवान
इस सौदे के तहत भारतीय थलसेना की जमीनी मारक क्षमता, सामरिक गतिशीलता और विषम परिस्थितियों में लड़ने की ताकत को कई गुना बढ़ाने की रूपरेखा तैयार की गई है। परिषद ने केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) रेकी वाहनों की खरीद को हरी झंडी दिखाई है, जो परमाणु या रासायनिक हमलों की स्थिति में दूषित क्षेत्रों की पहचान और निगरानी करने में सक्षम होंगे। इसके अलावा दुर्गम पहाड़ी व रेगिस्तानी इलाकों में तेजी से तैनाती के लिए हाई मोबिलिटी व्हीकल्स (HMVs) और तेज गति से बारूदी सुरंगें बिछाने वाले सेल्फ-प्रोपेल्ड मैकेनिकल माइन लेयर्स की खरीद को भी स्वीकृति दी गई है। युद्ध जैसी स्थितियों में सैन्य दस्तों को नदी-नालों के पार त्वरित रास्ता देने के लिए उन्नत ‘सर्वत्र ब्रिज सिस्टम’ और ट्रॉल टैंक भी थलसेना के बेड़े में शामिल किए जाएंगे।
समंदर में नौसेना की दहाड़: अरुध्रा रडार और मरीन गैस टर्बाइनों का स्वदेशी विकास
हिंद महासागर और खुले समुद्र में नौसेना की गश्ती और मारक क्षमता को डिजिटल युग के अनुकूल बनाने के लिए बड़े तकनीकी सुधारों को मंजूरी दी गई है। नौसेना के लिए अत्याधुनिक ‘अरुध्रा रडार’ की खरीद का रास्ता साफ हो गया है। यह अत्याधुनिक रडार विभिन्न नौसैनिक हवाई ठिकानों पर लगे पुराने एयर रूट सर्विलांस रडारों की जगह लेगा और समुद्री सीमा की निगरानी को बेहद सटीक बना देगा। इसके साथ ही युद्धपोतों को शक्ति देने वाले मरीन गैस टर्बाइन (MGT) के स्वदेशी डिजाइन, विकास और खरीद को विशेष स्वीकृति दी गई है। इस क्रांतिकारी कदम से युद्धपोत प्रणोदन प्रणाली (Propulsion System) के लिए विदेशी वेंडरों पर भारत की वर्षों पुरानी निर्भरता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
आसमान में वायुसेना का दबदबा: दुश्मन के रडार होंगे जाम, हाई-टेक हेलिकॉप्टरों की एंट्री
भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों, ट्रांसपोर्ट जहाजों और हेलिकॉप्टरों की युद्धक क्षमता में सुधार के लिए व्यापक पैकेज मंजूर किया गया है। डीएसी ने दुश्मन के आधुनिक रडार और संचार नेटवर्क को पंगु बनाने के लिए अत्याधुनिक ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-परपज जैमर्स (GBMPJ) की खरीद को स्वीकृति दी है। इसके साथ ही सेना और वायुसेना दोनों के लिए आधुनिक एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर्स (ALH) को शामिल किया जाएगा, जो सियाचिन जैसे दुर्गम क्षेत्रों से लेकर घने जंगलों तक हर विषम परिस्थिति में त्वरित एयरलिफ्ट और मारक ऑपरेशन को अंजाम दे सकेंगे।
साइबर सुरक्षा की अभेद्य ढाल: आरएफआईडी स्मार्ट कार्ड सिस्टम लेगा पुरानी कागजी प्रणाली की जगह
सैन्य प्रतिष्ठानों की आंतरिक सुरक्षा को अचूक बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने ऐतिहासिक डिजिटल सुधार का रास्ता तैयार किया है। इसके तहत ‘डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड’ (DEFSAC) सिस्टम स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। यह अत्याधुनिक प्रणाली तीनों सेनाओं के मौजूदा कागजी पहचान पत्रों, पासों और परमिटों की जगह लेगी। रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक पर आधारित यह स्मार्ट कार्ड सिस्टम सैन्य ठिकानों में अनधिकृत घुसपैठ और जासूसी के खतरों को जड़ से खत्म करने में कारगर होगा।
आत्मनिर्भर भारत का स्वर्णिम काल: वैश्विक आयातक से सबसे बड़ा विनिर्माता बनने की ओर अग्रसर
यह ऐतिहासिक रक्षा खरीद केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के घरेलू रक्षा उद्योग, अनुसंधान और निजी एमएसएमई (MSME) सेक्टर के लिए बहुत बड़ा आर्थिक बूस्टर साबित होगी। 1.10 लाख करोड़ रुपये में से 98 फीसदी बजट भारतीय कंपनियों, स्टार्टअप्स और रक्षा विनिर्माण संस्थानों के पास जाएगा। इससे देश में हजारों नए उच्च-तकनीकी रोजगार पैदा होंगे और रक्षा आयात पर विदेशी मुद्रा का खर्च शून्य के करीब पहुंचेगा। भारत अब केवल हथियारों का खरीदार नहीं, बल्कि उन्नत सैन्य तकनीक का निर्माता और निर्यातक बनने के निर्णायक मोड़ पर खड़ा है।






