
संवाद 24 नई दिल्ली। हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ते विमान में बैठे यात्रियों के लिए इससे ज्यादा खौफनाक मंजर क्या हो सकता है कि चंद पलों के भीतर प्लेन सीधे 300 फीट नीचे आ गिरे। फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान में हुई इस भयानक घटना की शुरुआती जांच रिपोर्ट ने अब नागरिक उड्डयन जगत में हड़कंप मचा दिया है। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB – Aircraft Accident Investigation Bureau) की प्रारंभिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि विमान के मुख्य पायलट यानी पायलट-इन-कमांड (PIC) का ‘साइको-एक्टिव सब्सटेंस’ (मादक या मानसिक संतुलन प्रभावित करने वाले पदार्थ) के लिए किया गया कंफर्मेटरी टेस्ट पॉजिटिव (नॉन-नेगेटिव) आया है। इस खुलासे के बाद सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा को दांव पर लगाने को लेकर कड़े सवाल उठने लगे हैं।
आसमान में अचानक क्या हुआ था? 300 फीट का फ्री-फॉल
यह गंभीर वाकया फुकेट (थाईलैंड) से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए रवाना हुई एअर इंडिया की फ्लाइट AI-2379 (विमान: एयरबस A320, रजिस्ट्रेशन VT-EXO) के दौरान पेश आया था। विमान जब क्रूज़िंग एल्टीट्यूड (सामान्य सुरक्षित ऊंचाई) पर था, तभी अचानक एक तीव्र झटके के साथ विमान करीब 300 फीट नीचे गिर गया। विमान के अचानक अनियंत्रित अंदाज में नीचे आने से केबिन के भीतर अफरा-तफरी मच गई। सीट बेल्ट न बांधे यात्रियों और केबिन क्रू के सदस्य हवा में उछलकर छत और सीटों से जा टकराए। इस दर्दनाक घटना में कम से कम 17 यात्री और चालक दल के सदस्य घायल हुए थे। कई यात्रियों को रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल) और गर्दन में गंभीर चोटें आईं। हालांकि, इसके बाद पायलटों ने किसी तरह विमान को संभालते हुए दिल्ली में सुरक्षित लैंड कराया, जहां घायलों को तुरंत आपातकालीन प्राथमिक उपचार दिया गया।
मौसम का टर्बुलेंस या पायलट की बड़ी लापरवाही?
घटना के शुरुआती घंटों में यह माना जा रहा था कि खराब मौसम और हवा के अचानक बदले दबाव यानी ‘सीवियर टर्बुलेंस’ की वजह से विमान नीचे गिरा। लेकिन केंद्रीय उड्डयन सुरक्षा मानकों के तहत जब AAIB ने इस मामले की गहन जांच शुरू की, तो परतें कुछ और ही कहानी बयां करने लगीं।
जांच ब्यूरो ने इसे एक साधारण गड़बड़ी न मानकर ‘सीरियस इंसिडेंट’ (गंभीर विमानन घटना) के रूप में वर्गीकृत किया। इसके बाद मानक सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कॉकपिट क्रू का मेडिकल और साइको-एक्टिव टेस्ट कराया गया। अब सामने आई रिपोर्ट में पायलट-इन-कमांड का परिणाम ‘नॉन-नेगेटिव’ निकला है, जिसका सीधा अर्थ है कि उनके शरीर में मानसिक संतुलन, ध्यान या त्वरित निर्णय क्षमता को प्रभावित करने वाले प्रतिबंधित रसायनों/दवाओं की मौजूदगी पाई गई है।
DGCA को प्राथमिकता पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश
अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के कड़े सुरक्षा दिशा-निर्देशों के तहत तैयार की गई इस प्रारंभिक रिपोर्ट के सामने आने के बाद जांच एजेंसी ने विमानन नियामक डीजीसीए (DGCA) को तत्काल सख्त रुख अपनाने को कहा है। AAIB ने सिफारिश की है कि यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आरोपी पायलट के खिलाफ त्वरित और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, साइको-एक्टिव पदार्थों में न सिर्फ अवैध नशीले पदार्थ आते हैं, बल्कि कुछ ऐसी तीव्र चिकित्सकीय दवाएं (जैसे एंटी-डिप्रेसेंट, नींद की गोलियां या अत्यधिक पेनकिलर्स) भी शामिल होती हैं, जिनके असर में कॉकपिट संभालना कानूनन अपराध है। ऐसी दवाएं पायलट के ‘रिफ्लेक्स’ (त्वरित प्रतिक्रिया) को धीमा कर देती हैं, जिससे आपातकाल में गलत बटन दबने या गलत इनपुट देने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
विस्तृत जांच अभी जारी, सवालों के घेरे में एअर इंडिया
एएआईबी ने साफ किया है कि यह केवल एक प्रारंभिक रिपोर्ट है। तकनीकी पहलुओं, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (ब्लैक बॉक्स), कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और पायलटों के बीच हुई बातचीत के अंतिम विश्लेषण के बाद ही विस्तृत फाइनल रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।






