
संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति के सबसे संवेदनशील दौर में किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक एक ऐतिहासिक घटनाक्रम का गवाह बनने जा रही है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली द्विपक्षीय शिखर वार्ता पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों और दबाव के बीच यह बैठक केवल दो राष्ट्रप्रमुखों की सामान्य मुलाकात नहीं है, बल्कि यह भविष्य के भू-राजनीतिक और आर्थिक संतुलन की नई दिशा तय करने का मंच साबित होने वाली है।
ऊर्जा सुरक्षा और खाद आपूर्ति: भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता
पश्चिम एशिया के बढ़ते संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में जारी उथल-पुथल के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि अपनी 1.4 अरब की आबादी की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वर्तमान में रूस, भारत के सबसे बड़े कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शीर्ष पर है। इस बैठक का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु दीर्घकालिक रियायती तेल अनुबंध और भारतीय किसानों के लिए निर्बाध रासायनिक उर्वरक (फर्टिलाइजर) की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। हाल ही में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के मॉस्को दौरे के दौरान रूसी नेतृत्व ने ईंधन और खाद की अटूट सप्लाई का भरोसा दिया था। अब दोनों शीर्ष नेता इस रणनीतिक साझेदारी को संस्थागत रूप देने के लिए औपचारिक समझौतों पर मुहर लगा सकते हैं।
रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम: S-400 और ‘मेक इन इंडिया’ स्पेयर पार्ट्स
भारतीय सेना की सीमाओं पर अभेद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली आधुनिक ‘S-400 ट्रायम्फ’ वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की शेष खेपों की जल्द डिलीवरी इस वार्ता के प्रमुख एजेंडे में शामिल है। इसके साथ ही अतिरिक्त मिसाइलों का बफर स्टॉक तैयार करने और भारत की धरती पर ही इनके रख-रखाव (MRO) व स्पेयर पार्ट्स के सह-उत्पादन और स्वदेशीकरण पर भी गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों देशों की कोशिश है कि भविष्य में किसी भी बाहरी प्रतिबंध का असर भारत के रक्षा साजो-सामान और तत्परता पर न पड़े।
व्यापार असंतुलन और भारतीय उत्पादों के लिए नया बाजार
भारत और रूस ने वर्ष 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर के पार ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि, मौजूदा व्यापार में रूस की ओर से ऊर्जा निर्यात का हिस्सा बहुत बड़ा है, जिससे व्यापार संतुलन रूस के पक्ष में झुका हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी इस असंतुलन को पाटने के लिए रूसी बाजार में भारतीय उत्पादों की व्यापक पहुंच पर जोर देंगे। भारत चाहता है कि रूस अपने दरवाजे:
1- फार्मास्यूटिकल (दवा निर्माण) और उन्नत स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र,
2- सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और सॉफ्टवेयर समाधान,
3- कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद,
4- ऑटोमोबाइल पार्ट्स और उपभोक्ता वस्तुओं के लिए और अधिक खोले।
प्रतिबंधों का तोड़: स्वतंत्र द्विपक्षीय भुगतान तंत्र और UPI
पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते ‘स्विफ्ट’ (SWIFT) बैंकिंग नेटवर्क से बाहर हुए लेन-देन को सुगम बनाने के लिए दोनों देश एक फुल-प्रूफ, स्वतंत्र पेमेंट मैकेनिज्म पर तेजी से काम कर रहे हैं। इस वार्ता में भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और रूस के मीर (Mir) या अन्य प्रत्यक्ष वित्तीय नेटवर्क के आपसी समन्वय, स्थानीय मुद्राओं (रुपया-रूबल) में सीधे व्यापार निपटान और भविष्य के डिजिटल वित्तीय ढांचे को अंतिम रूप देने पर ठोस रणनीति बनेगी। इसका सीधा उद्देश्य डॉलर-निर्भरता को कम करके निर्बाध व्यापार सुनिश्चित करना है।
कूटनीतिक संदेश और ब्रिक्स का रोडमैप
बिश्केक में होने वाली यह बैठक केवल एकतरफा वार्ता नहीं है, बल्कि 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले आगामी ‘ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन’ की रूपरेखा भी तय करेगी। जहाँ एक ओर पश्चिमी देश रूस को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने के प्रयास में हैं, वहीं भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को बरकरार रखते हुए राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा है। यह महा-बैठक स्पष्ट संदेश देती है कि 21वीं सदी की बहुध्रुवीय दुनिया (Multipolar World) में भारत अपनी विदेश नीति के फैसले बिना किसी बाहरी दबाव के, केवल अपने नागरिकों की समृद्धि और वैश्विक स्थिरता को ध्यान में रखकर ही तय करेगा।






