
संवाद 24 पश्चिम बंगाल। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा राज्य प्रशासन की कार्यशैली पर बेहद कड़ा हमला बोला है। कोलकाता में आयोजित तृणमूल कांग्रेस की छात्र इकाई (TMCP) की एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शासन व्यवस्था में पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर लोकतंत्र की नींव को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि उनके शासनकाल में पुलिस का चेहरा मानवीय हुआ करता था, लेकिन मौजूदा व्यवस्था ने इसे एक दमनात्मक और ‘राक्षसी’ संस्था में तब्दील कर दिया है।
रक्षाबंधन पर कार्यकर्ताओं की रक्षा का संकल्प
छात्र एवं युवा समर्थकों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य भर में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित और परेशान किया जा रहा है। रक्षाबंधन के पावन पर्व का संदर्भ देते हुए उन्होंने ऐलान किया कि वह अपने समर्थकों और जनता पर हो रहे प्रशासनिक अत्याचारों को बर्दाश्त नहीं करेंगी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर मोर्चे पर लड़ेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भय का माहौल बनाने के लिए जानबूझकर पुलिस तंत्र को आगे किया जा रहा है, ताकि विपक्ष की आवाज को दबाया जा सके।
सड़कों पर सीधे जनता से जुड़ने का फैसला
ममता बनर्जी ने प्रशासन द्वारा उनकी रैलियों और जनसभाओं को अनुमति न दिए जाने पर भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने दो टूक कहा कि अब वह रैलियों की मंजूरी हासिल करने के लिए बार-बार अदालतों का दरवाजा खटखटाकर कीमती समय जाया नहीं करेंगी।
उन्होंने स्पष्ट किया:
1- यदि प्रशासन जनसभाओं के लिए मैदान या मंच की अनुमति नहीं देता है, तो वह सीधे जनता के बीच जाएंगी और सड़कों पर पैदल मार्च करेंगी।
2- सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए किसी प्रशासनिक अनुमति के बजाय अब वे सीधे जनता से जनसमर्थन और सहमति मांगेंगी।
3- पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हो रहे कथित हमलों को लेकर उन्होंने हमलावरों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि विरोध की इन हिंसक कोशिशों से पार्टी का मनोबल नहीं टूटेगा।
चुनाव ‘हाईजैक’ और संस्थाओं के दुरुपयोग का गंभीर आरोप
ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं और प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग करके जनादेश को प्रभावित करने का प्रयास किया गया है। उनके मुताबिक, मतदाता सूचियों में मनमाने ढंग से बदलाव करके और कई वैध मतदाताओं के नाम हटाकर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। उन्होंने इसे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बताते हुए कहा कि जनता सब देख रही है और सही समय पर इसका जवाब देगी।
हॉकरों के विस्थापन पर कड़ा रुख: पुनर्वास या 25,000 रुपये मासिक मुआवजा
राज्य में चलाए जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियानों पर भी उन्होंने वर्तमान सरकार को आड़े हाथों लिया। फुटपाथों और सड़कों के किनारे रोजी-रोटी कमाने वाले छोटे दुकानदारों व हॉकरों के मुद्दे पर उन्होंने मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। ममता बनर्जी ने कहा कि शहर के सौंदर्यीकरण या अतिक्रमण हटाने के नाम पर गरीबों की आजीविका नहीं छीनी जा सकती। यदि प्रशासन हॉकरों को हटाना चाहता है, तो पहले उनके लिए एक व्यवस्थित और स्थायी पुनर्वास नीति लागू की जानी चाहिए। जब तक उन्हें उचित स्थान नहीं दिया जाता, तब तक सरकार को प्रत्येक प्रभावित हॉकर परिवार को 25,000 रुपये प्रति माह का वित्तीय मुआवजा देना चाहिए ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।
सियासी हलकों में हलचल तेज
ममता बनर्जी के इन आक्रामक बयानों और राज्यव्यापी पैदल मार्च के ऐलान के बाद बंगाल की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। छात्र रैली से शुरू हुआ यह तीखा राजनीतिक वार-पलटवार आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है। टीएमसी सुप्रीमो के सीधे जनता की अदालत में जाने के फैसले ने विरोधी दलों के सामने नई रणनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।






