
संवाद 24 नई दिल्ली। भारत और मध्य एशिया के कूटनीतिक रिश्तों में रविवार को एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान की दो दिवसीय राजकीय यात्रा ऐतिहासिक सफलताओं और रणनीतिक समझौतों के साथ संपन्न हुई। इस यात्रा के दौरान न केवल भारत की परमाणु ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति पर मुहर लगी, बल्कि उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑली दाराजली डस्टलिक’ (Order of Oliy Darajali Dustlik) से सम्मानित किया। दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रूप से ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत कर दिया है।
पीएम मोदी के खाते में जुड़ा 36वां अंतरराष्ट्रीय सर्वोच्च सम्मान
ताशकंद स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित गरिमामय समारोह के दौरान राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री मोदी को यह सर्वोच्च राजकीय पदक पहनाया और उन्हें भारत-उज्बेकिस्तान मैत्री का सच्चा ध्वजवाहक और अपना ‘करीबी मित्र’ बताया। किसी भी विदेशी राष्ट्र द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रदान किया जाने वाला यह 36वां सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। यह वैश्विक पटल पर भारत के बढ़ते प्रभाव, प्रधानमंत्री मोदी के सशक्त नेतृत्व और मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के गहरे सांस्कृतिक व कूटनीतिक विश्वास का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी छलांग: यूरेनियम आपूर्ति पर दीर्घकालिक समझौता
इस द्विपक्षीय वार्ता की सबसे बड़ी उपलब्धि भारत के लिए यूरेनियम आपूर्ति का दीर्घकालिक अनुबंध रहा। ऊर्जा के स्वच्छ और टिकाऊ स्रोतों की दिशा में तेजी से बढ़ रहे भारत के लिए यह समझौता अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उज्बेकिस्तान दुनिया के शीर्ष यूरेनियम उत्पादक देशों में शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में पुष्टि की कि दोनों देश यूरेनियम की निर्बाध और दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक मजबूत व्यवस्था स्थापित कर रहे हैं, जिससे भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को निरंतर ईंधन प्राप्त होगा और देश की ‘नेट-जीरो कार्बन’ उत्सर्जन नीति को नई ताकत मिलेगी।
‘न्यू ताशकंद’ और गुजरात की ‘गिफ्ट सिटी’ के बीच तकनीकी साझेदारी
वार्ता के दौरान शहरी विकास, आधुनिक बुनियादी ढांचे और वित्तीय तकनीक के क्षेत्र में सहयोग पर भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान में निर्माणाधीन महा-परियोजना ‘न्यू ताशकंद’ का उल्लेख करते हुए भारत के गुजरात स्थित अत्याधुनिक ‘गिफ्ट सिटी’ (GIFT City) के साथ अनुभव साझा करने का प्रस्ताव रखा। पीएम मोदी ने उज्बेक प्रतिनिधिमंडल को भारत आकर स्मार्ट सिटी निर्माण, टिकाऊ शहरी नियोजन और वित्तीय तकनीकों के बेहतरीन मॉडल का अध्ययन करने के लिए आमंत्रित किया।
सिस्टर-सिटी और व्यापक समझौते
दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की 15वीं वर्षगांठ के ऐतिहासिक अवसर पर कई अहम समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए:
1- तीन सिस्टर-सिटी और सिस्टर-स्टेट समझौते: क्षेत्रीय स्तर पर सीधे संपर्क, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए तीन प्रमुख सिस्टर-सिटी समझौतों को अंतिम रूप दिया गया।
2- पारंपरिक चिकित्सा और आयुर्वेद: वर्ष 2026–2030 के रोडमैप के तहत पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों, विशेषकर आयुर्वेद और योग के विस्तार पर सहमति बनी। ताशकंद में आयोजित विशेष योग सत्र में भी उज्बेक नागरिकों के उत्साह ने दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा दी।
3- अंतर-एजेंसी परामर्श और व्यापार: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और रक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिए संस्थागत तंत्र स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की गई।
मध्य एशिया में भारत की मजबूत धमक
यह ऐतिहासिक दौरा भारत की ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है। ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और रणनीतिक स्वायत्तता के लिहाज से उज्बेकिस्तान के साथ हुआ यह गठजोड़ आने वाले दशकों में दोनों देशों के आर्थिक और तकनीकी विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।






