
संवाद 24 डेस्क। धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के रौद्र रूप ने पिछले 23 वर्षों का रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया है। लगातार मूसलाधार बारिश और पहाड़ों से उतरे भारी पानी के सैलाब ने चित्रकूट और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है। हालांकि रविवार को नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन पानी उतरने के साथ ही जो मंजर सामने आ रहा है, वह बेहद भयावह और चिंताजनक है। पुलों, प्रमुख सड़कों और हाईवे पर प्रकृति के इस कहर के गहरे निशान साफ देखे जा सकते हैं।
झांसी-मीरजापुर हाईवे पर 10 फीट तक धंसी सड़क
बाढ़ के तीव्र बहाव के कारण झांसी-मीरजापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कर्वी स्थित मंदाकिनी नदी के मुख्य पुल की एप्रोच रोड बांदा की तरफ करीब 10 फीट तक अंदर धंस गई है। पानी के तेज बहाव ने पुल के किनारों की मिट्टी को पूरी तरह काट दिया है, जिससे हाईवे का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है और नीचे गहरा गड्ढा बन गया है। हादसे की आशंका को भांपते हुए जिला प्रशासन और यातायात पुलिस ने तत्काल प्रभाव से पुल के ऊपर से सभी भारी और व्यावसायिक वाहनों का आवागमन रोक दिया है। मौके पर बैरिकेडिंग कर केवल दोपहिया और हल्के चार पहिया वाहनों को ही अत्यंत सावधानी के साथ निकाला जा रहा है। भारी वाहनों को वैकल्पिक एवं डायवर्टेड मार्गों से भेजा जा रहा है, जिससे लंबा जाम और परिवहन संकट खड़ा हो गया है।
कई पुल बहे, यूपी और मध्य प्रदेश का संपर्क टूटा
मंदाकिनी और उसकी सहायक नदियों के उफान ने अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी को बुरी तरह प्रभावित किया है।
1- हनुमानधारा मार्ग: इस मार्ग पर बना प्रमुख पुल बाढ़ के तेज बहाव में बह गया है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।
2- मोहकमगढ़ और तरौंहा पुल: इन दोनों महत्वपूर्ण पुलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
3- सतना संपर्क मार्ग: चित्रकूट-सतना और मानिकपुर-सतना मार्ग पर कई स्थानों पर रपटे और छोटी पुलिया बह जाने तथा सड़क कटने से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच का सीधा सड़क संपर्क अस्त-व्यस्त हो चुका है।
23 साल का टूटा रिकॉर्ड, खतरे के निशान से 8.70 मीटर ऊपर
शनिवार को मंदाकिनी नदी का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़कर 135.200 मीटर तक पहुंच गया था। यह स्तर वर्ष 2003 में दर्ज किए गए 134.500 मीटर के उच्च बाढ़ स्तर (HFL) से भी 70 सेंटीमीटर अधिक था। नदी अपने खतरे के निशान से लगभग 8.70 मीटर ऊपर बह रही थी। इसके चलते ऐतिहासिक रामघाट, परिक्रमा मार्ग, प्रमुख मंदिर, दुकानें और आसपास की तमाम रिहायशी बस्तियां पूरी तरह जलमग्न हो गई थीं।
मप्र के मुख्यमंत्री ने किया हवाई सर्वेक्षण, 15 टीमें राहत में जुटीं
आपदा की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने वायुसेना के हेलीकॉप्टर से बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और राहत शिविरों में पहुंचकर पीड़ितों को राहत सामग्री वितरित की। वर्तमान में एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और पीएसी (PAC) समेत आपदा प्रबंधन की 15 विशेष टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। राहत दल मोटरबोट और हेलीकॉप्टर के जरिए छतों और ऊंचे स्थानों पर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल रहे हैं।
पानी उतरने के बाद महा-चुनौतियां: संक्रमण और पुनर्वास
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने आम जनता से अपील की है कि जब तक तकनीकी रूप से सड़कों और पुलों की सुरक्षा सुनिश्चित न हो जाए, तब तक अनावश्यक यात्रा से बचें। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ का पानी उतरने के बाद फैलने वाली संक्रामक बीमारियों की रोकथाम, कीचड़ की सफाई, स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति बहाल करना और बेघर हुए परिवारों का पुनर्वास करना है।






