भारत को रूस का बड़ा रक्षा प्रस्ताव: S-500 मिसाइल सिस्टम और Su-57 फाइटर जेट की पेशकश

संवाद 24 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हालिया कूटनीतिक वार्ताओं के बाद दोनों देशों के बीच सामरिक और रक्षा संबंधों को लेकर रणनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नई दिल्ली में प्रस्तावित आगामी उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक से पहले रूस ने भारत के समक्ष अपने दो सबसे आधुनिक और घातक हथियार प्रणालियों—’S-500 प्रोमेथियस’ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम और ‘Su-57 फेलन’ पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट—की बिक्री और तकनीकी साझेदारी का बड़ा प्रस्ताव रखा है। इस रणनीतिक पेशकश का उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तेजी से बदलते सुरक्षा संतुलन के बीच भारत की वायु और मिसाइल रक्षा क्षमताओं को एक नई ऊंचाई प्रदान करना है।

S-500 प्रोमेथियस: मिसाइल रोधी सुरक्षा का नया कवच
रूसी रक्षा प्रस्ताव का मुख्य आधार S-500 प्रोमेथियस सिस्टम है। रूस इसे भारतीय वायु सेना में पहले से तैनात S-400 ट्रायम्फ की सफलता के अगले चरण के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। उल्लेखनीय है कि S-400 प्रणाली ने भारतीय हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
तकनीकी विशेषताओं की बात करें तो S-500 दुनिया के सबसे शक्तिशाली अगली पीढ़ी के एयर और एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है:
1- मारक क्षमता और दायरा: इसकी इंटरसेप्शन रेंज लगभग 500 से 600 किलोमीटर तक है, जबकि इसका उन्नत अर्ली-वार्निंग रडार 800 किलोमीटर से अधिक की दूरी से आने वाले खतरों को ट्रैक कर सकता है।
2- त्वरित प्रतिक्रिया (Response Time): S-400 का रिस्पांस टाइम जहां करीब 10 सेकंड है, वहीं S-500 मात्र 4 सेकंड से भी कम समय में लक्ष्य पर प्रतिक्रिया करने में सक्षम है।
3- बहुआयामी मारक क्षमता: यह प्रणाली हाइपरसोनिक मिसाइलों, अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM), लो-अर्थ ऑर्बिट उपग्रहों और पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ विमानों (जैसे F-35 और F-22) को मार गिराने की क्षमता रखती है।

Su-57 फेलन: पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर की आवश्यकता
रूस का दूसरा बड़ा प्रस्ताव Su-57 फेलन स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर है। भारतीय वायु सेना वर्तमान में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की घटती संख्या की चुनौती से जूझ रही है। वहीं भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के ‘एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ (AMCA) प्रोजेक्ट के पूर्ण परिचालन में आने में अभी समय लगने की संभावना है। सीमा पार सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यह प्रस्ताव काफी अहम माना जा रहा है। चीन अपनी वायु सेना में 500 से अधिक J-20 स्टील्थ जेट्स शामिल कर चुका है और पाकिस्तान को भी चीनी J-35 स्टील्थ विमान मिलने की चर्चाएं हैं। Su-57 ट्विन-इंजन, सुपर-मैन्युवरेबल जेट है जो बिना आफ्टरबर्नर के मैक 1.3 से अधिक की सुपरक्रूज़ गति और अधिकतम मैक 2 की गति हासिल कर सकता है। इसमें रडार की पकड़ से बचने के लिए एडवांस्ड कंपोजिट मैटेरियल्स और इंटरनल वेपन्स बे दिए गए हैं।

स्वदेशी प्रोजेक्ट्स और रक्षा संतुलन की समीक्षा
हालांकि रूस का यह प्रस्ताव तकनीकी दृष्टि से बेहद मजबूत है, लेकिन भारत के रक्षा गलियारों में इसके रणनीतिक और बजटीय पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श हो रहा है। भारत वर्तमान में ‘प्रोजेक्ट कुशा’ पर काम कर रहा है, जिसके तहत S-400 श्रेणी का स्वदेशी लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम (LR-SAM) विकसित किया जा रहा है। साथ ही भारत का अपना बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रोग्राम भी उन्नत चरण में है। ऐसे में रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत किसी भी विदेशी सौदे में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी’ (ToT) को प्राथमिकता देगा। इसके अलावा, भारत अपनी रक्षा आपूर्ति में विविधता लाते हुए फ्रांस से राफेल और अमेरिका से अन्य रक्षा उपकरण शामिल कर रहा है। रूस ने इसके साथ ही Su-30MKI बेड़े के आधुनिकीकरण और अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन उपलब्ध कराने की भी पेशकश की है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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