
संवाद 24 सिंगापुर। बहुसांस्कृतिक और बहुधार्मिक पहचान के लिए वैश्विक स्तर पर मिसाल माने जाने वाले सिंगापुर में हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर भारतीयों और भारतीय मूल के नागरिकों के खिलाफ उठी नस्लीय नफरत की लहर ने सरकार को कड़ा रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा और सिंगापुर एयरलाइंस (SIA) के एयर इंडिया में निवेश से जुड़े मामलों को लेकर डिजिटल मंचों पर की जा रही अपमानजनक व नस्लभेदी टिप्पणियों पर सिंगापुर के शीर्ष नेतृत्व का गुस्सा फूट पड़ा है। देश के वरिष्ठ मंत्री, गृह एवं राष्ट्रीय सुरक्षा समन्वय मंत्री के. षणमुगम ने इन हरकतों को ‘शर्मनाक, भद्दा और पूरी तरह से अस्वीकार्य’ करार देते हुए पुलिस को जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
मानवीय त्रासदी पर नस्लीय तंज: नेपाल आपदा का दर्दनाक पहलू
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन में 1,000 से अधिक लोगों की जान चली गई, जिनमें सिंगापुर के 9 नागरिक भी लापता हो गए। जब मीडिया और राहत एजेंसियों ने लापता नागरिकों के संबंध में अपील और समाचार साझा किए, तो इंटरनेट पर कुछ असामाजिक तत्वों ने भारतीय मूल के पीड़ितों को देखकर अमानवीय और घिनौनी टिप्पणियां शुरू कर दीं।
सोशल मीडिया पर “वे हमारे अपने नहीं हैं”, “यहां केवल भारतीय चेहरे दिख रहे हैं, बचाव कार्य रोक दो”, और भारतीयों के खिलाफ प्रयुक्त होने वाले अपमानजनक शब्दों (जैसे ‘ABNN’) का खुला इस्तेमाल किया गया। मंत्री के. षणमुगम ने इन बयानों को रेखांकित करते हुए कहा कि जब परिवार अपनों के लिए रो रहे हैं, तब इस तरह की संवेदनहीनता और घृणा किसी भी सभ्य समाज के लिए अक्षम्य है। सिंगापुर रेड क्रॉस द्वारा नेपाल राहत के लिए लाखों डॉलर जुटाए जाने का उदाहरण देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकांश सिंगापुरी उदार हैं, लेकिन मुट्ठी भर लोग पूरे समाज के सद्भाव को दूषित करने का प्रयास कर रहे हैं।
एयर इंडिया निवेश और टेमासेक प्रमुख पर ‘ऑनलाइन मॉब’ का हमला
नफरत का यह सिलसिला केवल आपदा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका विस्तार आर्थिक मुद्दों तक भी पहुंच गया। हाल ही में यह रिपोर्ट सामने आई कि एयर इंडिया अपने शेयरधारकों – जिसमें सिंगापुर एयरलाइंस (SIA) शामिल है – से अतिरिक्त पूंजी जुटाने पर विचार कर रही है। इस खबर के आते ही इंटरनेट पर एक खास वर्ग ने भारतीय संस्कृति, खान-पान और जीवनशैली को निशाना बनाते हुए स्टीरियोटाइप टिप्पणियां (सांप, करी, परांठा और काले जादू जैसे फब्तियां) कसनी शुरू कर दीं। इतना ही नहीं, सिंगापुर की सरकारी निवेश कंपनी ‘टेमासेक’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) दिलहान पिल्ले संद्रासेगरा को भी केवल उनकी नस्लीय पृष्ठभूमि के कारण दुर्भावनापूर्ण ढंग से निशाना बनाया गया। सोशल मीडिया पर यह दुष्प्रचार फैलाया गया कि सीईओ भारतीय मूल के हैं, इसलिए वे एयर इंडिया का पक्ष ले रहे हैं। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए षणमुगम ने कहा कि यह तर्क पूरी तरह झूठा और मानहानिकारक है। उन्होंने कहा, “इस डिजिटल भीड़ के लिए तथ्य मायने नहीं रखते, उनके लिए केवल अपना पूर्वाग्रह और नस्लभेद मायने रखता है। दिलहान पिल्ले उतने ही सिंगापुरी हैं जितने हममें से कोई भी।”
गुमनामी की आड़ में छिपे चेहरों को बेनकाब करने की तैयारी
सिंगापुर सरकार ने साफ कर दिया है कि ऑनलाइन दुनिया में छद्म नामों के पीछे छिपकर जहर उगलने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। गृह मंत्रालय ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह इन टिप्पणियों की बारीकी से जांच करे ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसमें आपराधिक कानून और नस्लीय सौहार्द बिगाड़ने की धाराओं के तहत अपराध बनता है। इसके साथ ही, सिंगापुर का डिजिटल विकास और सूचना मंत्रालय (MDDI) फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन करने वाली सभी अपमानजनक पोस्ट और टिप्पणियों को तुरंत हटाया जा सके। मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की विकृत मानसिकता को शुरुआत में ही नहीं रोका गया, तो यह सामान्य बन जाती है और आगे चलकर समाज में शारीरिक हिंसा का रूप ले सकती है।
पूर्व प्रधानमंत्री ली सियन लूंग की दो टूक: ‘नफरत को नकारें’
वरिष्ठ मंत्री ली सियन लूंग ने भी इस विषय पर मुखर होते हुए नागरिकों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि आपदा और संकट के समय नागरिकों का दायित्व करुणा और एकजुटता दिखाना है, न कि नस्लीय दरार पैदा करना। सिंगापुर एक बहुत छोटा और विविधतापूर्ण देश है, जिसकी सबसे बड़ी ताकत उसका आपसी सौहार्द है। यदि भाषा, नस्ल या धर्म के आधार पर दीवारें खड़ी की गईं, तो देश की बुनियाद हिल जाएगी। भारत और सिंगापुर के बीच ऐतिहासिक, रणनीतिक और मजबूत आर्थिक संबंध हैं। आसियान क्षेत्र में सिंगापुर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में डिजिटल स्पेस में कुछ विघटनकारी तत्वों द्वारा फैलाई जा रही इस नफरत पर सिंगापुर सरकार का तत्काल और आक्रामक रुख यह संदेश देता है कि देश अपनी सामाजिक समरसता और द्विपक्षीय संबंधों से किसी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।






