
संवाद 24 नई दिल्ली। सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत के अचानक ताश के पत्तों की तरह ढहने के बाद पूरे इलाके में खौफ और सन्नाटा पसर गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के साउथ कैंपस से सटे इस सबसे बड़े छात्र हब में अब किताबों और पढ़ाई की नहीं, बल्कि डर और अनहोनी की चर्चा है। हादसे के बाद आसपास के पेइंग गेस्ट (PG) और हॉस्टल्स में रहने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राएं अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों की ओर रुख कर रहे हैं। जिन गलियों में देर रात तक छात्रों की चहल-पहल रहती थी, वहां अब केवल पुलिस की सायरन बजती गाड़ियां, नगर निगम की टीमें और डरे-सहमे छात्रों के चेहरे दिखाई दे रहे हैं।
परिजनों की दो टूक: ‘पढ़ाई बाद में, पहले जिंदा घर लौट आओ’
हादसे की खबर जैसे ही टीवी और सोशल मीडिया पर फैली, देश के अलग-अलग राज्यों – उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश – से माता-पिता के फोन लगातार बजने लगे। अपने जिगर के टुकड़ों की सलामती को लेकर घबराए माता-पिता ने बिना एक पल गंवाए बच्चों को तुरंत घर लौटने का फरमान सुना दिया है। कई परिजनों का कहना है कि वे अपने बच्चों को करियर बनाने और बेहतर भविष्य के लिए दिल्ली भेजते हैं, न कि जर्जर और अवैध इमारतों के मलबे में दबकर मरने के लिए। माता-पिता का साफ कहना है कि कॉलेज और परीक्षाएं बाद में देखी जाएंगी, सबसे पहले बच्चों की जिंदगी सुरक्षित होनी चाहिए।
माचिस की डिबिया जैसे कमरे: लालच में दांव पर लगाई मासूम जानें
सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में पीजी का कारोबार पिछले कुछ वर्षों में बेतहाशा बढ़ा है। स्थानीय छात्रों का आरोप है कि मकान मालिक हर महीने 15,000 से 25,000 रुपये तक भारी-भरकम किराया वसूलते हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर व्यवस्था बिल्कुल शून्य है। एक-एक छोटे कमरे को पार्टिशन बनाकर तीन-तीन छात्रों को ठूंस दिया जाता है। हवा और रोशनी तक की समुचित व्यवस्था नहीं होती। इतना ही नहीं, बिना किसी वैध नक्शे या आर्किटेक्ट की सलाह के पुरानी इमारतों पर तीन-चार मंजिलें अतिरिक्त तान दी जाती हैं। छात्रों का कहना है कि वे पढ़ाई के दबाव के बीच ऐसी असुरक्षित इमारतों में जान हथेली पर रखकर रहने को मजबूर थे।
आरोपियों की धरपकड़: पुलिस ने कसी नकेल, मकान मालिक पर शिकंजा
हादसे में हुई मौतों और भारी जनआक्रोश के बाद दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। साउथ कैंपस थाना पुलिस ने मामले में गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही की संगीन धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी इमारत मालिक और निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदारों की तलाश में कई जगहों पर छापेमारी की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच का दायरा सिर्फ मकान मालिक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी पता लगाया जाएगा कि रिहायशी इलाके में चल रहे अवैध निर्माण और तोड़फोड़ की अनदेखी किन अधिकारियों ने की। जो भी इस आपराधिक लापरवाही में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
सख्त कार्रवाई की मांग: क्या सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी जांच?
घटना के बाद से विभिन्न छात्र संगठनों में भारी आक्रोश है और जगह-जगह विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। छात्रों और रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) ने दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली सरकार से मांग की है कि सत्य निकेतन, विजय नगर, मुखर्जी नगर और करोल बाग जैसे सभी छात्र इलाकों में बने पीजी और हॉस्टलों का तत्काल ‘स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट’ कराया जाए। छात्रों का कहना है कि हर हादसे के बाद जांच कमेटियां बनती हैं और कुछ दिनों बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। अगर अब भी बिना सेफ्टी सर्टिफिकेट वाले अवैध पीजी सील नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में और भी मासूम जानें इस लालच की भेंट चढ़ती रहेंगी।






