
संवाद 24 नई दिल्ली। देश में टोल भुगतान व्यवस्था को वाहन चालकों के लिए और अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और संबंधित एजेंसियां एक बड़े बदलाव पर काम कर रही हैं। जिस प्रकार उपभोक्ता अपना मोबाइल नंबर बदले बिना टेलीकॉम कंपनी बदल लेते हैं (Mobile Number Portability), ठीक उसी तर्ज पर अब FASTag को भी एक बैंक से दूसरे बैंक में पोर्ट कराने की सुविधा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी की विंडस्क्रीन से पुराना FASTag स्टीकर उखाड़ने या नए बैंक से नया स्टीकर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
वाहन चालकों को बार-बार स्टीकर बदलने से मिलेगी मुक्ति
वर्तमान नियमों के तहत यदि कोई वाहन चालक अपना बैंक बदलना चाहता है, तो उसे पहले मौजूदा FASTag को बंद कराना पड़ता है और फिर दूसरे बैंक से नया FASTag खरीदकर गाड़ी पर चिपकाना पड़ता है। कई बार स्टीकर निकालते समय विंडस्क्रीन खराब होने या टैग के डैमेज होने की समस्या आती है। पोर्टेबिलिटी सुविधा लागू होने से गाड़ी पर लगा वही आरएफआईडी (RFID) स्टीकर सक्रिय रहेगा, केवल उसका डिजिटल लिंक पुराने बैंक खाते से हटाकर नए बैंक खाते से जोड़ दिया जाएगा।
खराब सर्विस और केवाईसी दिक्कतों का समाधान
सड़क परिवहन क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को बेहतर विकल्प देना और बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है।
1- अक्सर देखा गया है कि कुछ बैंकों के सर्वर डाउन रहने या वॉलेट रिचार्ज में देरी के कारण टोल प्लाजा पर चालकों को तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
2- ‘वन व्हीकल, वन फास्टैग’ नियम के बाद केवाईसी (KYC) और ब्लैकलिस्टिंग से जुड़ी समस्याओं के चलते भी कई ग्राहक परेशान रहे हैं।
3- पोर्टेबिलिटी की सुविधा मिलने से उपभोक्ता बिना किसी अतिरिक्त कागजी झंझट के उस बैंक का चुनाव कर सकेंगे जिसकी सेवाएं तेज और निर्बाध हों।
कैसे काम करेगी प्रस्तावित व्यवस्था?
प्रस्तावित योजना के तहत यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी। वाहन मालिक नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) या राजमार्ग प्राधिकरण के पोर्टल/ऐप पर जाकर अपने वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर और मौजूदा FASTag आईडी के जरिए पोर्टिंग रिक्वेस्ट दर्ज कर सकेंगे। नया बैंक आवश्यक ऑनलाइन वेरिफिकेशन पूरा कर उसी टैग आईडी को अपने सिस्टम में मैप कर लेगा।
यह कदम डिजिटल टोलिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की रणनीति का हिस्सा है। संबंधित विभाग इस तकनीकी ढांचे का परीक्षण कर रहे हैं, जिसके बाद इसे औपचारिक रूप से देशभर में लागू किए जाने की संभावना है।






