NEET-UG पेपर लीक मामला: राउज एवेन्यू कोर्ट ने 13 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 10 अगस्त तक बढ़ाई

संवाद 24 नई दिल्ली। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘NEET-UG’ धांधली मामले में राजधानी दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष फास्ट ट्रैक अदालत से बड़ी खबर सामने आ रही है। देश भर के लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य को प्रभावित करने वाले इस बड़े फर्जीवाड़े और पेपर लीक मामले में कानूनी प्रक्रिया अब एक नए और बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। विशेष अदालत ने मामले के सभी 13 आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी है। इसके साथ ही, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दाखिल किए गए विशालकाय आरोपपत्र (चार्जशीट) की प्रारंभिक जांच (स्क्रूटनी) पूरी होने के बाद अदालत इस पर संज्ञान लेने पर फैसला सुनाने जा रही है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के सख्त रुख, बचाव पक्ष की अनोखी मांगों और जांच एजेंसी की आक्रामक रणनीति ने इस कानूनी लड़ाई को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

20 हजार पन्नों का विशालकाय आरोपपत्र: सबूतों का अंबार
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले की गहन जांच के बाद अदालत के समक्ष जो चार्जशीट पेश की है, वह अपने आप में इस महाघोटाले की गहराई को दर्शाती है। यह आरोपपत्र कोई साधारण दस्तावेज नहीं, बल्कि पूरे 20,000 पन्नों की एक विस्तृत केस फाइल है।
360 गवाह: सीबीआई ने जांच के दौरान 360 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें परीक्षा केंद्रों के कर्मचारी, तकनीकी विशेषज्ञ, कोचिंग संस्थानों के संचालक और परीक्षार्थी शामिल हैं।
422 दस्तावेजी साक्ष्य: डिजिटल साक्ष्यों, प्रश्नपत्रों के लीक होने के डिजिटल ट्रेल, बैंक लेनदेन और व्हाट्सएप चैट सहित 422 महत्वपूर्ण दस्तावेज अदालत में दाखिल किए गए हैं।
43 भौतिक साक्ष्य: मोबाइल फोन, लैपटॉप, सिम कार्ड और पेन ड्राइव जैसी 43 भौतिक सामग्रियां जब्त कर कोर्ट के सुपुर्द की गई हैं।
अदालत को सूचित किया गया कि बचाव पक्ष को चार्जशीट की सॉफ्ट कॉपी (पेन ड्राइव में) उपलब्ध करा दी गई है। हालांकि, आरोपियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं का तर्क है कि 20,000 पन्नों के विशालकाय रिकॉर्ड को पेन ड्राइव के माध्यम से जेल में बंद रहते हुए पढ़ना और उनका अध्ययन करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। इसलिए उन्होंने दस्तावेजों की हार्ड कॉपी की मांग की है ताकि वे आरोपियों की जमानत और बचाव रणनीति तैयार कर सकें।

आरोपियों की बड़ी पेशकश: पॉलीग्राफ और ब्रेन मैपिंग टेस्ट के लिए तैयार
मामले में नया मोड़ तब आया जब बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में एक अनोखी याचिका पेश की। आरोपियों की ओर से तर्क दिया गया कि उनके मुवक्किल अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए स्वेच्छा से पॉलीग्राफ (लाइ डिटेक्टर) टेस्ट, नार्को टेस्ट और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
हालांकि, जांच एजेंसी CBI ने इस मांग का कड़ा विरोध किया है। सीबीआई के अभियोजक ने अदालत में तर्क दिया कि यह आवेदन कानूनी रूप से पोषणीय (Maintainable) नहीं है और केवल मुकदमे की प्रक्रिया में देरी करने के उद्देश्य से दाखिल किया गया है। एजेंसी ने कोर्ट से अनुरोध किया कि इस तरह के बेबुनियाद आवेदनों के लिए आरोपियों पर भारी जुर्माना (Cost) लगाया जाना चाहिए, क्योंकि सरकार ने इस संवेदनशील मामले के त्वरित निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया है।

“समय की कद्र समझिए!” – समय पर न पहुंचने पर न्यायाधीश की सख्त फटकार
सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने वकीलों के रवैये पर भारी नाराजगी जताई। सुबह 10 बजे सुनवाई शुरू होते ही जब बचाव पक्ष के कुछ प्रमुख वकील समय पर उपस्थित नहीं हुए, तो अदालत का माहौल सख्त हो गया।
न्यायाधीश अजय गुप्ता ने कड़े शब्दों में हिदायत देते हुए कहा:
“कृपया मेरी चिंता को समझिए। इस संवेदनशील मामले में हर मिनट महत्वपूर्ण है। पहले जब इस मामले की सुनवाई हो रही थी, तब इसे जल्द से जल्द निपटाने के सख्त निर्देश नहीं थे। लेकिन अब यह फास्ट ट्रैक मामला है। आप सभी को रोजाना ठीक सुबह 10:00 बजे अदालत में उपस्थित होना अनिवार्य है। यह ढिलाई ऐसे नहीं चल सकती।”
न्यायाधीश ने वकीलों को चेतावनी देते हुए सुनवाई को एक घंटे के लिए स्थगित किया और भविष्य में किसी भी प्रकार की देरी न करने के सख्त निर्देश दिए।

आगे की कानूनी राह: आगामी तारीखें बेहद अहम
इस मामले में आने वाले दिन कानूनी रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं:
संज्ञान और याचिकाओं पर फैसला: अदालत जल्द ही आरोपियों की नार्को-पॉलीग्राफ टेस्ट कराने संबंधी याचिका और हार्ड कॉपी उपलब्ध कराने के अनुरोध पर अपना फैसला सुनाएगी। साथ ही, सीबीआई चार्जशीट पर संज्ञान लेने की प्रक्रिया पूरी होगी।
जमानत याचिका पर सुनवाई: मामले के दो प्रमुख आरोपियों – विकास बिवाल और दिनेश बिवाल – की जमानत याचिकाओं पर विस्तृत बहस के लिए 18 अगस्त की तारीख तय की गई है।
लाखों छात्रों और अभिभावकों की निगाहें अब राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। क्या सीबीआई का यह 20,000 पन्नों का आरोपपत्र परीक्षा माफिया के इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश कर पाएगा, या फिर कानूनी दांव-पेंच में मामला लंबा खिंचेगा? संवाद 24 इस मामले की हर पल की अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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