
भारत की सुरक्षा एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता मिली है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग के अहम सदस्य और उसके छोटे भाई गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई को अमेरिका से प्रत्यर्पित करवाकर भारत लाया गया है। गुरुवार को जैसे ही अनमोल ने दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर कदम रखा, इंतज़ार कर रही NIA टीम ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया।
अनमोल उन गिने चुने गैंगस्टरों में से एक रहा है जो विदेश में बैठकर भारत में फायरिंग, रंगदारी, सुपारी किलिंग और गैंगवार को अंजाम दिलाने में सक्रिय था। उसकी गिरफ्तारी को भारत की एजेंसियों ने “अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर सबसे निर्णायक चोट” बताया है।
एयरपोर्ट से सीधे NIA की हिरासत 11 दिन की कस्टडी
गिरफ्तारी के बाद NIA ने अनमोल को कड़ी सुरक्षा के बीच पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे 11 दिन की NIA कस्टडी में भेज दिया है।
सूत्रों के अनुसार, NIA ने अनमोल के खिलाफ:
आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने,
विदेश से हथियार और धन की सप्लाई,
सोशल मीडिया के जरिये गैंग रीक्रूटमेंट,
और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी मर्डर प्लान जैसे मामलों में पूछताछ करनी है। NIA को उम्मीद है कि अनमोल से पूछताछ के बाद विदेशी नेटवर्क, फंडिंग सोर्सेज, और ऑनलाइन ऑपरेटिंग मॉडल की कई परतें खुलेंगी।
कौन है अनमोल बिश्नोई?
अनमोल बिश्नोई, भारत के कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई है। युवाओं को सोशल मीडिया पर फॉलोअर बनाकर गैंग में शामिल करने की उसकी रणनीति ने लॉरेंस गिरोह को नई ताकत दी थी। अनमोल पर आरोप है कि वह विदेश से:
शूटर्स की लोकेशन तय करता था,
टारगेट की जानकारी भेजता था,
हमलों के लिए पैसे ट्रांसफर करता था,
और पाकिस्तान, कनाडा, अमेरिका के गैंग नेटवर्क से समन्वय करता था।
भारत आते ही NIA ने कहा कि अनमोल की गिरफ्तारी कई अनसुलझी हाई-प्रोफाइल वारदातों के सूत्र जोड़ सकती है।
गैंग का नेटवर्क कैसे कमजोर हुआ?
अनमोल की गिरफ्तारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए सबसे बड़ा झटका मानी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार:
पिछले 1 वर्ष में लॉरेंस गैंग के 20 से अधिक सक्रिय सदस्य पकड़े जा चुके हैं। उनके साथ जुड़े ड्रग सप्लायर, हथियार तस्कर और फंडिंग एजेंट भी गिरफ्त में आए। कई देशों में बसे गैंगस्टरों की गतिविधियों पर संयुक्त निगरानी बढ़ाई गई। इन कार्रवाइयों का सीधा असर गैंग की ताकत पर पड़ा है। अनमोल की गिरफ्तारी के बाद लॉरेंस गिरोह के विदेश में सक्रिय कई लिंक अब लगभग टूटने की कगार पर पहुंच चुके हैं।
गैंगवॉर का समीकरण बदल रहा है: गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा का बढ़ता दबदबा
रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में लॉरेंस बिश्नोई गैंग लगातार कमजोर होता दिखा है। इसके विपरीत, विरोधी गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा का प्रभाव बढ़ रहा है। दुबई, कनाडा और अमेरिका में इन दोनों समूहों के बीच गैंगवॉर तेज़ हो चुका है। कुछ महीने पहले दुबई में पहली बार इन दो गैंगों के बीच आमना-सामना हुआ था, जहां गोदारा गिरोह ने लॉरेंस के एक करीबी शूटर को मार गिराया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि विदेशों में बैठा हर शूटर जो पहले “अछूत” माना जाता था, अब निशाने पर है। अनमोल की गिरफ्तारी इन गैंगों के बीच शक्ति संतुलन को और प्रभावित कर सकती है।
भारत में बढ़ते हाई प्रोफाइल टारगेट किलिंग के सूत्र
भारत में पिछले कुछ वर्षों में कई हाई-प्रोफाइल हमले हुए जिनकी साजिश विदेश से रची गई। इनमें से कई वारदातों में अनमोल का नाम उभरा है:
उद्योगपतियों से रंगदारी
सिंगर्स और सेलिब्रिटीज को धमकी
राजनेताओं पर हमले की योजनाएँ
हथियारों की तस्करी
क्रॉस-बॉर्डर गैंग गठजोड़
NIA इस बात की जांच कर रही है कि अनमोल की ‘ऑपरेशन कमांड’ कहां से चलती थी और उसके बीच पाकिस्तान आधारित नेटवर्क का कितना हस्तक्षेप था।
अमेरिका में गिरफ्तारी से भारत में प्रत्यर्पण तक की कहानी
अनमोल कई सालों से अमेरिका में फर्जी पहचान के सहारे रह रहा था। इंटरपोल नोटिस के बाद अमेरिकी एजेंसियों ने उसे ट्रैक किया और भारत के सहयोग से उसे हिरासत में लिया। इसके बाद: भारत ने प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा, अमेरिका ने दस्तावेज़ों की जांच की, फिर कड़े नियमों के तहत भारतीय एजेंसियों को अनमोल को सौंप दिया। यह प्रक्रिया भारत के लिए एक कूटनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि कई बार ऐसे अपराधी झूठी पहचान के कारण आसानी से नहीं मिलते।
NIA की पूछताछ में क्या-क्या खुल सकता है?
जांच एजेंसियों के अनुसार, अनमोल से पूछताछ में कई अहम खुलासे हो सकते हैं:
✔ किस–किस देश में बिश्नोई गैंग की शाखाएँ सक्रिय हैं?
✔ क्या पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से लिंक हैं?
✔ भारत में कब, कहां और कैसे सुपारी किलिंग की योजना बनाई जाती थी?
✔ सोशल मीडिया–डार्क वेब के जरिए कैसे लड़के गैंग में भर्ती होते थे?
✔ किस तरह क्रिप्टोकरेंसी के जरिए करोड़ों रुपये विदेश भेजे जाते थे?
जांच अधिकारियों को उम्मीद है कि अनमोल का डिजिटल डाटा गैंग की पूरी संरचना को सामने ला देगा।
क्या बिश्नोई गैंग की कमर टूट जाएगी?
विशेषज्ञों का कहना है कि लॉरेंस पहले से जेल में है, अनमोल अब NIA की गिरफ्त में है, विदेश में बैठे कई सदस्य लगातार पकड़े जा रहे हैं। ऐसे में यह गिरोह अपनी रणनीति, फंडिंग और ऑपरेशन लगभग खो चुका है। अगर NIA को अनमोल से वह जानकारी मिलती है जिसकी उम्मीद है, तो आने वाले महीनों में इस गैंग के पूरी तरह ध्वस्त होने की संभावना है।
अनमोल बिश्नोई की अमेरिका से भारत वापसी केवल एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्राइम नेटवर्क पर सीधी चोट है। यह साफ संकेत है कि भारत अब सीमा पार से चल रहे गैंगस्टर ऑपरेशनों को वैश्विक स्तर पर खत्म करने के लिए तैयार है। जैसे-जैसे NIA उसकी गिरफ्तारी के बाद पूछताछ आगे बढ़ाएगी, इस बात की पूरी संभावना है कि भारत के कई हाई-प्रोफाइल मामलों की कड़ियाँ जुड़ेंगी और गैंगस्टर जगत के समीकरण बदलेंगे।






