
संवाद 24 नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मौजूद AI टूल Grok को लेकर भारत सरकार और सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। केंद्रीय आईटी सचिव एस कृष्णन ने संकेत दिए हैं कि सरकार यह सुनिश्चित करने पर विचार कर रही है कि पैसे देकर एक्स का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स भी AI टूल्स का दुरुपयोग न कर सकें।
एनबीटी को दिए इंटरव्यू में आईटी सचिव ने कहा कि हालिया विवाद के बाद सरकार ने केवल अनपेड यूजर्स तक सीमित कार्रवाई को पर्याप्त नहीं माना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर पेड सब्सक्राइबर्स को Grok जैसे AI टूल्स की पूरी छूट मिलती है, तो यह भी एक गंभीर चिंता का विषय है और इस पर नियामकीय कार्रवाई की जरूरत हो सकती है।
डीपफेक विवाद के बाद बढ़ी सख्ती
बीते दिनों एक्स पर Grok AI के जरिए महिलाओं की अश्लील, डीपफेक और गैर-सहमति वाली तस्वीरें बनाए जाने का मामला सामने आया था। इसे गंभीर उल्लंघन मानते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 2 जनवरी को एक्स को नोटिस जारी किया था। नोटिस में ऐसे कंटेंट को हटाने और भविष्य में रोकथाम के उपाय बताने के लिए 72 घंटे का समय दिया गया था।
सरकारी नोटिस के बाद एक्स ने कार्रवाई करते हुए करीब 3500 आपत्तिजनक पोस्ट हटाईं और 600 से अधिक अकाउंट स्थायी रूप से बंद किए। इसके साथ ही Grok की इमेज एडिटिंग क्षमता को केवल पेड सब्सक्राइबर्स तक सीमित कर दिया गया।
सरकार को पेड यूजर्स पर भी आपत्ति
आईटी सचिव एस कृष्णन ने कहा कि एक्स की ओर से यह तर्क दिया गया कि साधारण यूजर्स अब इस AI फीचर का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे, लेकिन इसका सीधा मतलब यह है कि पेड अकाउंट्स को अब भी इसकी अनुमति है। सरकार इस पहलू की गहराई से समीक्षा कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया की जवाबदेही को लेकर सरकार लगातार कदम उठा रही है। अब तक की कार्रवाइयों पर अदालतों ने कभी यह नहीं कहा कि सरकार ने निष्क्रियता दिखाई हो, बल्कि अक्सर और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
कैसे शुरू हुआ मामला
यह विवाद तब चर्चा में आया जब राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर Grok AI के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। इसके बाद मंत्रालय ने इसे गंभीर उल्लंघन मानते हुए एक्स के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई शुरू की।
सरकार के ताजा रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में एक्स पर AI टूल्स के इस्तेमाल को लेकर नियम और सख्त हो सकते हैं, और पेड यूजर्स भी नियामकीय दायरे से बाहर नहीं।






