
संवाद 24 उत्तराखंड। देवभूमि उत्तराखंड के सीमांत जिले चमोली से एक बेहद दर्दनाक और भयानक खबर सामने आ रही है। अलकनंदा नदी पर निर्माणाधीन 444 मेगावाट क्षमता की विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में अचानक हुए भीषण भूस्खलन और मलबे के तेज बहाव ने कई परिवारों की खुशियां पल भर में तबाह कर दी हैं। सुरंग के भीतर लगभग 1.8 किलोमीटर गहराई पर काम कर रहे 25 से अधिक श्रमिकों के ऊपर अचानक काल बनकर मलबा गिर पड़ा। इस भयानक हादसे में अब तक 9 श्रमिकों की दुखद मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 6 से अधिक श्रमिक अब भी सुरंग के अंधेरे और गाद के बीच जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
अचानक गूंजा धमाका और भर गया जल-मलबा
घटना गुरुवार शाम करीब (6:45 बजे) की बताई जा रही है। 3.5 किलोमीटर लंबी इस सुरंग में लगभग 70 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका था। हादसे के समय 1.8 किलोमीटर की दूरी पर ग्रेविटी पॉइंट पर पैकिंग और सेटरिंग का संवेदनशील काम चल रहा था। तभी अचानक पहाड़ का एक हिस्सा दरक गया और बेहद जोर का धमाका हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और घायलों के अनुसार, धमाके के तुरंत बाद ऊपर से भारी मात्रा में पानी और दलदली गाद का भयंकर रेला नीचे काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरा। सुरंग के भीतर काम कर रहे मजदूर कुछ समझ पाते या संभल पाते, इससे पहले ही मलबे और पानी के तेज बहाव ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। वहां चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। झारखंड के निवासी एक प्रत्यक्षदर्शी मजदूर ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि धमाके के बाद मलबे के साथ बहते पानी ने सभी को छितरा दिया। कई लोग दलदल में धंसने लगे और अपनी जान बचाने के लिए सुरंग के निकास द्वार की ओर भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन अंधेरा और गाद आड़े आ गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन में ऑक्सीजन की कमी और दलदल बनी बड़ी चुनौती
घटना की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल की टीमें तुरंत राहत और बचाव कार्य के लिए मौके पर पहुंचीं। रात भर चले इस जोखिम भरे ऑपरेशन में 10 से अधिक घायल श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालकर गोपेश्वर जिला अस्पताल, श्रीनगर और पीपलकोटी के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हालांकि, एनडीआरएफ के अधिकारियों के मुताबिक सुरंग के भीतर पानी और गाद गले तक भर जाने के कारण रेस्क्यू टीमों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे गंभीर बात यह रही कि सुरंग के गहराई वाले हिस्से में ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से कम हो गया था, जिससे सांस लेना दूभर हो गया। इसी वजह से रात में कुछ समय के लिए बचाव अभियान को स्थगित करना पड़ा था, जिसे सुबह तड़के फिर से पूरी ताकत के साथ शुरू किया गया।
रोजी-रोटी की तलाश में आए थे दूसरे राज्यों के मजदूर
बताया जा रहा है कि सुरंग में काम करने वाले ज्यादातर श्रमिक बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से रोजी-रोटी कमाने उत्तराखंड आए थे। दूर-दराज से अपने परिवारों का पेट पालने आए इन गरीब मजदूरों पर पहाड़ का यह सितम बेहद दर्दनाक है। हादसे की खबर मिलते ही राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति का कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री लगातार गोपेश्वर और पीपलकोटी के प्रशासनिक अधिकारियों से पल-पल की रिपोर्ट ले रहे हैं।
जांच के आदेश और लापरवाही पर कार्रवाई
इस भीषण हादसे के बाद परियोजना निर्माण संस्था (THDC-NTPC) और स्थानीय प्रशासन हरकत में आ गया है। हादसे के कारणों का सटीक पता लगाने के लिए मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। प्राथमिक जांच में लापरवाही की बात सामने आने पर THDC प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए लोको वैगन ऑपरेटर को बर्खास्त कर दिया है।
फिलहाल, पूरा ध्यान सुरंग में फंसे बाकी 6 श्रमिकों को सकुशल बाहर निकालने पर केंद्रित है। भारी मशीनरी और सक्शन पंपों के जरिए सुरंग से पानी और मलबे को बाहर निकाला जा रहा है। पूरा देश और पीड़ित परिवार इस वक्त देवभूमि की इस सुरंग से चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।






