धमाके के बाद चीख-पुकार, फिर एम्बुलेंस पर अंधाधुंध गोलियां: पाकिस्तान में इंसानियत को छलनी करने वाली खूनी साजिश

​संवाद 24 नई दिल्ली। आतंक और हिंसा की आग में झुलस रहे पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर हिस्से से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने इंसानियत को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के अशांत डेरा इस्माइल खान जिले में दहशतगर्दों ने न सिर्फ एक पुलिस चेकपॉइंट को आत्मघाती विस्फोट से उड़ाया, बल्कि उसके बाद जो हुआ वह क्रूरता की सारी हदें पार कर गया। जख्मी लोगों और मलबे में दबे नागरिकों को बचाने के लिए जब राहत-बचाव दल एम्बुलेंस लेकर पहुंचा, तो घात लगाए बैठे आतंकियों ने उस जीवनदायिनी गाड़ी पर ही गोलियों की बौछार कर दी।

​विस्फोटकों से भरी गाड़ी और चेकपॉइंट का विनाश
​घटना उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के डेरा इस्माइल खान इलाके की है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, शनिवार को आतंकवादियों ने सड़क किनारे स्थित एक प्रमुख पुलिस चेकपॉइंट को निशाना बनाया। बारूद और घातक विस्फोटकों से भरी एक तेज रफ्तार गाड़ी सीधे चेकपॉइंट से टकरा गई। धमाका इतना जबरदस्त और तीव्र था कि उसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई और चेकपॉइंट की इमारत व सुरक्षा मोर्चे ताश के पत्तों की तरह बिखर गए। ​स्थानीय पुलिस प्रमुख सफदर बलोच के अनुसार, विस्फोट के समय चेकपॉइंट पर भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात थे और आसपास से कई आम नागरिक भी गुजर रहे थे। धमाके की चपेट में आने से कई सुरक्षाकर्मी और बेकसूर राहगीर गंभीर रूप से घायल हो गए तथा कई लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मरने वालों में मासूम बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं।

​बचाव कर्मियों पर अंधाधुंध फायरिंग: क्रूरता की इंतहा
​प्रांतीय आपातकालीन सेवा के प्रवक्ता बिलाल फैजी ने जानकारी देते हुए बताया कि विस्फोट के तत्काल बाद राहत और बचाव टीमें मौके की ओर दौड़ीं। टीमें गंभीर रूप से खून से लथपथ पीड़ितों को स्ट्रेचर पर लादकर पास के अस्पताल पहुंचाने की जद्दोजहद में जुटी थीं। ​इसी दौरान, इलाके में छिपे हथियारबंद बंदूकधारियों ने घायलों को ले जा रही एम्बुलेंस को घेर लिया और उस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की इस अचानक हुई बौछार में एक आपातकालीन बचावकर्मी (रेस्क्यू वर्कर) की मौके पर ही जान चली गई, जबकि दो अन्य कर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले के वक्त सड़क पर चारों तरफ अफरातफरी मच गई और गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका सहम उठा।

​हमले के पीछे कौन? टीटीपी ने ली जिम्मेदारी
​इस कायराना और दोहरे हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने ली है। हाल के दिनों में पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों – विशेषकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान – में सुरक्षा बलों और सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमलों की बाढ़ आ गई है। जहां खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी लगातार सुरक्षा तंत्र को चुनौती दे रहा है, वहीं बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे अलगाववादी गुट सक्रिय हैं। ​विशेषज्ञों का मानना है कि पहले बड़ा धमाका करना और फिर मदद के लिए आने वाली एम्बुलेंस या रेस्क्यू टीमों को निशाना बनाना ‘डबल-टैप’ रणनीति का हिस्सा है, ताकि हताहतों की संख्या बढ़ाई जा सके और बचाव तंत्र के हौसले पस्त किए जा सकें।

​शीर्ष नेतृत्व में हड़कंप और तीखी प्रतिक्रियाएं
​हमले के बाद पाकिस्तान की सत्ता के गलियारों में हड़कंप मच गया है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस जघन्य हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए पीड़ितों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। ​राष्ट्रपति जरदारी ने कहा कि राहतकर्मियों और निहत्थे नागरिकों पर हमला किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संगठन विदेशी ताकतों की शह और मदद से ऐसी बर्बर वारदातों को अंजाम दे रहा है। सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को आतंकियों के खात्मे के लिए व्यापक और सख्त अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
​फिलहाल पूरे इलाके को भारी सुरक्षाबलों ने घेर लिया है और हमलावरों की तलाश में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, राहत कार्य में जुटे कर्मियों पर हुए इस हमले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा की स्थिति कितनी भयावह मोड़ पर पहुंच चुकी है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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