
संवाद 24 नई दिल्ली। मध्य अफ्रीका के अशांत देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआर कांगो) से एक बेहद दिल दहला देने वाली और स्तब्ध करने वाली खबर सामने आई है। राजधानी किंशासा की ओर बढ़ रहा देश की सेना का एक महत्वपूर्ण परिवहन विमान हवा में ही भीषण तकनीकी खराबी का शिकार होकर जमीन पर आ गिरा। इस भयावह विमान हादसे में देश की सुरक्षा व्यवस्था के दो सबसे कद्दावर सैन्य अधिकारियों यानी लेफ्टिनेंट जनरलों समेत कुल 14 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। विमान के मलबे में तब्दील होते ही उसमें सवार किसी भी शख्स को संभलने या बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। इस दुर्घटना के बाद पूरे अफ्रीकी महाद्वीप के रक्षा गलियारों में गहरा सन्नाटा और खलबली मच गई है।
कैसे और कहां घटा यह दर्दनाक हादसा?
मिली आधिकारिक जानकारियों के अनुसार, यह सैन्य विमान कांगो के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित किकवित शहर से अपने तय मिशन को पूरा कर राजधानी किंशासा के लिए रवाना हुआ था। उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद, जब विमान केंगे शहर के नजदीकी हवाई क्षेत्र से गुजर रहा था, तभी पायलट का नियंत्रण मशीनरी से छूटने लगा। बताया जा रहा है कि बीच हवा में ही विमान गंभीर यांत्रिक विफलता की चपेट में आ गया था। पायलट ने स्थिति को संभालने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन विमान तीव्र गति से जमीन की ओर गिरते हुए जंगलों और वीरान इलाके में जा टकराया। जमीन से टकराते ही विमान में भीषण आग लग गई और वह पूरी तरह मलबे के ढेर में तब्दील हो गया।
मारे गए शीर्ष अधिकारियों में कौन-कौन शामिल?
कांगोली सशस्त्र बलों के प्रवक्ता मेजर जनरल एफोमी एकेंगे ने इस त्रासदी की पुष्टि करते हुए इसे देश की सुरक्षा प्रणाली के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया है। इस हादसे में मारे गए लोगों में कोई साधारण सैनिक नहीं, बल्कि देश के दो सबसे वरिष्ठ रणनीतिकार शामिल थे:
1- लेफ्टिनेंट जनरल मुतोम्बो कातलायी तिएंदे: जो देश की शीर्ष सैन्य अदालत के प्रमुख के रूप में न्याय व्यवस्था और सैन्य अनुशासन का नेतृत्व कर रहे थे।
2- लेफ्टिनेंट जनरल बाकुमी लिकुलिया: जो कांगो के सशस्त्र बलों के ऑडिटर जनरल की अहम भूमिका में तैनात थे।
इन दोनों शीर्ष जनरलों के अलावा विमान में सवार प्रतिनिधिमंडल के 12 अन्य सदस्य, जिनमें वरिष्ठ प्रशासनिक स्टाफ और कॉकपिट क्रू के सदस्य शामिल थे, सभी की इस भीषण दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई। स्थानीय राहत एवं बचाव टीमों को मौके पर केवल जला हुआ मलबा और क्षत-विक्षत अवशेष ही मिले।
तकनीकी विफलता या साजिश? जांच के घेरे में सवाल
इस भयावह हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह महज एक सामान्य तकनीकी खराबी थी या इसके पीछे कोई गहरा षड्यंत्र छिपा है। कांगो के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के बोर्ड चेयरमैन ट्राइफॉन किन-किये मुलुम्बा ने सार्वजनिक रूप से बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि फिलहाल दुर्घटना का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि ब्लैक बॉक्स और मलबे की तकनीकी जांच के लिए एक उच्चस्तरीय जांच दल गठित कर दिया गया है। विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल पर पहुंचकर यह पता लगाने में जुट गई है कि क्या विमान के इंजनों ने काम करना बंद किया था, हवा में कोई विस्फोट हुआ था या फिर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों ने इसे हादसे की तरफ धकेला।
सुरक्षा संकट के बीच कांगो सेना को करारा झटका
यह त्रासदी ऐसे नाजुक मोड़ पर आई है जब कांगो की सेना पहले से ही अपने पूर्वी क्षेत्रों में बेहद जटिल और हिंसक सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रही है। देश का पूर्वी हिस्सा कई हथियारबंद विद्रोही गुटों, विशेष रूप से रवांडा समर्थित माने जाने वाले कुख्यात ‘एम23’ (M23) विद्रोही संगठन के खिलाफ निर्णायक जंग लड़ रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में सैन्य अदालत और सेना की आंतरिक निगरानी तंत्र के दो सर्वोच्च अधिकारियों का एक साथ चले जाना देश की पूरी कमान व्यवस्था के लिए एक अत्यंत घातक झटका माना जा रहा है। राजधानी किंशासा में राष्ट्रीय शोक की लहर दौड़ गई है, वहीं रक्षा मुख्यालय में आपात बैठकें बुलाई गई हैं ताकि रिक्त हुए अहम पदों पर व्यवस्था को संभाला जा सके और सेना के मनोबल को टूटने से बचाया जा सके।






