
संवाद 24 नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी और संवेदनशील मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG में हुई धांधली को लेकर एक बहुत बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दाखिल किए गए विशालकाय 20,000 पन्नों के आरोपपत्र (Chargesheet) पर आधिकारिक तौर पर संज्ञान ले लिया है। अदालत के इस कदम के बाद अब 13 प्रमुख आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा पूरी तरह कस चुका है और उन पर आधिकारिक रूप से आरोप (Frame Charges) तय करने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।
बिना फ्रिस्किंग बाहर निकले और लीक हो गया पेपर!
सीबीआई की जांच रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सुरक्षा व्यवस्था में बहुत बड़ी सेंध लगाई गई थी। केंद्रीय एजेंसी ने अदालत को बताया कि दिल्ली स्थित एनटीए (NTA) कार्यालय से ही इस पूरे खेल की पटकथा लिखी गई थी। जांच में खुलासा हुआ कि एनटीए के तीन विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) ने मिलकर अलग-अलग संदिग्ध तरीकों से प्रश्नपत्र के गोपनीय हिस्से बाहर निकाले। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इन आरोपियों को गोपनीय स्थानों से बाहर निकलते समय तलाशी (Frisking) तक से नहीं गुजरना पड़ता था। इसी भारी सुरक्षा लापरवाही का फायदा उठाकर इन विशेषज्ञों ने पूरे तंत्र को चकमा दिया और मेडिकल प्रवेश परीक्षा के गोपनीय सवालों को लीक कर दिया।
मास्टरमाइंड्स का नेटवर्क: देश भर में फैला था गिरोह
सीबीआई द्वारा नामजद किए गए आरोपियों में एनटीए के पूर्व विषय विशेषज्ञ पीवी कुलकर्णी, मनीषा संजय हवलदार और मनीषा गुरुनाथ मंधारे मुख्य साजिशकर्ता के रूप में चिन्हित किए गए हैं। इन तीनों की गिरफ्तारी के बाद जब कड़ियों को जोड़ा गया, तो इस नेटवर्क के तार देश के कई राज्यों से जुड़ते चले गए।
जांच एजेंसी ने देशव्यापी छापेमारी करते हुए:
1- राजस्थान से मांगीलाल, दिनेश और विकास बिवाल को दबोचा।
2- हरियाणा के गुरुग्राम से यश यादव को गिरफ्तार किया।
3- महाराष्ट्र के नासिक और पुणे से शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे और मनीषा संजय वाघमारे को हिरासत में लिया।
इन नियुक्तियों और सॉल्वर गिरोहों ने मिलकर करोड़ों रुपये के इस गोरखधंधे को अंजाम दिया, जिससे देश के लाखों होनहार छात्रों के भविष्य पर सवालिया निशान खड़ा हो गया था।
मीडिया लीक्स पर अदालत की सख्त नाराजगी
विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत ने सुनवाई के दौरान एक ओर जहां चार्जशीट पर संज्ञान लिया, वहीं दूसरी ओर मीडिया में चार्जशीट के अंश और नाबालिग गवाहों के नाम लीक होने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक और चौंकाने वाला है कि जो तथ्य अभी तक अदालत के समक्ष आधिकारिक रूप से पेश नहीं हुए हैं, वे समाचार माध्यमों में प्रकाशित हो रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिम्मेदार मीडिया को संवेदनशील और खासकर नाबालिगों से जुड़े तथ्यों को उजागर करने से पूरी तरह बचना चाहिए। बचाव पक्ष के वकीलों ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि चार्जशीट की प्रतियां कोर्ट में जमा होने से पहले ही सार्वजनिक हो जाने से उनके मुवक्किलों के निष्पक्ष ट्रायल के अधिकार पर बुरा असर पड़ सकता है। अदालत ने इस पूरे विषय की समीक्षा करने और उचित निर्देश जारी करने का आश्वासन दिया है।
छात्रों के भविष्य और व्यवस्था पर बड़ा असर
20,000 पन्नों की यह विशाल चार्जशीट इस बात का प्रमाण है कि सीबीआई ने इस मामले में वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों का व्यापक संकलन किया है। गुरुवार से शुरू हो रही जिरह के बाद यह तय होगा कि आरोपियों के खिलाफ किस-किस धारा के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। इस पूरे मामले ने देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाओं की शुचिता (Integrity) और गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।






