
संवाद 24 डेस्क। लोकप्रिय संदेश भेजने वाले मंच व्हाट्सऐप पर स्कूल, कॉलेज, कार्यालय, आवासीय समितियों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग प्रतिदिन बड़ी संख्या में संदेशों का आदान-प्रदान करते हैं। ऐसे में जब एक ही समुदाय के अंतर्गत कई छोटे समूह सक्रिय होते हैं, तो उनके सदस्यों की जानकारी रखना और यह पता लगाना कि कौन किस समूह से जुड़ा है, प्रशासकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसी समस्या को कम करने के उद्देश्य से व्हाट्सऐप एक नए ‘ऑर्गेनाइजेशन्स’ फीचर पर काम कर रहा है। इस सुविधा के माध्यम से बड़े समुदायों के प्रशासकों को सदस्यों और उनसे जुड़े अलग-अलग समूहों की जानकारी एक ही स्थान पर देखने की सुविधा मिल सकती है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस प्रस्तावित सुविधा का मुख्य उद्देश्य बड़े समुदायों का प्रबंधन अधिक व्यवस्थित बनाना है। इससे प्रशासकों को अलग-अलग समूहों में जाकर सदस्यों की जानकारी जुटाने की आवश्यकता कम हो सकती है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि फिलहाल यह सुविधा विकास के शुरुआती चरण में है। इसे आम उपयोगकर्ताओं के लिए जारी नहीं किया गया है और इसकी आधिकारिक शुरुआत की तारीख भी घोषित नहीं हुई है।
क्या है व्हाट्सऐप का नया ऑर्गेनाइजेशन्स फीचर?
ऑर्गेनाइजेशन्स को एक ऐसी अतिरिक्त व्यवस्था के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से समुदाय के प्रशासक अपने समुदाय और उसके सदस्यों को अधिक आसानी से व्यवस्थित कर सकेंगे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इसमें संगठन का नाम, उसका विवरण और कुल सदस्यों की संख्या दिखाई दे सकती है। इसके अतिरिक्त, प्रशासकों को सदस्यों की पूरी सूची देखने का विकल्प भी मिल सकता है।
इस सुविधा का सबसे उपयोगी पहलू यह हो सकता है कि प्रशासक यह भी देख सकेंगे कि कोई सदस्य समुदाय के अंतर्गत आने वाले किन-किन छोटे समूहों से जुड़ा है। अभी बड़े समुदायों में यह जानकारी प्राप्त करने के लिए कई बार अलग-अलग समूहों की सदस्य सूची देखनी पड़ती है। नई व्यवस्था लागू होने पर संबंधित जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकती है।
इससे उन लोगों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जो सैकड़ों सदस्यों वाले समुदायों का संचालन करते हैं। हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी प्रारंभिक विकास से जुड़ी है। इसलिए अंतिम रूप में इसमें कौन-कौन सी सुविधाएं होंगी, यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता।
कैसे काम कर सकता है यह नया फीचर?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ऑर्गेनाइजेशन्स के लिए एक अलग प्रबंधन पटल उपलब्ध कराया जा सकता है। इस पटल पर संबंधित संगठन का नाम, विवरण और सदस्यों की कुल संख्या दिखाई देगी। इसके बाद प्रशासक ‘सभी देखें’ विकल्प के माध्यम से पूरी सदस्य सूची तक पहुंच सकेंगे।
इस सूची में सदस्यों की पहचान के साथ यह जानकारी भी मिल सकती है कि वे समुदाय के किन छोटे समूहों में शामिल हैं। इससे प्रशासकों को समुदाय की संरचना समझने और सदस्यों की स्थिति का पता लगाने में सुविधा होगी।
उदाहरण के लिए, किसी विद्यालय में अलग-अलग कक्षाओं के लिए कई समूह बनाए गए हैं। ऐसे में एक ही समुदाय के अंतर्गत कक्षा छह, सात, आठ, नौ और दस के समूह संचालित किए जा सकते हैं। यदि किसी विद्यार्थी के अभिभावक एक से अधिक समूहों में शामिल हैं, तो उनकी सदस्यता का विवरण व्यवस्थित रूप से देखना उपयोगी होगा। प्रस्तावित सुविधा इस प्रकार की जानकारी को एक जगह उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है।
इसी तरह, किसी कंपनी में अलग-अलग विभागों के समूह हों या किसी आवासीय परिसर में निवासियों, सुरक्षा व्यवस्था और रखरखाव से संबंधित अलग-अलग समूह संचालित किए जाते हों, तो प्रशासकों के लिए सदस्यों की जानकारी व्यवस्थित रखना आसान हो सकता है।
फिर भी यह ध्यान रखना चाहिए कि ये संभावित उपयोग के उदाहरण हैं। सुविधा का वास्तविक स्वरूप और इसमें उपलब्ध विकल्प इसके अंतिम संस्करण पर निर्भर करेंगे।
समुदाय और ऑर्गेनाइजेशन्स में क्या होगा अंतर?
व्हाट्सऐप का समुदाय फीचर पहले से उपलब्ध है। इसे वर्ष 2022 में पेश किया गया था, ताकि एक ही विषय या संगठन से जुड़े कई समूहों को एक साझा व्यवस्था के अंतर्गत रखा जा सके। इसके माध्यम से संबंधित समूहों का संचालन करना और जरूरी घोषणाएं सदस्यों तक पहुंचाना आसान होता है।
उदाहरण के लिए, किसी विद्यालय के अलग-अलग कक्षा समूहों को एक समुदाय के अंतर्गत रखा जा सकता है। इसी प्रकार, किसी कार्यालय के विभिन्न विभागों या किसी सामाजिक संस्था की अलग-अलग इकाइयों के समूह भी एक साथ व्यवस्थित किए जा सकते हैं।
इसके विपरीत, ऑर्गेनाइजेशन्स का प्रस्तावित उद्देश्य समुदाय के भीतर सदस्यों और समूहों का प्रबंधन आसान बनाना है। इसे समुदाय के ऊपर एक अतिरिक्त प्रबंधन व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है।
सरल शब्दों में कहें तो समुदाय का उद्देश्य संबंधित समूहों को एक साथ जोड़ना है, जबकि ऑर्गेनाइजेशन्स का उद्देश्य उन समूहों और उनके सदस्यों की जानकारी को प्रशासकों के लिए अधिक व्यवस्थित बनाना है। दोनों सुविधाओं की भूमिका अलग-अलग होगी।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सामान्य सदस्यों को इस नई व्यवस्था के साथ सीधे संवाद करने की आवश्यकता नहीं होगी। उनकी मौजूदा समूह बातचीत पहले की तरह जारी रह सकती है। हालांकि, अंतिम रूप में इसके संचालन से संबंधित नियम क्या होंगे, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बड़े समुदायों के प्रशासकों को कैसे मिलेगा फायदा?
व्हाट्सऐप का इस्तेमाल अब केवल मित्रों और परिवार के बीच बातचीत तक सीमित नहीं है। अनेक संस्थाएं इसका उपयोग सूचनाएं साझा करने, गतिविधियों का समन्वय करने और अपने सदस्यों से संपर्क बनाए रखने के लिए करती हैं। ऐसे में समूहों की संख्या और सदस्यों के बढ़ने के साथ प्रबंधन की जरूरत भी बढ़ जाती है।
यदि किसी समुदाय में कई छोटे समूह हैं, तो प्रशासकों को सदस्यता से जुड़ी जानकारी जुटाने में समय लग सकता है। किसी व्यक्ति की सदस्यता की पुष्टि करनी हो या यह पता लगाना हो कि वह किस समूह से जुड़ा है, तो अलग-अलग समूहों की सूची देखना पड़ सकती है।
ऑर्गेनाइजेशन्स सुविधा इस प्रक्रिया को सरल बना सकती है। एक ही स्थान पर सदस्य सूची और संबंधित समूहों की जानकारी मिलने से प्रशासकों को बार-बार अलग-अलग समूहों की जांच करने की जरूरत कम हो सकती है। इससे समय की बचत होगी और समुदाय को व्यवस्थित रखना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
हालांकि, केवल एक नई सुविधा से समुदाय का प्रबंधन पूरी तरह स्वचालित नहीं हो जाएगा। प्रशासकों को सदस्यों से संबंधित जानकारी की शुद्धता, समूहों के नियमों और साझा की जाने वाली सूचनाओं पर ध्यान देना ही होगा। नई व्यवस्था का वास्तविक लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि इसका उपयोग किस तरह किया जाता है।
किन क्षेत्रों में सबसे अधिक उपयोगी हो सकता है यह फीचर?
ऑर्गेनाइजेशन्स सुविधा का संभावित उपयोग शिक्षा, व्यवसाय, सामाजिक संगठनों और आवासीय समितियों जैसे कई क्षेत्रों में हो सकता है। इन क्षेत्रों में एक ही संस्था से जुड़े लोगों के लिए अलग-अलग समूह बनाए जाते हैं, जिनमें प्रत्येक का उद्देश्य अलग होता है।
शिक्षा के क्षेत्र में विद्यालयों और महाविद्यालयों के लिए यह सुविधा उपयोगी हो सकती है। किसी विद्यालय में कक्षा के अनुसार विद्यार्थियों के अभिभावकों के समूह, शिक्षकों के समूह और विद्यालय की सामान्य सूचनाओं के लिए अलग-अलग समूह हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासकों को यह समझने में सुविधा मिल सकती है कि कौन-सा सदस्य किस समूह से जुड़ा है।
व्यावसायिक संस्थानों में अलग-अलग विभागों, परियोजनाओं और कर्मचारियों के समूहों का संचालन किया जाता है। यदि इन समूहों को एक समुदाय के अंतर्गत व्यवस्थित किया जाता है, तो सदस्यों की जानकारी एक जगह देखने की सुविधा प्रबंधन को अधिक सुविधाजनक बना सकती है।
आवासीय समितियों में सुरक्षा, सफाई, रखरखाव, पार्किंग और निवासियों से संबंधित सूचनाओं के लिए अलग-अलग समूह बनाए जाते हैं। ऐसे समुदायों में भी सदस्यता का व्यवस्थित विवरण प्रशासकों के लिए मददगार हो सकता है।
इसी प्रकार, सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय समुदायों में कई इकाइयां सक्रिय रहती हैं। वहां सदस्यों की जानकारी व्यवस्थित रखना महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, इन सभी क्षेत्रों में सुविधा का लाभ तभी स्पष्ट होगा, जब इसका अंतिम संस्करण संबंधित आवश्यकताओं के अनुरूप विकल्प उपलब्ध कराएगा।
एंड्रॉयड के किस संस्करण में मिला नए फीचर का संकेत?
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, ऑर्गेनाइजेशन्स से संबंधित संकेत व्हाट्सऐप के एंड्रॉयड के लिए जारी परीक्षण संस्करण 2.26.43.1 में मिले हैं। इससे पता चलता है कि कंपनी इस सुविधा की संभावनाओं पर काम कर रही है। लेकिन किसी परीक्षण संस्करण में फीचर का संकेत मिलना और उसका उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध हो जाना दो अलग-अलग बातें हैं।
फिलहाल यह सुविधा शुरुआती विकास की स्थिति में है और इसे परीक्षण करने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए भी उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसकी अंतिम संरचना, कार्यप्रणाली और संभावित बदलावों को लेकर अभी सीमित जानकारी है।
यह भी स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में इसे केवल एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं के लिए जारी किया जाएगा या आईफोन सहित अन्य उपकरणों पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। इन विषयों पर आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।
इसलिए उपयोगकर्ताओं को अभी अपने मोबाइल में किसी नए विकल्प की तलाश करने या अलग से कोई अनुप्रयोग स्थापित करने की आवश्यकता नहीं है। जब तक कंपनी इसे जारी नहीं करती, तब तक इस सुविधा का सामान्य उपयोग संभव नहीं होगा।
कब तक शुरू हो सकती है ऑर्गेनाइजेशन्स सुविधा?
इस नए फीचर को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी शुरुआत की तारीख है। अभी तक व्हाट्सऐप की ओर से इसकी आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है। चूंकि यह सुविधा विकास के शुरुआती चरण में है, इसलिए इसके सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने में समय लग सकता है।
किसी नई सुविधा को आम उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाने से पहले उसके स्वरूप, उपयोगिता और तकनीकी कार्यप्रणाली पर काम किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर इसमें बदलाव भी किए जा सकते हैं। इसलिए शुरुआती जानकारी के आधार पर यह दावा करना सही नहीं होगा कि ऑर्गेनाइजेशन्स किसी निश्चित तारीख तक सभी मोबाइल में उपलब्ध हो जाएगा।
यह संभावना भी बनी हुई है कि विकास के दौरान इसकी कुछ विशेषताएं बदल जाएं या योजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया जाए। फिलहाल उपयोगकर्ताओं को आधिकारिक घोषणा की प्रतीक्षा करनी चाहिए।
क्या सामान्य उपयोगकर्ताओं के अनुभव में होगा बदलाव?
ऑर्गेनाइजेशन्स का प्रस्तावित उद्देश्य मुख्य रूप से समुदाय के प्रशासकों की सहायता करना है। इसलिए सामान्य सदस्यों के लिए इसमें सीधे तौर पर कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। वे अपने मौजूदा समूहों में संदेश भेजने, सूचनाएं प्राप्त करने और बातचीत करने का काम पहले की तरह कर सकते हैं।
इसका संभावित लाभ उन लोगों को अधिक मिलेगा, जो एक साथ कई समूहों का संचालन करते हैं। सामान्य सदस्य को नई सुविधा का उपयोग करने की जरूरत शायद न पड़े, जबकि प्रशासकों को सदस्यों और समूहों की जानकारी व्यवस्थित रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, अंतिम संस्करण जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इसमें सदस्यों के लिए कोई अतिरिक्त विकल्प भी दिया जाता है या नहीं। अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसकी पूरी कार्यप्रणाली के बारे में निश्चित दावा करना उचित नहीं है।
सदस्यता की जानकारी और निजता कितनी महत्वपूर्ण होगी?
समुदायों का प्रबंधन आसान बनाने के साथ-साथ सदस्यों की निजता का ध्यान रखना भी जरूरी है। किसी व्यक्ति का एक से अधिक समूहों में शामिल होना उसकी गतिविधियों और संबंधित संगठन से उसके जुड़ाव के बारे में जानकारी दे सकता है। इसलिए सदस्यता संबंधी विवरण तक पहुंच किसे मिलेगी, यह महत्वपूर्ण विषय होगा।
यदि प्रस्तावित सुविधा प्रशासकों को एक ही स्थान पर पूरी सदस्य सूची देखने देती है, तो इसका उपयोग संबंधित समुदाय के संचालन और व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से किया जाना चाहिए। सदस्यों की जानकारी को अनावश्यक रूप से साझा करने से बचना और समुदाय के नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ऑर्गेनाइजेशन्स में सदस्यता की जानकारी देखने के लिए कौन-कौन से नियंत्रण उपलब्ध होंगे। इस संबंध में अंतिम जानकारी सुविधा जारी होने पर ही सामने आएगी। इसलिए निजता से जुड़ी किसी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था का दावा अभी नहीं किया जा सकता।
व्हाट्सऐप के लिए क्यों महत्वपूर्ण है समुदाय प्रबंधन?
डिजिटल संचार के बढ़ते इस्तेमाल के साथ संदेश भेजने वाले मंचों की भूमिका भी बदल रही है। अब इनका उपयोग व्यक्तिगत बातचीत के अलावा शिक्षा, कारोबार, सामाजिक गतिविधियों और संस्थागत समन्वय के लिए भी किया जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ जोड़ने के साथ-साथ उन्हें व्यवस्थित रखने की जरूरत बढ़ रही है।
व्हाट्सऐप का समुदाय फीचर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा है। इसके माध्यम से एक विषय से जुड़े कई समूहों को एक साझा ढांचे में जोड़ा जा सकता है। अब ऑर्गेनाइजेशन्स का प्रस्तावित विचार इस व्यवस्था को प्रशासकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई देता है।
यदि यह सुविधा अपने प्रस्तावित स्वरूप में जारी होती है, तो बड़े समुदायों में सदस्यता की जानकारी जुटाने में लगने वाला समय कम हो सकता है। इससे उन संस्थाओं को फायदा मिलने की संभावना है, जिनके पास कई समूह और बड़ी संख्या में सदस्य हैं।
हालांकि, किसी भी डिजिटल सुविधा की वास्तविक उपयोगिता उसके इस्तेमाल के बाद ही स्पष्ट होती है। इसलिए इस नई व्यवस्था के संभावित लाभों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सुविधा नहीं, बल्कि विकास के शुरुआती चरण में मौजूद एक प्रस्ताव है।
बड़े समुदायों के प्रबंधन में आ सकता है बदलाव
व्हाट्सऐप का प्रस्तावित ऑर्गेनाइजेशन्स फीचर बड़े समुदायों के प्रशासकों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। एक ही स्थान पर संगठन का विवरण, सदस्यों की कुल संख्या, पूरी सदस्य सूची और संबंधित छोटे समूहों की जानकारी उपलब्ध होने से समुदाय का संचालन आसान बनाने में मदद मिल सकती है।
इस सुविधा की खासियत यह होगी कि इसका ध्यान केवल समूहों को एक साथ जोड़ने पर नहीं, बल्कि उनके सदस्यों की जानकारी को व्यवस्थित करने पर केंद्रित है। इससे विद्यालयों, कार्यालयों, आवासीय समितियों और सामाजिक संगठनों में समुदाय प्रबंधन की प्रक्रिया अधिक सरल हो सकती है।
फिर भी इसकी शुरुआत की तारीख, अन्य उपकरणों पर उपलब्धता और अंतिम सुविधाओं के बारे में अभी कोई निश्चित जानकारी नहीं है। उपयोगकर्ताओं को इसे जारी हो चुकी सुविधा समझने के बजाय विकास के शुरुआती चरण में मौजूद प्रस्ताव के रूप में देखना चाहिए। आधिकारिक घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ऑर्गेनाइजेशन्स बड़े समुदायों के संचालन को किस हद तक आसान बना पाएगा।






