
दीपावली पर आतिशबाजी की अस्थायी दुकानें कहां लगेंगी, इसे लेकर स्थानीय फुटकर विक्रेताओं ने जिला प्रशासन के सामने अपनी मांग रखी है। व्यापारियों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर पॉलिटेक्निक ग्राउंड के स्थान पर पूर्व वर्षों की तरह कृष्णाशा वाटिका, नवदिया, फतेहगढ़ में आतिशबाजी की दुकानें लगाने की अनुमति मांगी है। व्यापारियों का कहना है कि निर्धारित स्थान पर पिछले करीब चार वर्षों से दुकानें लगाई जा रही हैं और वे प्रशासन के नियमों तथा सुरक्षा मानकों के अनुरूप कारोबार करने के लिए तैयार हैं व्यापारियों की इस मांग के बाद अब सबकी नजर जिला प्रशासन के निर्णय पर है। हालांकि, दुकानों के लिए अंतिम स्थान का निर्धारण प्रशासन की अनुमति और सुरक्षा संबंधी नियमों के आधार पर ही होगा।
चार साल से इसी स्थान पर दुकानें लगाने का दे रहे हवाला
व्यापारियों ने अपने प्रार्थना पत्र में बताया कि वे पिछले लगभग चार वर्षों से कृष्णाशा वाटिका, नवदिया के निकट रॉयल जेनजुआर गेस्ट हाउस के पास आतिशबाजी की दुकानें लगाते आ रहे हैं। उनका दावा है कि इस दौरान वहां कोई बड़ी जनहानि या अग्निकांड नहीं हुआ। इसी अनुभव के आधार पर वे इस वर्ष भी पुराने स्थान पर दुकानें लगाने की अनुमति चाहते हैं। हालांकि, पिछले वर्षों में किसी अप्रिय घटना के नहीं होने का यह दावा व्यापारियों की ओर से किया गया है।
पार्किंग की पर्याप्त जगह और जाम से बचाव का तर्क
व्यापारियों ने कृष्णाशा वाटिका में पार्किंग की पर्याप्त जगह होने का हवाला देते हुए कहा कि यहां ग्राहकों के वाहनों को व्यवस्थित तरीके से खड़ा कराया जा सकता है। इससे मुख्य मार्ग पर जाम लगने और यातायात बाधित होने की आशंका कम हो सकती है। विक्रेताओं ने प्रशासन के सहयोग से यातायात व्यवस्था बनाए रखने में मदद करने का भरोसा भी जताया है उनका कहना है कि आतिशबाजी की दुकानों के लिए स्थान तय करते समय केवल बाजार लगाने की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि ग्राहकों की आवाजाही, पार्किंग और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
अग्निशमन केंद्र की दूरी का भी दिया हवाला
आतिशबाजी विक्रेताओं ने सुरक्षा व्यवस्था के पक्ष में दलील देते हुए बताया कि उनके प्रस्तावित स्थल से निकटतम अग्निशमन केंद्र लगभग 500 मीटर की दूरी पर है। उन्होंने दुकानों पर अग्निशमन यंत्र और जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध रखने तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप दुकानें लगाने की बात कही है। गौरतलब है कि आतिशबाजी की अस्थायी दुकानों के लिए विस्फोटक नियमावली, 2008 में सुरक्षा संबंधी प्रावधान हैं। इनके तहत दुकानों के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी, संरक्षित स्थलों से निर्धारित दूरी और एक क्लस्टर में अधिकतम 50 दुकानों की सीमा जैसे नियम शामिल हैं। PESO ऐसे में किसी भी स्थान को मंजूरी देने से पहले संबंधित सुरक्षा मानकों का पूरा होना महत्वपूर्ण होगा।
छोटे दुकानदारों को कारोबार प्रभावित होने का डर
फुटकर आतिशबाजी विक्रेताओं के अनुसार, दीपावली का त्योहार उनके सालाना कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका कहना है कि यदि दुकानें पॉलिटेक्निक ग्राउंड में स्थानांतरित की जाती हैं, तो ग्राहकों की पहुंच और बिक्री पर असर पड़ सकता है। इससे छोटे व्यापारियों की पूंजी फंसने और आर्थिक नुकसान की आशंका है। व्यापारियों ने यह भी कहा कि आतिशबाजी का सामान नहीं बिकने पर उसे वापस करना आसान नहीं होता। ऐसे में बिक्री प्रभावित होने से उनकी आजीविका पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर उन्होंने प्रशासन से स्थानीय व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए पुराने स्थान पर बाजार लगाने की अनुमति देने की अपील की है।
प्रशासन के सामने सुरक्षा और व्यापार, दोनों की चुनौती
दीपावली से पहले आतिशबाजी की दुकानों के स्थान निर्धारण को लेकर जिला प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था पर जोर दे रहा है। 24 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक स्थानीय समाचार रिपोर्ट के अनुसार, जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की अध्यक्षता में आतिशबाजी के थोक एवं फुटकर विक्रेताओं और निर्माताओं के साथ बैठक कर अग्निशमन सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा तथा दुकानों के क्लस्टर निर्धारण से जुड़े निर्देश दिए गए थे वहीं, 25 अक्टूबर की एक अन्य रिपोर्ट में फर्रुखाबाद जिले में आतिशबाजी की बिक्री के लिए अधिकतम आठ स्थानों पर लाइसेंस दिए जाने और सुरक्षा मानकों के अनुरूप स्थल निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई थी ऐसे में कृष्णाशा वाटिका, नवदिया में दुकानें लगाने की व्यापारियों की मांग पर निर्णय लेते समय प्रशासन को सुरक्षा, अग्निशमन संसाधनों, यातायात और व्यापारियों की आजीविका जैसे पहलुओं पर विचार करना होगा। अब निगाहें जिलाधिकारी के फैसले पर हैं। 28 अक्टूबर 2026 को दिए गए प्रार्थना पत्र पर क्या निर्णय होता है और क्या व्यापारियों को कृष्णाशा वाटिका में दुकानें लगाने की अनुमति मिलती है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। अंतिम स्थान प्रशासन की स्वीकृति और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार ही तय होगा।






