
लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार द्वारा शैक्षणिक संस्थानों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि “देशभक्ति का भाव किसी पर थोपा नहीं जा सकता। जिनके मन में देश के प्रति सच्चा प्रेम है, उन्हें किसी आदेश की आवश्यकता नहीं होती।”
अखिलेश यादव ने कहा, “हमने भी बचपन से वंदे मातरम् सुना है, लेकिन सरकार इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर लोगों की भावनाओं से खेल रही है। जब-जब भाजपा सरकार मुश्किल में आती है, ऐसे मुद्दे सामने लाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करती है।” उन्होंने आगे कहा कि “देश में जब महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की बदहाली जैसी समस्याएँ चरम पर हैं, तब सत्ता को इन मुद्दों पर जवाब देना चाहिए न कि देशभक्ति के नाम पर विवाद खड़ा करना चाहिए।”
???? कानपुर देहात में ‘खजांची’ का जन्मदिन मनाया
अखिलेश यादव सोमवार को कानपुर देहात पहुँचे, जहाँ उन्होंने वर्ष 2016 में नोटबंदी के दौरान जन्मे बच्चे ‘खजांची’ का जन्मदिन मनाया। उन्होंने कहा, “खजांची का जन्म एक प्रतीक है कि कठिन परिस्थितियों में भी जीवन चलता रहता है। यह बच्चे की मुस्कान हमें उम्मीद देती है कि बेहतर भारत अभी बन सकता है।”
इस अवसर पर सपा कार्यकर्ताओं ने केक काटकर बच्चे को उपहार दिए। अखिलेश यादव ने कहा कि “यह बच्चा उत्तर प्रदेश के भविष्य की आशा है — इसे राजनीति से दूर रखना चाहिए।”
????️ “विधानसभा चुनाव से पहले ही सक्रिय हो गई भाजपा सरकार”
अखिलेश यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही प्रचार मोड में आ गई है। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार जनता के मुद्दों से ध्यान हटाकर सांप्रदायिक एजेंडा चलाने में जुटी है। जनता अब इनके झूठे वादों में नहीं आने वाली।” उन्होंने कहा कि “भाजपा सरकार नौजवानों को रोजगार देने में विफल रही है, किसान आंदोलन के वादे पूरे नहीं किए गए, और अब धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।”
???? मुख्य बातें संक्षेप में
- अखिलेश यादव ने ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्यता पर सवाल उठाए।
- कहा — “देशभक्ति आदेश से नहीं, भावना से आती है।”
- कानपुर देहात में खजांची का जन्मदिन मनाया, जनता से संवाद किया।
- आरोप लगाया — “भाजपा सरकार चुनावी तैयारी में जुटी, जनता के मुद्दे भूल गई।”






