
संवाद 24 नई दिल्ली। डिजिटल भुगतान (Digital Payments) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। संसद में ‘कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026’ (Taxation and Other Laws Amendment Bill, 2026) के पारित होने के बाद सोशल मीडिया पर यूपीआई से लेनदेन पर शुल्क (Charges) लगाए जाने की अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करते हुए दोहराया है कि आम जनता और ग्राहकों के लिए यूपीआई सेवा पूरी तरह से नि:शुल्क (Free) थी, है और आगे भी रहेगी। सरकार ने साफ किया है कि आम उपभोक्ताओं और छोटे दुकानदारों को किसी भी प्रकार का भुगतान शुल्क नहीं देना होगा।
आम ग्राहकों को नहीं देना होगा 1 पैसा भी अतिरिक्त
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के खाते में किए जाने वाले किसी भी ट्रांसफर पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। इसके साथ ही, रोजमर्रा की खरीदारी जैसे दूध, सब्जी, किराना, ऑटो या टैक्सी का भाड़ा देने वाले आम उपयोगकर्ताओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। संसद में संशोधन का मुख्य उद्देश्य डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Infrastructure), वित्तीय सुरक्षा और साइबर सिक्योरिटी तंत्र को और मजबूत बनाना है, न कि आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ डालना।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) क्या है और यह किस पर लागू होगा?
डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स द्वारा वसूले जाने वाले शुल्क को मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) कहा जाता है। नए कानून के तहत अगर भविष्य में MDR लागू भी किया जाता है, तो इसके नियम बेहद सीमित होंगे:
1- केवल चुनिंदा मर्चेंट पर लागू: भविष्य में यदि MDR लागू होता है, तो यह केवल कुछ बड़े मर्चेंट (कारोबारियों) के लेन-देन पर ही लागू होगा, आम ग्राहकों पर नहीं।
2- थ्रेसहोल्ड (न्यूनतम सीमा): मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, केवल ₹2,000 से अधिक के व्यावसायिक लेन-देन पर ही 0.25% से 0.4% के बीच मामूली MDR शुल्क लगाने की अनुमति दी जा सकती है।
3- कार्ड्स के मुकाबले बेहद सस्ता: यह दर डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स पर लगने वाले MDR शुल्क की तुलना में बहुत ही कम और नाममात्र होगी।
4- छोटे व्यापारी मुक्त: छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करना पूरी तरह से मुफ्त रहेगा।
कब लागू होंगी नई दरें?
सरकार के अनुसार, पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट (Payment and Settlement Systems Act, 2007) में संशोधन के बाद, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के नेतृत्व वाली ‘यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी’ ही MDR के क्रियान्वयन और उसकी सटीक दरों पर अंतिम फैसला लेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि बैंक और फिनटेक (FinTech) कंपनियां इस नाममात्र शुल्क से मिलने वाले राजस्व का उपयोग डिजिटल भुगतान प्रणाली को हैक-प्रूफ बनाने और नई तकनीकों को विकसित करने में करेंगी।






