बुढ़ापे में अपनों ने फेरा मुंह तो सरकार बनी सहारा: यूपी के सभी 75 जिलों के वृद्धाश्रमों का होगा कायाकल्प

संवाद 24 लखनऊ। जीवन की सांझ में जब अपने ही साथ छोड़ देते हैं और इंसान बेबसी व लाचारी के भंवर में फंस जाता है, तब उस पीड़ा को समझना और सम्मान के साथ सहारा देना किसी भी संवेदनशील समाज व सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने इसी संवेदनशीलता को धरातल पर उतारते हुए राज्य के सभी 75 जिलों में संचालित वृद्धाश्रमों के लिए एक व्यापक और मानवीय कल्याणकारी खाका तैयार किया है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इन वृद्धाश्रमों को अब केवल आश्रय स्थल नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए ‘स्वास्थ्य, सम्मान और स्वाभिमान’ के आधुनिक केंद्रों में बदला जा रहा है। सरकार की इस नई पहल का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बेघर और निराश्रित बुजुर्ग को जीवन के इस नाजुक दौर में बेचारगी का सामना न करना पड़े, बल्कि वे स्वस्थ, सक्रिय और गरिमामय जीवन जी सकें।

​दहलीज पर पहुंचेगी डॉक्टरों की टीम: नियमित साप्ताहिक स्वास्थ्य शिविर
​इस नई कल्याणकारी योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण है। समाज कल्याण विभाग की ओर से प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि वे हर हफ्ते आश्रमों में जाकर नियमित स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करवाएं। इन साप्ताहिक शिविरों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम खुद वृद्धाश्रम पहुंचेगी। ​शिविरों के दौरान प्रत्येक बुजुर्ग के ब्लड प्रेशर (बीपी), शुगर, नेत्र दृष्टि और सामान्य स्वास्थ्य की गहन जांच की जाएगी। वृद्धावस्था में अक्सर आंखों की रोशनी कमजोर होने, मोतियाबिंद, जोड़ों के दर्द और पुरानी बीमारियों की समस्याएं आम होती हैं। इन समस्याओं की समय रहते पहचान कर आश्रम में ही सभी जरूरी दवाएं पूरी तरह निःशुल्क मुहैया कराई जाएंगी। यदि किसी बुजुर्ग को विशेष चिकित्सा अथवा सर्जरी की दरकार होगी, तो उन्हें नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में त्वरित उपचार की सुविधा दी जाएगी।

​योग और ध्यान से मिलेगी मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा
​वृद्धावस्था में केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि एकाकीपन और मानसिक तनाव सबसे बड़ा अभिशाप बन जाता है। इस मनोवैज्ञानिक पहलू को ध्यान में रखते हुए सरकार ने आश्रमों में योग, प्राणायाम और ध्यान के नियमित सत्र अनिवार्य कर दिए हैं। ​प्रशिक्षित योग प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में बुजुर्गों को उनकी शारीरिक क्षमता के अनुसार हल्के योगासन, ध्यान और श्वास अभ्यास कराए जाएंगे। इससे न केवल उनके जोड़ों के दर्द और अनिद्रा जैसी समस्याओं में राहत मिलेगी, बल्कि उनका मानसिक तनाव दूर होगा और जीवन के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा। आश्रम परिसर में सुबह और शाम का माहौल आध्यात्मिक व ऊर्जावान बने, इसके लिए सामूहिक भजन-कीर्तन, सत्संग और संवाद सत्र भी नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं।

​डाइट चार्ट से लेकर मनोरंजन और लाइब्रेरी तक सब कुछ खास
​सरकारी योजना के तहत आश्रमों के बुनियादी ढांचे और दैनिक जीवन स्तर में व्यापक सुधार किया जा रहा है। बुजुर्गों के खानपान के लिए पोषण विशेषज्ञों की देखरेख में एक विशेष ‘डाइट चार्ट’ लागू किया गया है, जिसमें सुपाच्य दलिया, मौसमी हरी सब्जियां, फल, दालें, दूध और संतुलित भोजन की व्यवस्था है। ​इसके साथ ही आश्रमों में स्वच्छ पेयजल (RO वाटर), साफ-सुथरे कमरे, अनुकूल बिस्तर और गर्म पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। संवासियों के मानसिक जुड़ाव और बौद्धिक मनोरंजन के लिए हर आश्रम में टेलीविजन कक्ष, समाचार पत्र और ज्ञानवर्धक व धार्मिक पुस्तकों से सुसज्जित लाइब्रेरी की स्थापना की गई है। बुजुर्ग आपस में कैरम, लूडो जैसे इंडोर खेल खेल सकें और एक-दूसरे के सुख-दुख बांट सकें, ऐसा पारिवारिक माहौल तैयार किया गया है।

​’अपनों ने छोड़ा, सरकार ने जोड़ा’ – स्वावलंबन और सुरक्षा का मजबूत कवच
​उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में संचालित इन आश्रय स्थलों में वर्तमान में हजारों बेघर, असहाय और निराश्रित वरिष्ठ नागरिक रह रहे हैं। इनमें से कई ऐसे हैं जो पहले रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों या धार्मिक स्थलों पर असुरक्षित जीवन जीने को मजबूर थे। सरकार ने उन्हें न केवल एक सुरक्षित छत दी है, बल्कि ₹1,000 की मासिक वृद्धावस्था पेंशन और आयुष्मान योजना के तहत ₹5 लाख तक के मुफ्त इलाज का सुरक्षा कवच भी प्रदान किया है। ​अधिकारियों का कहना है कि समाज कल्याण विभाग निरंतर इन आश्रमों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहा है ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। सरकार का यह प्रयास साबित करता है कि आधुनिक व्यवस्था में बुजुर्ग समाज पर बोझ नहीं, बल्कि सम्मान और श्रद्धा के पात्र हैं।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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