
संवाद 24 नई दिल्ली। देश की सीमा और सुरक्षा में मुस्तैद भारतीय वायुसेना (IAF) के गलियारों से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। देश की राजधानी नई दिल्ली में तैनात भारतीय वायुसेना के एक सीनियर अधिकारी यानी विंग कमांडर को खुफिया एजेंसियों और दिल्ली पुलिस ने मिलकर गिरफ्तार किया है। आरोप है कि अधिकारी पड़ोसी देश पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों द्वारा बुने गए ‘हनी ट्रैप’ (Honey Trap) के कुचक्र में फंसकर भारतीय सेना और रक्षा विभाग से जुड़ी बेहद संवेदनशील और वर्गीकृत जानकारियां सीमा पार साझा कर रहे थे। फिलहाल, गिरफ्तार विंग कमांडर को कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंप दिया गया है और वह न्यायिक हिरासत में हैं। वायुसेना और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की सतर्कता से इस पूरे नेटवर्क को उजागर करने में सफलता हासिल हुई है।
कैसे जाल में फंसा अधिकारी? सोशल मीडिया बना जरिया
शुरुआती जांच और आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विंग कमांडर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सीमा पार बैठी पाकिस्तानी महिला हैंडलरों के संपर्क में आया था। फर्जी पहचान और आकर्षक प्रोफाइल के सहारे पाकिस्तानी जासूसों ने पहले अधिकारी का भरोसा हासिल किया और धीरे-धीरे उन्हें संवेदनशील सामरिक जानकारियां साझा करने के लिए उकसाया। मामले में सबसे गंभीर बात यह सामने आ रही है कि आरोपी अधिकारी पर सिर्फ बातचीत और गोपनीय दस्तावेज लीक करने का ही नहीं, बल्कि डेटा चोरी के लिए एक साथी सहकर्मी के मोबाइल फोन में स्पाइवेयर/मैलवेयर (डेटा चुराने वाला सॉफ्टवेयर) इंस्टॉल करने का भी गंभीर आरोप है। इसका मुख्य मकसद उस डिवाइस का पूरा रिमोट कंट्रोल हासिल करके सैन्य तैयारियों, तैनाती और महत्वपूर्ण दस्तावेजों का ब्योरा चुराना था।
खुफिया विंग की पैनी नजर और वायुसेना की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
भारतीय वायुसेना की आंतरिक खुफिया विंग (Air Force Intelligence) काफी समय से संबंधित अधिकारी की संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों और चाल-चलन पर नजर रख रही थी। संदेह पुख्ता होने के बाद वायुसेना खुफिया विभाग ने विशिष्ट इनपुट और पुख्ता सबूत जुटाकर दिल्ली पुलिस के साथ साझा किए। वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मामले की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्र की सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़ी गतिविधियों के खिलाफ वायुसेना पूरी तरह जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति पर काम करती है। अधिकारी ने बताया, “संबंधित अफसर पर लंबे समय से सक्रिय निगरानी रखी जा रही थी। हमारी समयबद्ध निवारक कार्रवाई के कारण ही आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा गया। सुरक्षा से समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।”
शासकीय गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) के तहत केस दर्ज
दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार विंग कमांडर के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (Official Secrets Act – OSA) यानी शासकीय गोपनीयता अधिनियम की विभिन्न सख्त धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि:
1- आरोपी अधिकारी ने पाकिस्तान को कौन-कौन सी गोपनीय फाइल्स, नक्शे या सैन्य योजनाएं भेजी हैं।
2- इस जासूसी के बदले क्या अधिकारी को किसी तरह के वित्तीय लेनदेन (पैसों के ट्रांसफर) या विदेशी खातों में भुगतान का लाभ मिला था।
3- क्या इस जासूसी रैकेट में वायुसेना या किसी अन्य रक्षा विंग का कोई और कर्मचारी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल था।
पाकिस्तानी जासूसी और हनी ट्रैप के बढ़ते मामले
यह पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) ने भारतीय सुरक्षा बलों और नागरिकों को सोशल मीडिया के जरिए अपना शिकार बनाने की कोशिश की हो। इससे पहले भी राजस्थान, पंजाब और दिल्ली में इस तरह के कई सनसनीखेज खुलासे हो चुके हैं।
1- पिछले वर्ष राजस्थान के अलवर सैन्य छावनी क्षेत्र से मंगत सिंह नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। वह दो साल तक ‘ईशा शर्मा’ नाम की नकली पाकिस्तानी प्रोफाइल के झांसे में आकर आईएसआई को सेना से जुड़ी जानकारियां भेजता रहा था।
2- पाकिस्तानी हैंडलर अक्सर फर्जी नामों, भारतीय नंबरों के साथ मैसेजिंग ऐप्स और आकर्षक तस्वीरों का सहारा लेकर सेना के जवानों और अधिकारियों से दोस्ती गांठते हैं और फिर उन्हें आर्थिक या ब्लैकमेलिंग के जाल में फंसा लेते हैं।
साइबर सुरक्षा को लेकर सेना में बढ़ी सतर्कता
हालिया घटना के बाद भारतीय सशस्त्र बलों में सोशल मीडिया और साइबर सुरक्षा दिशानिर्देशों (Cyber Security SOPs) की समीक्षा और कड़ाई से अनुपालन कराने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। सैन्यकर्मियों को अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने और किसी भी अनजान लिंक या ऐप को डाउनलोड न करने की सख्त सलाह दी जाती है।
फिलहाल, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय खुफिया एजेंसियां आरोपी विंग कमांडर के डिजिटल उपकरणों (लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड ड्राइव) को फोरेंसिक जांच के लिए भेज चुकी हैं ताकि लीक हुए डेटा की वास्तविक मात्रा का सही आकलन किया जा सके।






