
कन्नौज के तिर्वा स्थित डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर राजकीय मेडिकल कॉलेज में बंद पड़े वार्डों से ऑक्सीजन गैस सप्लाई की पाइपलाइन गायब होने का मामला सामने आया है। पाइपलाइन के पीतल की होने की बात सामने आई है और इसकी अनुमानित कीमत 20 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया और आंतरिक स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है।
तीसरी और चौथी मंजिल के बंद वार्ड निशाने पर
बताया गया है कि मेडिकल कॉलेज की तीसरी और चौथी मंजिल पर बने कुछ वार्ड अभी संचालित नहीं किए गए हैं। इन वार्डों में सामान्य आवाजाही नहीं होने के कारण प्रवेश द्वार पर ताला लगा रहता था। इसी दौरान वहां लगी ऑक्सीजन गैस सप्लाई की पाइपलाइन कथित रूप से निकालकर गायब कर दी गई।
खिड़की और जाली तोड़कर पाइपलाइन निकालने का दावा
मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, पाइपलाइन निकालने के लिए खिड़की और जाली को नुकसान पहुंचाया गया। चोरी हुई पाइपलाइन की कीमत लाखों रुपये में होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, चोरी गई सामग्री की वास्तविक मात्रा और कीमत की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
ऑक्सीजन पाइपलाइन चोरी के अन्य मामलों में भी अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली धातु की पाइपलाइन को निशाना बनाए जाने के उदाहरण सामने आए हैं।
छह आउटसोर्सिंग कर्मियों को जारी किया गया नोटिस
मामला सामने आने के बाद सीएमएस डॉ. दिलीप सिंह ने आउटसोर्सिंग कंपनी मेसर्स फ्रंटलाइन सिक्योरिटी एंड मैनपावर सर्विसेज से जुड़े छह कर्मचारियों—शैलेंद्र सिंह, मानवेन्द्र सिंह, अतुल कुमार शुक्ला, विजय शंकर, कोतवाल और इंद्रेश तिवारी—को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।नोटिस में पूछा गया है कि उनकी ड्यूटी के दौरान वार्डों में लगी ऑक्सीजन गैस पाइपलाइन कैसे गायब हुई। साथ ही मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। नोटिस में यह भी उल्लेख है कि स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर चोरी हुई पाइपलाइन की लागत की वसूली वेतन से किए जाने की कार्रवाई की जा सकती है।
आउटसोर्सिंग सुपरवाइजर ने दी अलग सफाई
वहीं, आउटसोर्सिंग कंपनी के सुपरवाइजर शैलेंद्र सिंह ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि तीसरी और चौथी मंजिल के संबंधित वार्डों में उनकी कंपनी के किसी कर्मचारी की तैनाती नहीं है। उनके अनुसार वार्डों के प्रवेश द्वार पर लगातार ताला लगा रहता है।
‘बंदरों ने पाइपलाइन तोड़ी’ वाली बात भी चर्चा में
मामले के बीच कुछ आउटसोर्सिंग कर्मियों की ओर से यह बात कही गई कि मेडिकल कॉलेज परिसर में बंदरों की संख्या अधिक है और संभव है कि बंदरों ने पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाया हो। हालांकि, यह केवल कर्मचारियों की ओर से व्यक्त की गई संभावना है; पाइपलाइन चोरी हुई अथवा क्षतिग्रस्त हुई, इसका वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
प्रशासन बोला—जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
सीएमएस डॉ. दिलीप सिंह ने बताया कि पाइपलाइन गायब होने के मामले की जांच की जा रही है। वहीं मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने कुछ समय पहले ही कार्यभार संभाला है, इसलिए उन्हें इस पुराने प्रकरण की पूरी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की वास्तविक स्थिति का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।






