
संवाद 24 महाराष्ट्र। ठाणे जिले के भिवंडी से एक बड़ी और दुखद दुर्घटना सामने आई है। यहाँ के नारपोली इलाके स्थित भंडारी कंपाउंड में एक चार मंजिला ‘कोहिनूर इमारत’ का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। इस भीषण हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, जबकि मलबे के नीचे कई अन्य लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं।
जर्जर घोषित थी इमारत, फिर भी चल रहा था
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह चार मंजिला कोहिनूर इमारत काफी पुरानी और जर्जर स्थिति में थी। नगर निगम द्वारा इस इमारत को पहले ही ‘सी-कैटेगरी’ (अति खतरनाक और रहने के अयोग्य) की श्रेणी में रख कर जर्जर घोषित किया जा चुका था। खतरे को देखते हुए इस इमारत को खाली भी करवा लिया गया था। हालांकि, इमारत को खाली कराए जाने के बावजूद इसके भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर कुछ कामकाज और गतिविधियां चल रही थीं। स्थानीय सूत्रों और प्रशासनिक अनुमानों के मुताबिक, जब यह हादसा हुआ तब मलबे के नीचे लगभग 6 से 7 मजदूरों और अन्य लोगों के दबे होने की संभावना है।
एनडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
हादसे की खबर मिलते ही घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। फौरन पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद राहत और बचाव कार्यों के लिए एनडीआरएफ की टीम को तुरंत तैनात किया गया। रेस्क्यू अभियान के दौरान एनडीआरएफ की टीम ने मलबे के बीच से खोजबीन करते हुए एक महिला को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की है। बचाई गई महिला को गंभीर हालत में तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। मलबे में फंसे अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए क्रेन, जेसीबी और अन्य आधुनिक उपकरणों की मदद से कंक्रीट और ईंटों के मलबे को हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है।
प्रशासन की लापरवाही और सुरक्षा पर सवाल
इस दुर्घटना के बाद स्थानीय स्तर पर एक बार फिर पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा और उनके रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम द्वारा खतरनाक घोषित किए जाने के बावजूद यदि इमारत के निचले हिस्से में काम चल रहा था, तो यह प्रशासनिक निगरानी पर भी सवालिया निशान लगाता है। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और घायलों को त्वरित चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। बचाव अभियान अभी भी जारी है और विस्तृत विवरण की प्रतीक्षा की जा रही है।






