
संवाद 24 नई दिल्ली । पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान से एक भीषण औद्योगिक हादसे की खबर सामने आई है। बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा के बाहरी इलाके में स्थित एक कोयला खदान में अचानक हुए विस्फोट के बाद खदान ढह गई, जिसमें कम से कम 32 मजदूरों की मौत हो गई और कई अन्य खनिक अभी भी मलबे के नीचे फंसे हुए हैं। हादसे की जानकारी मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचे हैं और आपातकालीन स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
मीथेन गैस के जमाव के कारण हुआ विस्फोट
प्रशासनिक अधिकारियों और सरकारी खान निरीक्षक गनी बलोच के अनुसार, यह भयानक हादसा खदान के भीतर अत्यधिक जहरीली मीथेन गैस जमा होने के कारण हुए विस्फोट से हुआ। गैस के भारी दबाव के कारण हुए धमाके से एक-दूसरे से सटी दो खदानें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और उनका ऊपरी हिस्सा ढह गया। बलूचिस्तान के खान एवं खनिज विकास मंत्री शोएब नोशेरवानी ने बताया कि जिस समय धमाका हुआ, उस दौरान खदान कॉम्प्लेक्स के प्रभावित हिस्से में लगभग 36 से अधिक श्रमिक काम कर रहे थे।
4,000 फीट की गहराई में राहत कार्य जारी
हादसे के तुरंत बाद चलाए गए शुरुआती अभियान में बचाव दलों ने सात शव बाहर निकाले थे, लेकिन जैसे-जैसे मलबे को हटाने का काम आगे बढ़ा, 25 और शव बरामद किए गए। प्रांतीय मुख्य खान निरीक्षक मुहम्मद आतिफ ने जानकारी दी कि राहत कार्य लगभग 4,000 फीट (1,219 मीटर) की भारी गहराई पर चल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि खदानों में मीथेन गैस विस्फोट के बाद वायुमंडल में ऑक्सीजन का स्तर लगभग शून्य हो जाता है। इस स्थिति में अंदर फंसे अन्य खनिकों के जीवित बचने की संभावनाएं काफी क्षीण मानी जा रही हैं।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मजदूर यूनियनों का गुस्सा
इस जानलेवा हादसे के बाद स्थानीय खनिक यूनियनों और पाकिस्तान सेंट्रल माइंस लेबर फेडरेशन में गहरा आक्रोश है। मजदूर संगठनों ने खदान मालिकों पर लापरवाही और न्यूनतम सुरक्षा मानकों का पालन न करने का सीधा आरोप लगाया है। बलूचिस्तान की कोयला खदानों में वेंटिलेशन (हवा की आवाजाही), गैस मॉनिटरिंग सिस्टम और आधुनिक सुरक्षा उपकरणों का भारी अभाव रहता है, जिससे ऐसे जानलेवा हादसे बार-बार होते हैं। प्रांतीय सरकार ने मृतक खनिकों के परिजनों के लिए 5-5 लाख पाकिस्तानी रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है और घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, गरीबी और बेरोजगारी के कारण अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने वाले खनिकों के लिए सुरक्षा गारंटी अब भी एक बड़ा सवाल बनी हुई है।






