
संवाद 24 छत्तीसगढ़।राजधानी में दिल दहला देने वाली एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। टिकरापारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले संजय नगर (मदनी चौक) में एक बंद मकान के भीतर से एक ही परिवार के पांच सदस्यों के शव बरामद किए गए हैं। इस भीषण त्रासदी की खबर जैसे ही फैली, पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया और आस-पास के सैकड़ों लोगों की भीड़ मौके पर इकट्ठा हो गई। मृतकों में पति-पत्नी, दो नाबालिग बेटियां और एक युवा बेटा शामिल है।
गुरुवार शाम से बंद था दरवाजा, बदबू आने पर खुला राज
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह परिवार पिछले लगभग आठ महीनों से संजय नगर के इस मकान में किराए पर रह रहा था। पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि गुरुवार की शाम से ही इस घर का दरवाजा अंदर से पूरी तरह बंद था। शुरुआत में लोगों ने सोचा कि परिवार किसी काम से बाहर गया होगा या अंदर आराम कर रहा होगा। लेकिन जब शुक्रवार बीत जाने के बाद भी शनिवार सुबह तक घर में किसी भी तरह की कोई हलचल नहीं हुई, तो पड़ोसियों का संदेह गहरा गया।
कुछ लोगों ने खिड़की और दरारों से भीतर झांकने का प्रयास किया, तो अंदर का खौफनाक नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। घर के भीतर बेसुध हालत में शव पड़े हुए दिखाई दे रहे थे। इसके तुरंत बाद स्थानीय नागरिकों ने बिना वक्त गंवाए इसकी सूचना टिकरापारा थाना पुलिस को दी।
कमरे का खौफनाक मंजर: फंदे पर लटका मिला मुखिया, अपनों के मुंह से निकल रहा था झाग
वारदात की गंभीरता को देखते हुए टिकरापारा पुलिस स्टेशन के आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स (FSL) की टीम को भी फौरन मौके पर बुलाया गया। जब पुलिस ने दरवाजा खोलकर भीतर प्रवेश किया, तो वहां का दृश्य बेहद विचलित करने वाला था। घर के मुखिया, 50 वर्षीय साजिद अली का शव कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला। वहीं दूसरी ओर, उसकी पत्नी राबिया, 19 वर्षीय बेटा इरशाद अली, 17 वर्षीय बेटी शाहिदा और 16 वर्षीय छोटी बेटी इरशाबा बेगम के शव बिस्तर और जमीन पर मृत अवस्था में पड़े हुए थे। फॉरेंसिक टीम की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि पत्नी और तीनों बच्चों के मुंह और नाक से सफेद झाग निकल रहा था। इससे यह प्रबल आशंका जताई जा रही है कि बाकी चारों सदस्यों की मौत किसी बेहद जहरीले या विषाक्त पदार्थ के सेवन के कारण हुई है। पुलिस ने पूरे मकान को सील कर दिया है और मौके से फिंगरप्रिंट्स व अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
कर्ज का जानलेवा जाल और रोज-रोज की कलह
आखिर हंसते-खेलते इस परिवार का ऐसा दर्दनाक अंत क्यों हुआ? इस सवाल के जवाब की तलाश में जब पुलिस ने आस-पास के लोगों और रिश्तेदारों से पूछताछ शुरू की, तो इसके पीछे की एक बेहद दर्दनाक और कड़वी सच्चाई सामने आई। मृतक साजिद अली राजधानी के ही मौदहापारा इलाके में बैटरी रिपेयरिंग (मरम्मत) का एक छोटा सा काम करता था। लॉकडाउन और मंदी के बाद से उसका काम ठीक से नहीं चल पा रहा था, जिसके कारण उसकी आर्थिक स्थिति बेहद खस्ता हो चुकी थी। घर का खर्च चलाने और व्यापार को संभालने के लिए साजिद ने बैंकों और कुछ अन्य जगहों से भारी कर्ज (लोन) ले रखा था। स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले काफी समय से कर्ज की वसूली करने वाले रिकवरी एजेंट अक्सर साजिद के घर के चक्कर काट रहे थे और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। आर्थिक तंगी और हर दिन दरवाजे पर आकर खड़े होने वाले तगादेदारों की वजह से पति-पत्नी के बीच अक्सर भारी विवाद और कहासुनी होती रहती थी। माना जा रहा है कि इसी भारी कर्ज के दबाव और रोज-रोज के मानसिक तनाव से तंग आकर परिवार ने यह आत्मघाती कदम उठाया होगा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ होगा पूरा सच
घटनास्थल पर उमड़ी भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले में सुसाइड और मर्डर दोनों ही एंगल्स से गहराई से जांच कर रहे हैं। क्या साजिद ने पहले अपने पूरे परिवार को जहर दिया और फिर खुद फंदे पर लटक गया, या फिर पूरे परिवार ने आपसी सहमति से यह खौफनाक फैसला लिया? इन सभी सवालों के जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएंगे। फिलहाल पुलिस ने पांचों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भीमराव आंबेडकर अस्पताल भेज दिया है और मामले की सघन तफ्तीश जारी है।






