
संवाद 24 हरियाणा। भारतीय रेलवे के इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। देश को प्रदूषण मुक्त और अत्याधुनिक परिवहन व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ी छलांग लगाई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार सुबह 11 बजे हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली बहुप्रतीक्षित ‘हाइड्रोजन ट्रेन’ को हरी झंडी दिखाकर राष्ट्र को समर्पित कर दिया है। इस ऐतिहासिक कदम के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है, जहाँ पर्यावरण के अनुकूल हाइड्रोजन ईंधन से ट्रेनें चलाई जा रही हैं।
आम जनता के लिए नियमित सफर शुरू, जेब पर नहीं पड़ेगा बोझ
यह ट्रेन केवल तकनीक का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि आम जनता के लिए एक बेहद सुगम और किफायती वरदान साबित होने वाली है। रेल प्रशासन के अनुसार, उद्घाटन कार्यक्रम संपन्न होने के बाद 17 जुलाई से ही इस आधुनिक ट्रेन का नियमित संचालन आम यात्रियों के लिए भी शुरू कर दिया गया है। सबसे राहत की बात यह है कि इस ट्रेन में सफर करने के लिए यात्रियों को किसी वीआईपी या महंगे किराये का भुगतान नहीं करना होगा। जींद से लेकर सोनीपत के बीच पूरे 89 किलोमीटर के लंबे सफर के लिए यात्रियों को अधिकतम सिर्फ 25 रुपये का टिकट लेना होगा। कम दूरी के स्टेशनों के लिए किराया मात्र 10 रुपये से शुरू होकर दूरी के अनुसार 15, 20 और अधिकतम 25 रुपये तक तय किया गया है। दैनिक यात्रियों (Daily Commuters), नौकरीपेशा लोगों और छात्रों के लिए यह सेवा न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि उनकी जेब पर भी भारी नहीं पड़ेगी।
उद्घाटन यात्रा में 1000 स्कूली छात्रों ने किया सफर, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए उद्घाटन यात्रा को बेहद खास बनाया गया। इस ट्रेन के कुल डिब्बों में से दो बोगियों को रेलवे के वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञों, अधिकारियों और विशेष आमंत्रित अतिथियों के लिए आरक्षित रखा गया था। वहीं, इस नई शुरुआत को भावी पीढ़ी से जोड़ने के लिए रूट पर पड़ने वाले पांच प्रमुख स्टेशनों—पांडु पिंडारा, गोहाना, लाठ, मोहाना और सोनीपत से 200-200 स्कूली विद्यार्थियों का चयन किया गया। कुल मिलाकर 1000 से अधिक बच्चों ने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में बैठकर सफर का आनंद लिया और इस नई तकनीक को बेहद करीब से देखा। इस बड़े आयोजन को देखते हुए सोनीपत और जींद में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे। सोनीपत पुलिस कमिश्नरी के अधिकार क्षेत्र में किसी भी तरह के सुरक्षा व्यवधान से बचने के लिए ड्रोन उड़ाने पर अस्थायी रूप से पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया था।
ऐसा रहेगा ट्रेन का पूरा टाइम टेबल और रूट
नियमित संचालन के दौरान इस ट्रेन को आधिकारिक तौर पर ट्रेन नंबर 74010 और 74009 के रूप में चलाया जा रहा है। समय सारिणी के अनुसार, यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन पटरियों पर दौड़ेगी। प्रत्येक दिन सुबह यह ट्रेन 7 बजकर 40 मिनट पर जींद जंक्शन से रवाना होगी और 9 बजकर 40 मिनट पर सोनीपत जंक्शन पहुंचेगी। इसके बाद, वापसी के सफर में यह ट्रेन सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर सोनीपत से प्रस्थान करेगी और दोपहर ठीक 1 बजे जींद जंक्शन वापस लौटेगी। सफर के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए इस ट्रेन की अधिकतम गति सीमा 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है, जो इस रूट के लिहाज से बेहद सुरक्षित और समयबद्ध है।
इन 14 स्टेशनों पर रुकेगी ‘ग्रीन ट्रेन’
जींद से सोनीपत के बीच के छोटे-छोटे गांवों और कस्बों को जोड़ने के लिए रेलवे ने इस रूट पर कुल 14 स्टेशनों पर ठहराव तय किया है। जींद जंक्शन से खुलने के बाद यह ट्रेन क्रमशः जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, भंभेवा, ईशापुर खेड़ी, बुटाना, खंदराई, गोहाना, रभड़ा, लाठ, मोहाना, और बड़वासनी होते हुए सोनीपत जंक्शन पहुंचेगी। वापसी में भी इन सभी स्टेशनों पर इसी निर्धारित क्रम में ट्रेन का ठहराव रहेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के उन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जिन्हें काम के सिलसिले में रोजाना शहर आना-जाना पड़ता है।
तकनीक का बेजोड़ नमूना, क्यों खास है यह हाइड्रोजन ट्रेन?
इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) होना है। परंपरागत डीजल इंजनों के विपरीत, हाइड्रोजन ट्रेन चलाने में एक बूंद भी डीजल की खपत नहीं होती और न ही इससे कोई हानिकारक धुआं निकलता है। इस तकनीक में हाइड्रोजन ईंधन और ऑक्सीजन के रासायनिक मिश्रण से बिजली पैदा की जाती है, जिससे ट्रेन के मोटर चलते हैं। इस प्रक्रिया में धुएं की जगह केवल पानी और वाष्प (Steam) का उत्सर्जन होता है, जो पर्यावरण को तनिक भी नुकसान नहीं पहुंचाता। भारतीय रेलवे का यह कदम ‘नेट जीरो कार्बन एमिशन’ के बड़े लक्ष्य को हासिल करने में मील का पत्थर साबित होगा।






