​आधी रात को मिसाइलों से कांपा ईरान! अमेरिका ने हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन और पुलों को उड़ाया; मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट!

संवाद 24 नई दिल्ली। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तल्खी अब एक भीषण सैन्य टकराव में तब्दील हो गई है। अमेरिकी वायुसेना ने रात के अंधेरे में ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर एक के बाद एक कई भीषण हवाई हमले किए हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, इन अमेरिकी मिसाइल हमलों में दक्षिणी ईरान के एक प्रमुख हवाई अड्डे, बड़े रेलवे स्टेशन और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण दो पुलों को निशाना बनाकर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है। इस भीषण सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल गहरे हो गए हैं।

हवाई अड्डे और रेलवे जंक्शन पर भीषण बमबारी
ईरानी सरकारी टेलीविजन चैनल ‘आईआरआईबी’ (IRIB) की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी ईरान में स्थित ईरानशहर हवाई अड्डे के आसपास आधी रात को तीन जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे पूरा इलाका दहल उठा। शुरुआती जांच में पुष्टि हुई है कि हवाई अड्डे के परिसर पर कम से कम एक अमेरिकी मिसाइल सीधे आकर गिरी, जिससे रनवे और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके कुछ ही देर बाद, ईरान के प्रमुख बंदरगाह शहर ‘बंदर अब्बास’ के मुख्य रेलवे जंक्शन स्टेशन को अमेरिकी हवाई हमले का निशाना बनाया गया। रेलवे स्टेशन पर हुए इस अचानक हमले के कारण वहां अफरा-तफरी मच गई और शुरुआती जानकारी के अनुसार कम से कम दो ईरानी नागरिकों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है।

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास दो पुलों को उड़ाया, संपर्क टूटा
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ (IRNA) ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि सबसे बड़ा नुकसान होर्मोजगान प्रांत में हुआ है। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने वैश्विक व्यापार के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील जलमार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के पास स्थित दो बड़े पुलों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें बरसाईं। इन पुलों के पूरी तरह से टूट जाने के कारण तटीय इलाकों का मुख्य भूमि से संपर्क पूरी तरह कट गया है। इस पुल हादसे में दो स्थानीय नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई है, जबकि चार अन्य लोग मलबे की चपेट में आने से घायल हुए हैं। घटनास्थल पर चारों तरफ धुआं और तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है।

वैश्विक ऊर्जा संकट और तेल आपूर्ति ठप होने का खतरा
ईरानी प्रशासन ने इन हमलों को ‘अमेरिकी दुश्मन की कायरतापूर्ण हरकत’ करार दिया है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक वाशिंगटन या अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान सामने नहीं आया है। अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक और सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला दोनों देशों के बीच चरम पर पहुंचे तनाव का नतीजा है। चूंकि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरे विश्व के कच्चे तेल के निर्यात का सबसे मुख्य और महत्वपूर्ण जलमार्ग माना जाता है, इसलिए इस क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बनने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह ठप होने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

ईरान ने की अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की निंदा
ईरान सरकार के उच्च अधिकारियों ने इन हमलों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि संप्रभु देश पर इस तरह का आक्रमण खुले तौर पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ाने जैसा है। हमले के तुरंत बाद प्रभावित इलाकों में ईरान की सेना, सिविल डिफेंस और रेस्क्यू टीमों को तैनात कर दिया गया है। मलबे को हटाने और घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर बचाव कार्य जारी है। इस बड़े हमले के बाद अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान इस अमेरिकी कार्रवाई का जवाब किस तरह देता है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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