
संवाद 24 नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चल रहा तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। खाड़ी देशों और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी ने अब सीधे तौर पर भारतीय नागरिकों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो बड़े कमर्शियल तेल टैंकरों पर भीषण क्रूज मिसाइल हमला किया गया है। इस चौंकाने वाले हमले में एक भारतीय नाविक (क्रू मेंबर) की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि आठ अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों में भी छह अन्य भारतीय नागरिक शामिल हैं, जिससे नई दिल्ली में भी सुरक्षा और कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
ओमान के जलक्षेत्र में मची तबाही
यूएई के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक और बेहद संवेदनशील बयान के अनुसार, यह हमला ओमान के समुद्री जलक्षेत्र के करीब, होर्मुज जलडमरूमध्य की दक्षिणी लेन में हुआ। ईरान की मिसाइल यूनिट ने रणनीति के तहत यूएई के झंडे वाले दो विशाल तेल टैंकरों—’मोम्बासा’ (Mombasa) और ‘बाहिया’ (Bahia)—को अपना निशाना बनाया। चश्मदीदों और नौसैनिक सूत्रों के हवाले से पता चला है कि जैसे ही ईरानी क्रूज मिसाइलें जहाजों से टकराईं, समंदर के बीच एक जोरदार धमाका हुआ और दोनों जहाज आग की भीषण लपटों से घिर गए। इस भयावह हमले के कारण ‘टैंकर मोम्बासा’ पर तैनात चालक दल के एक भारतीय सदस्य की जान चली गई। वहीं, दोनों जहाजों को मिलाकर कुल आठ लोग घायल हुए हैं, जिनमें से चार की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। घायलों में छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। हालांकि, जहाजों पर मौजूद स्वचालित फायर फाइटिंग सिस्टम और क्रू की सूझबूझ से घंटों की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया, लेकिन इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
यूएई की दोटूक: ‘जवाब देने का हक हमारा है’
इस दुस्साहसिक हमले के तुरंत बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। यूएई ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला और स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए ईरान की इस हरकत की कड़े शब्दों में निंदा की है। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जारी अपने आधिकारिक संदेश में कहा, *”यह हमला न केवल हमारी संप्रभुता पर चोट है, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक व्यापारिक स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरा है।” यूएई सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि वह इस आक्रामक और तनावपूर्ण स्थिति का जवाब देने का अपना पूरा संप्रभु अधिकार सुरक्षित रखती है। अपनी सीमाओं, नागरिकों, निवासियों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए यूएई कोई भी बड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। इस बयान के बाद यूएई के सशस्त्र बलों को ‘हाई अलर्ट’ पर डाल दिया गया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य टकराव की आशंका गहरा गई है।
ईरान का दावा: ‘अवैध आवाजाही पर की गई कार्रवाई’
दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ईरान ने अपनी इस कार्रवाई को जायज ठहराने की कोशिश की है। ईरान के सरकारी टेलीविजन और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के सूत्रों का कहना है कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से कथित तौर पर अवैध रूप से गुजरने की कोशिश कर रहे दो संदिग्ध जहाजों पर पहले चेतावनी वाली फायरिंग की थी। ईरान का आरोप है कि ये जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन कर रहे थे और ईरानी नौसेना के आदेशों की अनदेखी कर भागने की कोशिश में थे, जिसके बाद यह दंडात्मक कार्रवाई की गई।
भारत की बढ़ी चिंता, वैश्विक तेल बाजार पर संकट
इस हमले ने भारत सरकार की चिंताओं को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। चूंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत का एक बड़ा व्यापार और कच्चे तेल का आयात होता है, इसलिए वहां भारतीय क्रू मेंबर्स की सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर विदेश मंत्रालय सक्रिय हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों ने यूएई और ओमान में मौजूद दूतावासों के जरिए घायलों को सर्वोत्तम इलाज मुहैया कराने और मृतक के शव को जल्द से जल्द भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका-यूएई के बीच यह टकराव और बढ़ता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बाधित हो सकता है। यह दुनिया का वह संकरा समुद्री रास्ता है जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस रूट के बंद होने या असुरक्षित होने से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। फिलहाल, पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है और सभी देशों की नौसेनाएं इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।






