
संवाद 24 महाराष्ट्र। औद्योगिक क्षेत्र पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी इलाके से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आ रही है। यहाँ एक निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस अचानक हुए हादसे से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और चीख-पुकार मच गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जब यह इमारत गिरी, तब वहाँ काम कर रहे लगभग 15 से 16 मजदूर और अन्य लोग मलबे के नीचे फंस गए। घटना की भयावहता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया है और युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है।
सुबह-सुबह काल बनकर गिरी कंक्रीट की दीवारें
यह दिल दहला देने वाला हादसा सुबह के वक्त हुआ, जब निर्माण स्थल पर रोजाना की तरह कामकाज शुरू ही हुआ था। अचानक एक जोरदार धमाके जैसी आवाज हुई और देखते ही देखते पूरी इमारत जमींदोज हो गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, धूल का एक गुबार आसमान में छा गया और चारों तरफ बस मलबा ही मलबा नजर आने लगा। इमारत का बेसमेंट और उसके ऊपर की मंजिलें पूरी तरह से ढह चुकी हैं, जिसके चलते नीचे फंसे लोगों तक पहुँचना एक बेहद जटिल चुनौती बन गया है।
सेना, NDRF और फायर ब्रिगेड ने संभाला मोर्चा
हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं। स्थिति की गंभीरता और मलबे के विशाल ढेर को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और भारतीय सेना की विशेष टीमों को भी तत्काल मदद के लिए बुलाया गया। वर्तमान में सेना, NDRF, पुलिस और फायर ब्रिगेड के जवान मिलकर संयुक्त रूप से ‘ऑपरेशन जिंदगी’ चला रहे हैं। मलबे को हटाने के लिए भारी-भरकम जेसीबी मशीनों, क्रेन और कंक्रीट कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
4 लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू, अन्य की तलाश जारी
घटनास्थल पर स्थिति का जायजा लेने पहुंचे महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री गिरीश महाजन ने मीडिया से बातचीत में बताया कि राहतकर्मियों ने बेहद सूझबूझ और फुर्ती दिखाते हुए अब तक चार लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। रेस्क्यू किए गए सभी घायलों को तुरंत पास के नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है। गनीमत यह है कि फिलहाल बाहर निकाले गए चारों नागरिकों की स्थिति स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है। हालांकि, मंत्री महाजन ने यह भी आशंका जताई कि अभी भी 6 से 7 लोग या उससे अधिक मलबे के मुख्य हिस्से में फंसे हो सकते हैं। शुरुआती रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे के निचले हिस्से से कुछ दबी हुई आवाजें और हलचल महसूस की गई थी, जिसके आधार पर ही शुरुआती चार लोगों को तेजी से ट्रैक कर बाहर निकाला गया। लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, मलबे के नीचे से आने वाली आवाजें पूरी तरह बंद हो गई हैं। इस सन्नाटे ने बचाव दल की चिंता को और ज्यादा बढ़ा दिया है। NDRF और सेना के विशेषज्ञ अब अत्याधुनिक उपकरणों, खोजी कुत्तों (स्निफर डॉग्स) और सेंसर की मदद से कंक्रीट के स्लैब के नीचे छिपी जिंदगियों को लोकेट करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि भले ही नीचे से कोई जवाब न मिल रहा हो, लेकिन जब तक एक-एक शख्स को ढूंढ नहीं लिया जाता, तब तक मलबा हटाने और खोजबीन का काम बिना रुके जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री खुद रख रहे हैं पल-पल की रिपोर्ट
इस संवेदनशील हादसे पर राज्य सरकार पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस खुद मुंबई से इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की लाइव निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बचाव कार्य में किसी भी तरह की ढिलाई या संसाधनों की कमी नहीं होनी चाहिए। घायलों के बेहतर इलाज के लिए अस्पतालों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।
सुरक्षा के घेरे में इलाका, ट्रैफिक डायवर्ट
हादसे वाली जगह पर लोगों की भारी भीड़ जमा न हो और रेस्क्यू वाहनों को आने-जाने में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए पुलिस ने पूरे मोशी इलाके की घेराबंदी कर दी है। मुख्य सड़कों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और आम यातायात को दूसरे रास्तों पर डायवर्ट (मोड़) कर दिया गया है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और घटना स्थल पर भीड़ लगाने से बचें ताकि बचाव दल बिना किसी बाधा के अपना काम पूरा कर सके। इस बात की भी जांच शुरू कर दी गई है कि आखिरकार निर्माणाधीन इमारत के गिरने की मुख्य वजह क्या थी और क्या इसमें निर्माण सामग्री की गुणवत्ता या नियमों की अनदेखी की गई थी।






