
संवाद 24 जम्मू-कश्मीर । शिक्षा विभाग और सरकारी स्कूलों के गलियारों से एक बेहद संवेदनशील और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों से लेकर राजनीतिक हलकों तक में हड़कंप मचा दिया है। केंद्र शासित प्रदेश के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की लाइब्रेरी में बांटी गई कुछ किताबों में कथित तौर पर अलगाववादी नेताओं और दुर्दांत आतंकवादियों को ‘महान व्यक्तित्व’ और ‘महानायक’ (Legends) के रूप में पेश करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले का संज्ञान लेते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस की विशेष शाखा ‘काउंटर इंटेलिजेंस जम्मू’ (CIJ) ने एक बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस की टीमें अब न केवल दफ्तरों में छापेमारी कर रही हैं, बल्कि कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और सभी डिजिटल रिकॉर्ड्स को गहराई से स्कैन कर रही हैं।
लाइब्रेरी की किताबों में देश विरोधी सामग्री का खेल
यह पूरा विवाद ‘समग्र शिक्षा योजना’ (Samagra Shiksha Scheme) के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान पुस्तकालयों के लिए खरीदी गई किताबों से शुरू हुआ। आरोप है कि स्कूलों में वितरित की गई “ग्रेट पर्सनालिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ जेएंडके” (Great Personalities and Legends of J&K) नामक पुस्तक की सीरीज में उन चेहरों को कश्मीर के महानायकों के तौर पर चित्रित किया गया है, जो भारत विरोधी गतिविधियों, अलगाववाद और घाटी में आतंकवाद फैलाने के दोषी रहे हैं। इस पुस्तक में मकबूल भट, सैयद अली शाह गीलानी, शब्बीर अहमद शाह और मसरत आलम भट जैसे चेहरों पर विशेष अध्याय शामिल किए गए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि किताबों में कथित तौर पर कुछ ऐसी आपत्तिजनक भाषा और संदर्भों का भी इस्तेमाल किया गया था, जो सीधे तौर पर भारत की संप्रभुता को चुनौती देते हैं। जम्मू-कश्मीर पीपल्स फोरम (JKPF) और अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए प्रदर्शन किया गया, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।
‘समग्र शिक्षा’ के मुख्यालय पर छापा, खंगाले जा रहे डिजिटल इनपुट
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज कर तफ्तीश काउंटर इंटेलिजेंस विंग को सौंप दी। इसी कड़ी में काउंटर इंटेलिजेंस जम्मू की एक हाई-प्रोफाइल टीम ने जम्मू के चन्नी हिम्मत स्थित ‘समग्र शिक्षा’ के मुख्य कार्यालय (Headquarters) पर अचानक धावा बोल दिया। पुलिस अधिकारियों ने पूरे दफ्तर को अपने घेरे में ले लिया और उस विंग के रिकॉर्ड्स को जब्त कर लिया, जहां से इन किताबों की खरीद और वितरण के ऑर्डर जारी किए गए थे। पुलिस मुख्य रूप से इस बात की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है कि आखिर इन राष्ट्रविरोधी सामग्री वाली किताबों को सरकारी पैनल द्वारा मंजूरी कैसे मिली? इसके लिए पुलिस की टेक्निकल टीम दफ्तर के कंप्यूटरों, सर्वर लॉग्स, ईमेल कम्युनिकेशन्स और डिजिटल डेटा को खंगाल रही है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड्स की स्कैनिंग से यह साफ हो जाएगा कि प्रकाशकों और अधिकारियों के बीच किस तरह की बातचीत चल रही थी और क्या इस पूरे खेल के पीछे सीमा पार या किसी अलगाववादी सिंडिकेट का कोई हिडन एजेंडा (गुप्त एजेंडा) तो काम नहीं कर रहा था।
8 बड़े अधिकारी सस्पेंड, लेखक और पब्लिशर ब्लैकलिस्ट
जैसे ही इस बड़ी लापरवाही और साजिश का खुलासा हुआ, उपराज्यपाल (LG) प्रशासन ने तुरंत कड़ा रुख अख्तियार किया। इस मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए शिक्षा विभाग के 8 वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। इसके साथ ही, विवादित पुस्तक के लेखकों (हिलाल अहमद और संतोष मीणा) सहित संबंधित पब्लिशिंग हाउस (ओबराय बुक्स सर्विस) को पूरी तरह से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। प्रशासन ने सख्त हिदायत दी है कि जब तक पुलिस और आंतरिक जांच कमेटियों की रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक संबंधित प्रकाशकों के सभी तरह के सरकारी भुगतानों (Payments) पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाए।
मासूमों के दिमाग में जहर घोलने की थी साजिश?
इस पूरे मामले ने घाटी के भीतर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि बच्चों के मानसिक विकास को प्रभावित करने की एक गहरी साजिश हो सकती है। कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए भेजी गई इन 126 से अधिक किताबों के जरिए युवाओं के दिमाग में अलगाववाद का जहर घोलने का प्रयास किया जा रहा था।
फिलहाल, ‘समग्र शिक्षा अभियान’ ने आनन-फानन में एक नई विशेषज्ञ सत्यापन समिति (Verification Committee) का गठन किया है। इस समिति को निर्देश दिया गया है कि वे साल 2025-26 के दौरान खरीदी गई एक-एक किताब और पाठ्यक्रम सामग्री की दोबारा बारीकी से समीक्षा करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी स्कूल में कोई भी आपत्तिजनक, भ्रामक या देश विरोधी सामग्री न बची रहे। जम्मू-कश्मीर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितने ही ऊंचे पद पर क्यों न बैठा हो।






