
संवाद 24 नई दिल्ली । वैश्विक मंच पर भारत का डंका एक बार फिर जोर-शोर से बज उठा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुदूर प्रशांत महासागर के खूबसूरत देश न्यूजीलैंड की धरती पर कदम रखकर एक नया इतिहास रच दिया है। पिछले 40 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद यह पहला मौका है जब भारत का कोई प्रधानमंत्री द्विपक्षीय यात्रा पर न्यूजीलैंड पहुंचा है। इस ऐतिहासिक और बेहद रणनीतिक दौरे से न सिर्फ दोनों देशों के रिश्तों को एक नई ऊंचाई मिलेगी, बल्कि हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में चीन की विस्तारवादी नीतियों को भी करारा जवाब मिलने की उम्मीद है। ऑकलैंड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जब पीएम मोदी का विमान उतरा, तो नजारा देखने लायक था। खुद न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सम प्रोटोकॉल तोड़कर अपने भारतीय समकक्ष का स्वागत करने के लिए हवाई अड्डे पर मौजूद थे। दोनों नेताओं के बीच की गर्मजोशी ने साफ कर दिया कि यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की वैश्विक राजनीति और व्यापार की दिशा बदलने वाला है।
चार दशकों का इंतजार और ‘एक्स’ पर मोदी का संदेश
इस ऐतिहासिक क्षण की अहमियत को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी भावनाएं साझा कीं। उन्होंने लिखा, यह यात्रा बेहद ऐतिहासिक और खास है, क्योंकि चार दशकों के लंबे अंतराल के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड की धरती पर आया है। मैं प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सम के साथ द्विपक्षीय वार्ता को लेकर बेहद उत्सुक हूं, जहां हम भारत-न्यूजीलैंड अटूट मित्रता के सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे। इसके साथ ही, मैं ऑकलैंड में भारतीय समुदाय के एक विशाल कार्यक्रम को भी संबोधित करने जा रहा हूं।
मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और वर्क वीजा का महा-ऑफर!
इस दौरे का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण एजेंडा हाल ही में हस्ताक्षरित ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जमीन पर उतारना है। सूत्रों के मुताबिक, इस महा-डील के लागू होने से भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक दूरियां खत्म हो जाएंगी। इस समझौते के तहत हर साल करीब 5,000 कुशल भारतीय युवाओं को न्यूजीलैंड में वर्क वीजा मिलने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। इसके अलावा, न्यूजीलैंड से आने वाली कई महत्वपूर्ण वस्तुएं भारत के बाजारों में सस्ती हो जाएंगी, जिससे सीधे तौर पर आम जनता के किचन का बजट सुधरेगा। भारत का मुख्य फोकस इस समय टैलेंट मोबिलिटी यानी भारतीय पेशेवरों और उच्च कुशल श्रमिकों को बिना किसी बाधा के न्यूजीलैंड में काम करने के अवसर प्रदान करने पर है। भारत ने साफ शब्दों में कहा है कि कड़े वीजा नियम और लंबी प्रक्रियाएं व्यावहारिक तौर पर एक अदृश्य बाधा की तरह काम करती हैं, जिन्हें दूर किया जाना बेहद जरूरी है। इस यात्रा के दौरान छात्रों के लिए आसान वीजा और शैक्षणिक सहयोग को लेकर कई बड़े फैसलों पर मुहर लग सकती है।
2036 ओलंपिक की मेजबानी: भारत के दावे को मिला कीवी पावर!
खेल के मैदान से भी इस दौरे के जरिए भारत के लिए एक बड़ी खुशखबरी निकलकर सामने आ रही है। भारत और न्यूजीलैंड इस समय अपने खेल संबंधों की शानदार शताब्दी (100 वर्ष) मना रहे हैं। इस खास मौके पर दोनों देशों के बीच पहले से हस्ताक्षरित खेल सहयोग समझौतों को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की तर्ज पर अब न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सम भी साल 2036 में होने वाले ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भारत की दावेदारी का खुला समर्थन कर सकते हैं। दोनों देश मिलकर हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स, एथलीटों की ट्रेनिंग और बेहतरीन खेल इकोसिस्टम तैयार करने के लिए ठोस और व्यावहारिक रोडमैप की घोषणा कर सकते हैं।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा: ड्रैगन की घेराबंदी का मास्टरस्ट्रोक?
सिर्फ व्यापार और खेल ही नहीं, बल्कि इस दौरे का सबसे संवेदनशील और रणनीतिक हिस्सा रक्षा सहयोग है। पिछले कुछ समय से भारत और न्यूजीलैंड के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास, नौसैनिक जहाजों का एक-दूसरे के पोर्ट पर आना-जाना (Port Visits) और सैन्य प्रशिक्षण में तेजी आई है। इस ऐतिहासिक बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा उद्योग सहयोग के एक व्यापक और मजबूत रोडमैप को अंतिम रूप दिया जा सकता है। वैश्विक समुद्री संचार मार्गों (Sea Lanes of Communication) की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए दोनों ही देश रक्षा और सुरक्षा सहयोग को अपनी शीर्ष प्राथमिकता मान रहे हैं। दोनों राष्ट्र एक ऐसे स्वतंत्र, खुले, समावेशी और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के निर्माण के पक्षधर हैं, जहां किसी एक देश की दादागीरी न चले और सभी राष्ट्रों की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का पूरा सम्मान किया जाए।प्रधानमंत्री मोदी की इस ऐतिहासिक कीवी यात्रा ने साफ कर दिया है कि भारत अब केवल अपने पड़ोस तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के सुदूर कोनों में भी अपनी रणनीतिक और आर्थिक पैठ को बेहद मजबूती से स्थापित कर रहा है।






