
संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक पटल पर भारत की सैन्य ताकत का लोहा पूरी दुनिया मान रही है। सामरिक रणनीतियों और रक्षा तैयारियों के मोर्चे पर एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए भारतीय वायुसेना (IAF) ने एक बार फिर दुनिया भर में अपनी श्रेष्ठता साबित की है। प्रतिष्ठित वैश्विक संस्था ‘वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री एयरक्राफ्ट’ (WDMMA) की ओर से जारी साल 2026 की नवीनतम वैश्विक रैंकिंग में भारतीय वायुसेना ने दुनिया भर में तीसरा स्थान हासिल किया है। भारत के लिए गर्व की बात यह है कि इस रैंकिंग में उसने अपने धुर विरोधी और पड़ोसी देश चीन को एक बार फिर बहुत पीछे छोड़ दिया है। इस प्रतिष्ठित रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की सबसे शक्तिशाली वायुसेनाओं की सूची में अब भारत से ऊपर केवल अमेरिका और सोवियत संघ (रूस) की वायुसेनाएं ही मौजूद हैं। साल 2022 के बाद से यह लगातार पांचवां ऐसा मौका है जब भारत ने ड्रैगन यानी चीनी वायुसेना (PLAAF) को पछाड़कर अपनी श्रेष्ठता साबित की है। समग्र रूप से देखा जाए तो भारत ने अब तक कुल छह बार वैश्विक स्तर पर तीसरा स्थान बरकरार रखने का कीर्तिमान स्थापित किया है।
केवल संख्या नहीं, बल्कि ‘ट्रू वैल्यू रेटिंग’ से तय हुई ताकत
आमतौर पर कई लोग सैन्य ताकत का अंदाजा सिर्फ विमानों की कुल संख्या से लगाते हैं, लेकिन WDMMA की यह रैंकिंग केवल संख्या बल पर आधारित नहीं है। यह संस्था हर साल 103 देशों की लगभग 129 वायुसेनाओं का बेहद सूक्ष्मता और कड़े पैमानों पर आकलन करती है। इस पूरी प्रक्रिया में दुनिया भर के 48,000 से अधिक सैन्य विमानों का डेटा खंगाला जाता है। संस्था की ‘ट्रू वैल्यू रेटिंग’ (TVR) प्रणाली के तहत बेड़े में शामिल विमानों की विविधता, उनकी मारक क्षमता, तकनीकी एडवांसमेंट, लॉजिस्टिक सपोर्ट नेटवर्क, आधुनिकीकरण की रफ्तार, रक्षा बजट और सबसे महत्वपूर्ण—वायुसेना की कुल ऑपरेशनल क्षमता को परखा जाता है। इसके अलावा, देश के घरेलू एयरोस्पेस उद्योग (स्वदेशी निर्माण क्षमता) और भविष्य की रक्षा खरीद योजनाओं को भी इस विश्लेषण में विशेष महत्व दिया जाता है। इसी वैज्ञानिक और व्यावहारिक मूल्यांकन के कारण भारतीय वायुसेना 69.4 की टीवीआर रेटिंग के साथ तीसरे पायदान पर मजबूती से खड़ी है, जबकि चीन 63.8 अंकों के साथ चौथे स्थान पर खिसक गया है।
भारतीय वायुसेना का ‘संतुलित बेड़ा’ है असली गेमचेंजर
रिपोर्ट में इस बात की विशेष सराहना की गई है कि भारतीय वायुसेना के पास लड़ाकू, परिवहन, हेलीकॉप्टर और विशेष मिशन वाले विमानों का एक बेहद संतुलित और हर परिस्थिति के अनुकूल बेड़ा मौजूद है। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास कुल 1,716 सक्रिय विमान हैं। इनमें सात अलग-अलग श्रेणियों के 542 घातक लड़ाकू विमान (Fighter Jets) शामिल हैं। हालांकि इस आंकड़े में उन मिग-21 विमानों को भी शामिल करके आंका गया है जिन्हें सितंबर 2025 में आधिकारिक रूप से विदाई दी जा चुकी है। इसके अलावा, दुर्गम इलाकों और आपातकालीन मिशनों में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले हेलीकॉप्टर बेड़े में 498 विमान शामिल हैं। इनमें 222 शक्तिशाली एमआई-17 (Mi-17) हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के ‘ध्रुव’ और ‘रुद्र’ के 111 प्लेटफॉर्म देश की ताकत बढ़ा रहे हैं। सैन्य साजो-सामान और जवानों को तेजी से मोर्चे पर पहुंचाने के लिए भारत के पास 282 परिवहन विमान (Transport Aircraft) और नए पायलटों को तैयार करने के लिए 374 अत्याधुनिक प्रशिक्षण विमान मौजूद हैं।
विशेष मिशन विमानों ने बढ़ाई लंबी दूरी की मारक क्षमता
भारतीय वायुसेना की असली ताकत उसके 20 विशेष मिशन विमानों से और ज्यादा निखर कर सामने आती है। इस दस्ते में ‘एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम’ (AEW&C – जिसे आसमान में भारत की तीसरी आंख कहा जाता है), खुफिया जानकारी जुटाने वाले इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म और हवा में ही ईंधन भरने वाले (Mid-Air Refuellers) विमान शामिल हैं। इन विशेष तकनीक वाले विमानों की वजह से भारतीय वायुसेना बिना रुके बहुत लंबी दूरी तक सटीक ऑपरेशन करने और दुश्मन की हर हरकत पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने में पूरी तरह सक्षम है।
ग्लोबल रैंकिंग पर एक नजर: टॉप-10 में कौन कहां?
WDMMA की इस रेटिंग सूची में 242.9 के विशाल स्कोर के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका (US Air Force) पहले स्थान पर काबिज है, जिसके कुल बेड़े का लगभग 41 फीसदी हिस्सा केवल लड़ाकू और बमवर्षक विमानों का है। वहीं 114.2 अंकों के साथ रूस दूसरे स्थान पर है।






