
संवाद 24 नई दिल्ली। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी सफलता सामने आई है। अंडमान सागर के पास प्राकृतिक गैस की नई खोज ने देश की ऊर्जा जरूरतों को लेकर उम्मीदों को नई उड़ान दी है। सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने अंडमान के अपतटीय क्षेत्र में अपने एक और खोजी कुएं में प्राकृतिक गैस की मौजूदगी की पुष्टि की है। यह खोज ऐसे समय में हुई है जब भारत आयातित तेल और गैस पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू संसाधनों की तलाश तेज कर रहा है।
अंडमान सागर से आई बड़ी खुशखबरी
ऑयल इंडिया द्वारा की गई ताजा खोज अंडमान के अपतटीय ब्लॉक में स्थित तीसरे खोजी कुएं से जुड़ी है। कंपनी के अनुसार इस क्षेत्र में यह दूसरी बार है जब हाइड्रोकार्बन यानी प्राकृतिक गैस की मौजूदगी के स्पष्ट संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार मिल रही सफलताएं इस पूरे समुद्री क्षेत्र की संभावनाओं को और मजबूत करती हैं।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम
भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंडमान क्षेत्र में मिली यह सफलता देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि आगे के परीक्षण और आकलन सकारात्मक रहते हैं तो भविष्य में घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है।
कहां और कैसे मिली गैस?
जानकारी के अनुसार यह खोज अंडमान द्वीपसमूह के पूर्वी तट से कुछ दूरी पर समुद्र में की गई है। खोजी कुएं की ड्रिलिंग समुद्र की सैकड़ों मीटर गहराई में की गई थी। प्रारंभिक परीक्षणों के दौरान लगातार गैस निकलने के संकेत मिले, जिसके बाद वैज्ञानिकों ने इसकी पुष्टि की। अब गैस के नमूनों की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि उसकी गुणवत्ता, संरचना और व्यावसायिक उपयोगिता का पता लगाया जा सके।
सरकार ने बताया ऊर्जा अवसरों का महासागर
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री ने इस खोज को भारत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि अंडमान सागर में ऊर्जा संसाधनों की अपार संभावनाएं मौजूद हैं और यह खोज उसी दिशा में एक मजबूत संकेत है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र से और भी महत्वपूर्ण खोजें सामने आ सकती हैं।
क्यों खास है अंडमान बेसिन?
भूवैज्ञानिकों के अनुसार अंडमान-निकोबार बेसिन लंबे समय से ऊर्जा विशेषज्ञों की नजर में रहा है। यह क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहां की संरचना म्यांमार और इंडोनेशिया जैसे गैस समृद्ध क्षेत्रों से मिलती-जुलती है। इसी कारण वैज्ञानिकों को पहले से उम्मीद थी कि यहां बड़े हाइड्रोकार्बन भंडार मौजूद हो सकते हैं।
देश की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बड़ा फायदा
यदि भविष्य में इन भंडारों का व्यावसायिक दोहन संभव हुआ तो इसका सीधा लाभ देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा। ऊर्जा आयात पर होने वाला खर्च कम हो सकता है, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और घरेलू उद्योगों को अपेक्षाकृत सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराई जा सकेगी। इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
अभी बाकी है सबसे महत्वपूर्ण चरण
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल गैस की मौजूदगी का पता चलना ही पर्याप्त नहीं है। अब सबसे महत्वपूर्ण चरण यह होगा कि गैस भंडार का वास्तविक आकार कितना है और उसका व्यावसायिक दोहन आर्थिक रूप से कितना लाभदायक साबित होगा। इसके लिए आने वाले महीनों में विस्तृत परीक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन किए जाएंगे।
भारत के ऊर्जा भविष्य की नई उम्मीद
अंडमान सागर में मिली यह सफलता केवल एक खोज नहीं बल्कि भारत के ऊर्जा भविष्य के लिए नई उम्मीद मानी जा रही है। देश लंबे समय से घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में अंडमान क्षेत्र से लगातार मिल रहे सकारात्मक संकेत यह बताते हैं कि भारत के समुद्री क्षेत्रों में छिपा ऊर्जा खजाना आने वाले समय में देश की तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है। अब सबकी नजरें आगे होने वाले परीक्षणों और नई खोजों पर टिकी हैं, जो भारत को ऊर्जा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती हैं।






