
संवाद 24 नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही खींचतान के बीच ताजा घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे ईरान के चार ड्रोन मार गिराए हैं। इसके तुरंत बाद अमेरिकी बलों ने ईरान के तटीय रडार ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करते हुए सैन्य हमले किए। इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में एक बार फिर संघर्ष की आशंका को बढ़ा दिया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का नया केंद्र
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार जिन ड्रोन को मार गिराया गया, वे क्षेत्र में समुद्री यातायात के लिए खतरा बन सकते थे। इसी कारण तत्काल कार्रवाई का फैसला लिया गया।
अमेरिका ने रडार ठिकानों को बनाया निशाना
ड्रोन हमले की आशंका के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में स्थित निगरानी और रडार प्रतिष्ठानों पर हमले किए। रिपोर्टों के मुताबिक गोरुक और क़ेश्म द्वीप के आसपास मौजूद रडार सुविधाओं को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल क्षेत्र में सैन्य निगरानी और ड्रोन गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
दोनों देशों के बीच बढ़ती जा रही सैन्य गतिविधियां
पिछले कुछ महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। कभी ड्रोन गतिविधियों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप होते हैं तो कभी समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है। हाल के दिनों में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उकसावे वाली कार्रवाई करने के आरोप लगाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही इन घटनाओं से किसी बड़ी सैन्य भूल की संभावना बढ़ जाती है।
युद्धविराम की कोशिशों को झटका
क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए विभिन्न स्तरों पर बातचीत और कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने इन कोशिशों को कमजोर कर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष वार्ताओं पर भी इसका असर पड़ सकता है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसी घटनाएं लगातार जारी रहीं तो किसी स्थायी समझौते तक पहुंचना और मुश्किल हो जाएगा।
तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों पर पड़ सकता है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि यहां सैन्य गतिविधियां और बढ़ती हैं या समुद्री यातायात प्रभावित होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा सकती है। इससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
क्षेत्रीय देशों की बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया के कई देश पहले से ही सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने उनकी चिंताओं को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच टकराव बढ़ता है तो इसका प्रभाव केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल दुनिया की निगाहें अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं। एक ओर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक स्तर पर समाधान की कोशिशें भी जारी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि हालिया घटनाएं केवल सीमित सैन्य कार्रवाई तक सिमटती हैं या फिर पश्चिम एशिया एक बड़े संकट की ओर बढ़ रहा है। फिलहाल इतना तय है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती हलचल ने वैश्विक समुदाय की चिंता बढ़ा दी है और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है।






