डिजिटल टूलकिट से लेकर सीमा पार के तार: दिल्ली में CJP के संसद मार्च के पीछे आखिर क्या है साजिश का सच?

संवाद 24 नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों पर हाल ही में हुए CJP (सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस) के प्रदर्शन और ‘संसद मार्च’ ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। जो आंदोलन शुरुआत में सोशल मीडिया पर एक व्यंग्य और छात्रों के सामान्य विरोध प्रदर्शन के तौर पर शुरू हुआ था, वह अचानक से इस कदर उग्र और हिंसक रूप ले लेगा, इसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। दिल्ली पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों ने अब इस पूरे विवाद के पीछे एक बड़ी ‘डिजिटल टूलकिट’, विदेशी फंडिंग और पड़ोसी देश पाकिस्तान के लिंक की गहनता से पड़ताल शुरू कर दी है।

पाकिस्तान से जुड़े संदिग्ध सोशल मीडिया हैंडल्स का खुलासा
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि प्रदर्शन को भड़काने और देश में अराजकता फैलाने के लिए सोशल मीडिया पर झूठी खबरें और अफवाहें फैलाई गईं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, कई ऐसे संदिग्ध इंटरनेट मीडिया अकाउंट्स की पहचान हुई है जो कथित तौर पर पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे। इन हैंडल्स के ज़रिए झूठे दावों को बढ़ावा दिया गया इसका मुख्य मकसद युवाओं में आक्रोश भड़काना और कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ना था।

‘काकरोच इज बैक’ और तेजी से बढ़ते फॉलोअर्स का रहस्य
पुलिस की पड़ताल से पता चला है कि इस पूरे आंदोलन की मुख्य स्क्रिप्ट इंस्टाग्राम और X (पूर्व में ट्विटर) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लिखी गई। केंद्र सरकार के आदेश पर जब CJP के आधिकारिक X हैंडल को ब्लॉक किया गया, तो महज़ कुछ ही मिनटों में ‘काकरोच इज बैक’ नाम से एक नया सोशल मीडिया अकाउंट तैयार कर लिया गया। देखते ही देखते इस पेज और इससे जुड़े हैंडल्स के फॉलोअर्स की संख्या लाखों और करोड़ों में पहुँच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना किसी ‘पेड बोट्स’ (Paid Bots) या संगठित नेटवर्क के इतनी तेज़ी से विशाल स्तर पर रीच हासिल करना सामान्य बात नहीं है। फिलहाल एजेंसियां उन सभी प्रमुख आईपी (IP) एड्रेस को ट्रैक कर रही हैं जहां से इस डिजिटल टूलकिट को ऑपरेट किया जा रहा था।

एआई टूल्स और विदेशी फंडिंग का एंगल
जांच में यह बात भी सामने आई है कि प्रदर्शन के लिए बनाए गए घोषणापत्र, पोस्टर्स और ऑनलाइन नैरेटिव को गढ़ने के लिए चैटजीपीटी (ChatGPT) और क्लाउड जैसे आधुनिक एआई टूल्स का सुनियोजित तरीके से इस्तेमाल किया गया था। इसके साथ ही, CJP के संस्थापक की विदेशी पृष्ठभूमि और विदेश से पढ़ाई के तारों को देखते हुए एजेंसियां इस एंगल पर भी जांच कर रही हैं कि कहीं इस आंदोलन को विदेशों से लॉजिस्टिक या आर्थिक मदद तो नहीं मिल रही थी। हाल ही में बांग्लादेश और नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में छात्रों के आंदोलनों के पीछे जो पैटर्न देखा गया था, ठीक वैसा ही पैटर्न यहाँ भी सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर है।

छात्रों के मुखौटे में उपद्रवी elements और राजनीतिक शह?
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सड़कों पर हंगामा करने और पुलिस पर पथराव करने के आरोप में हिरासत में लिए गए लोगों में से कई लोग वास्तविक छात्र नहीं थे। नीट परीक्षा विवाद और शिक्षा में सुधार के नाम पर 20 जून से जंतर-मंतर पर शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन में बाद में कई वामपंथी छात्र संगठन और राजनीतिक दल भी सक्रिय हो गए। एजेंसियों को संदेह है कि एक गैर-राजनीतिक मुद्दे की आड़ लेकर सरकार विरोधी माहौल तैयार करने की सोची-समझी योजना बनाई गई थी। फिलहाल दिल्ली पुलिस और सुरक्षा तंत्र पूरे मामले की तह तक पहुँचने के लिए साइबर फोरेंसिक और डिजिटल सबूतों को खंगालने में लगे हुए हैं।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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