
संवाद 24 उत्तर प्रदेश। मेरठ जिले में आयकर विभाग ने एक ऐसे सनसनीखेज वित्तीय घोटाले का भंडाफोड़ किया है, जिसने देश की सुरक्षा और कर प्रणाली से जुड़े अधिकारियों के होश उड़ा दिए हैं। एक छोटे से 35 वर्ग मीटर के मकान के भीतर बैठकर, एक महिला ने देश की कर व्यवस्था में इतनी बड़ी सेंध लगाई कि आंकड़ा देखते ही देखते 357 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। तीन सालों से चल रहे इस महाघोटाले के तार देशभर के 3,000 से अधिक वेतनभोगी कर्मचारियों और करदाताओं से जुड़े हुए हैं, जिन्हें शातिर तरीके से चूना लगाने और सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाने का खेल खेला जा रहा था।
माधवपुरम की तंग गलियों से पूरे देश में फैला जाल
यह पूरा मामला मेरठ के माधवपुरम क्षेत्र स्थित इंद्रा नगर का है। यहाँ एक बेहद साधारण और छोटे से मकान में रहने वाली 30 वर्षीय नैंसी अग्रवाल इस पूरे खेल की मुख्य धुरी बताई जा रही है। जांच अधिकारियों के मुताबिक, नैंसी ने आयकर अधिनियम की धारा 80GGC की बारीकियों और उसकी खामियों का गहराई से अध्ययन किया था। आपको बता दें कि यह विशेष धारा देश के नागरिकों को किसी भी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल को दिए गए चंदे (डोनेशन) पर 100 प्रतिशत तक की टैक्स छूट का दावा करने का अधिकार देती है। इसी नियम का सहारा लेकर आरोपित ने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का एक सुनियोजित ताना-बाना बुना।
ऐसे काम करता था रेफरल और डिस्काउंट का मायाजाल
आयकर विभाग की तफ्तीश में यह सामने आया कि आरोपित ने बहुत ही कम समय में देश के कोने-कोने में अपने ग्राहकों का एक बहुत बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया था। इस धंधे को चमकाने के लिए उसने आधुनिक कॉर्पोरेट कंपनियों की तरह ‘रेफरल डिस्काउंट’ और ‘प्रमोशनल ऑफर्स’ जैसी स्कीम चलाईं। यानी जो ग्राहक दूसरे नए ग्राहकों को जोड़ता था, उसे टैक्स रिफंड की कमीशन में भारी छूट दी जाती थी। इस झांसे में आकर ज्यादातर नौकरीपेशा और मध्यवर्गीय लोग आ गए, जो अपनी गाढ़ी कमाई का टैक्स बचाने के चक्कर में बिना सोचे-समझे इस गिरोह के सदस्य बनते चले गए। फर्जी दस्तावेजों के जरिए यह दिखाया गया कि इन सभी 3,000 से अधिक लोगों ने गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को करोड़ों रुपये का गुप्त दान दिया है। इस तरह, आरोपित ग्राहकों को करीब 65.5 करोड़ रुपये का अवैध और फर्जी टैक्स रिफंड दिलाने में कामयाब रही।
आयकर विभाग की आधी रात की छापेमारी और जब्ती
इस महाघोटाले की भनक जब आयकर विभाग की खुफिया विंग को लगी, तो विभाग के आला अधिकारियों के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। जांच दल ने पूरी रणनीति के साथ मेरठ के दिल्ली चुंगी स्थित गुप्ता ब्रदर्स के आवास और इंद्रा नगर में नैंसी अग्रवाल के ठिकाने पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। सर्वे के दौरान जब भारतीय स्टेट बैंक की ब्रह्मपुरी शाखा में स्थित बैंक लॉकरों को खंगाला गया, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं। विभाग ने फौरन कार्रवाई करते हुए करीब 50 लाख रुपये मूल्य के सोने के जेवरात और 4 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को फ्रीज और सीज कर दिया। इसके अलावा, मौके से ₹5 लाख की नकदी, हाथ से लिखे हुए गुप्त लेजर अकाउंट, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और कई डिजिटल सबूत जब्त किए गए, जिनमें पूरे नेटवर्क का कच्चा चिट्ठा मौजूद है।
आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर: जांच में उलझे तार
मामले के सामने आने के बाद अब इस खेल में शामिल किरदारों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो चुका है। पूछताछ में नैंसी अग्रवाल ने खुद को बेकसूर बताते हुए सारा ठीकरा गुप्ता ब्रदर्स पर फोड़ दिया है। उसका कहना है कि उसने साल 2014 में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद बीकॉम की पढ़ाई की थी और साल 2023-24 में आयकर रिटर्न (ITR) भरने की ट्रेनिंग लेने के लिए वह गुप्ता ब्रदर्स के यहाँ जाती थी। नैंसी का आरोप है कि जांच से बचने के लिए गुप्ता ब्रदर्स के प्रियम गुप्ता ने सारा दोष उसके सिर मढ़ दिया है। वहीं दूसरी ओर, प्रियम गुप्ता ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उनका नैंसी से कोई लेना-देना नहीं है और न ही उसने कभी उनके यहाँ कोई काम सीखा है।
अब उन 3000 ग्राहकों की खैर नहीं, विभाग भेजने जा रहा है नोटिस
आयकर विभाग के वरिष्ठ जांच अधिकारी माखन मीना के मुताबिक, इस पूरे रैकेट की जड़ें बहुत गहरी हैं। इस घोटाले का लाभ उठाने वाले अधिकांश लोग वेतनभोगी वर्ग के हैं, जिन्होंने या तो जानबूझकर टैक्स बचाने के लालच में या फिर अनजाने में इस फर्जीवाड़े का सहारा लिया। आयकर विभाग ने अब इन सभी 3,000 से अधिक करदाताओं को चिन्हित कर लिया है और उन सभी को भारी जुर्माने के साथ कानूनी नोटिस भेजने की प्रक्रिया बहुत तेजी से शुरू कर दी गई है। विभाग का साफ कहना है कि फर्जी दावों के जरिए देश के खजाने से चुराई गई एक-एक पाई की वसूली ब्याज सहित की जाएगी और दोषियों पर मुकदमा चलाया जाएगा।






