मनरेगा खत्म करना महात्मा गांधी का अपमान: राहुल गांधी का आरोप, प्रियंका बोलीं—सरकार को नाम बदलने की सनक

संवाद 24 नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (MGNREGA) को कमजोर करने और समाप्त करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मनरेगा को खत्म करना महात्मा गांधी के विचारों और उनके ग्राम स्वराज के सपने का सीधा अपमान है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार को महात्मा गांधी के विचारों और गरीबों के अधिकारों से समस्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते दस वर्षों से सरकार मनरेगा को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है और अब इसे पूरी तरह समाप्त करने का इरादा है। राहुल ने लिखा कि प्रस्तावित ‘VB-जी राम जी’ बिल ग्रामीण गरीब परिवारों की आजीविका पर सीधा हमला है और कांग्रेस सड़क से लेकर संसद तक इस जनविरोधी कदम का विरोध करेगी।

दरअसल, केंद्र सरकार मनरेगा की जगह ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘विकसित भारत–जी राम जी’ योजना लाने की तैयारी में है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को इससे जुड़ा बिल लोकसभा में पेश किया।

राहुल गांधी ने मनरेगा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह योजना महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने की जीवित मिसाल रही है। उन्होंने कहा कि करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए मनरेगा जीवनरेखा साबित हुई है और कोरोना महामारी के दौरान इसने एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच का काम किया। राहुल के मुताबिक, मनरेगा तीन बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित है—काम का अधिकार, गांवों को अपने विकास कार्य तय करने की स्वतंत्रता और मजदूरी व सामग्री लागत में केंद्र सरकार की मुख्य जिम्मेदारी।

प्रियंका गांधी का संसद में विरोध
लोकसभा में बिल पेश होने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस बिल का विरोध करती है और सरकार को हर योजना का नाम बदलने की सनक सवार है। प्रियंका ने सवाल उठाया कि जनता से जुड़ी योजनाओं का नाम बदलने के पीछे सरकार की प्राथमिकता क्या है, जबकि असल मुद्दा गरीबों और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा होना चाहिए।

मनरेगा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक संघर्ष और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

Samvad 24 Office
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