दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए UPSC का ऐतिहासिक फैसला: अब अपनी पसंद के सेंटर पर दे सकेंगे परीक्षा, खत्म होगा मीलों का सफर

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संवाद 24 नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने वाले दिव्यांग उम्मीदवारों (PwBD) के हित में एक क्रांतिकारी और मानवीय फैसला लिया है। आयोग ने अपनी नीतियों में बड़ा बदलाव करते हुए अब यह सुनिश्चित किया है कि दिव्यांग उम्मीदवारों को उनकी पसंद का परीक्षा केंद्र (Preferred Examination Centre) आवंटित किया जाए। इस निर्णय का उद्देश्य शारीरिक चुनौतियों का सामना कर रहे मेधावी छात्रों के लिए परीक्षा की राह को सुगम बनाना और उन्हें मानसिक व शारीरिक तनाव से राहत देना है।

अब घर के पास होगा एग्जाम सेंटर
अक्सर देखा जाता था कि यूपीएससी की कठिन परीक्षा के लिए दिव्यांग उम्मीदवारों को दूसरे शहरों या दूर-दराज के केंद्रों पर जाना पड़ता था। व्हीलचेयर या अन्य सहायक उपकरणों के साथ लंबी दूरी तय करना उनके लिए न केवल खर्चीला होता था, बल्कि परीक्षा से पहले उनकी ऊर्जा और एकाग्रता को भी प्रभावित करता था। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब आवेदन प्रक्रिया के दौरान दिव्यांग उम्मीदवारों द्वारा चुनी गई ‘पहली प्राथमिकता’ वाले केंद्र को उन्हें आवंटित करने की हर संभव कोशिश की जाएगी। आयोग ने इसे ‘फर्स्ट-अप्लाई, फर्स्ट-अलॉट’ (पहले आओ, पहले पाओ) के नियम से ऊपर रखते हुए दिव्यांगों के लिए विशेष रियायत दी है।

समान अवसर की दिशा में बड़ा कदम
UPSC का यह फैसला ‘समान अवसर’ (Equality of Opportunity) के संवैधानिक अधिकार को और मजबूत करता है। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई बार दिव्यांग छात्र बुनियादी सुविधाओं के अभाव या यात्रा की कठिनाइयों के कारण परीक्षा छोड़ देते थे। अब केंद्र आवंटन में प्राथमिकता मिलने से उनकी भागीदारी बढ़ेगी। इसके अलावा, आयोग ने परीक्षा केंद्रों पर रैंप, सुलभ शौचालय और निचले तल (Ground Floor) पर बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भी जिला प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किए हैं।

तकनीकी और बुनियादी सुधारों पर जोर
इस फैसले के साथ ही यूपीएससी ने परीक्षा केंद्रों के चयन के लिए अपने सॉफ्टवेयर में भी आवश्यक बदलाव किए हैं। अब जैसे ही कोई उम्मीदवार दिव्यांग श्रेणी के तहत आवेदन करेगा, सिस्टम स्वचालित रूप से उनके निकटतम या पसंदीदा केंद्र को लॉक करने का विकल्प देगा। इसके अतिरिक्त, आयोग ने ‘स्क्राइब’ (लेखक) की सुविधा और अतिरिक्त समय (Compensatory Time) के नियमों को भी और अधिक पारदर्शी और सरल बनाने की घोषणा की है, ताकि किसी भी उम्मीदवार को प्रशासनिक देरी का सामना न करना पड़े।

छात्रों और विशेषज्ञों ने जताई खुशी
आयोग के इस कदम का देशभर के शिक्षाविदों और छात्र संगठनों ने स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिविल सेवा जैसी चुनौतीपूर्ण परीक्षा में हर मिनट कीमती होता है। अगर उम्मीदवार को यात्रा और ठहरने की चिंता नहीं रहेगी, तो वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकेगा। दिव्यांग अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने इसे ‘संवैधानिक संवेदनशीलता’ का बेहतरीन उदाहरण बताया है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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