
संवाद 24 नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े विषय को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। कांग्रेस और ‘इंडी’ गठबंधन के प्रमुख घटक दलों ने इस समूचे मामले को लेकर देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के समक्ष अपनी बात रखने तथा सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च करने की एक संयुक्त योजना तैयार की थी। हालांकि, रविवार देर रात तक मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय की ओर से इस प्रतिनिधिमंडल को भेंट के लिए समय (अपॉइंटमेंट) आवंटित नहीं किया गया। इस स्थिति के बाद विपक्षी दल आज सोमवार को एक बार फिर सीजेआई से भेंट का समय मांगने के साथ-साथ अपने प्रस्तावित कार्यक्रमों के स्वरूप पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
औपचारिक अनुरोध और मुलाक़ात की स्थिति
इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सार्वजनिक तौर पर जानकारी दी थी कि मुख्य न्यायाधीश से मिलने के लिए समय मांगा गया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि इस संदर्भ में उन्होंने और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य न्यायाधीश को एक लिखित पत्र भेजा है। इस पत्र में निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर उठाई जा रही आपत्तियों, दिल्ली में एकत्र हो रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस प्रशासन की सख्ती और सुरक्षा व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं का उल्लेख किया गया था। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि विपक्षी दलों का उद्देश्य न्यायालय से कोई औपचारिक आदेश मांगना नहीं, बल्कि एक शिष्टमंडल के रूप में अपनी चिंताओं से अवगत कराना और उनका ध्यान इस ओर आकृष्ट करना है। हालांकि, रविवार को यह बैठक संभव नहीं हो सकी क्योंकि सीजेआई की ओर से इसके लिए समय नहीं मिल पाया। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, राजनीतिक दलों के किसी समूह द्वारा प्रशासनिक और चुनावी मसलों पर मुख्य न्यायाधीश से इस तरह प्रत्यक्ष रूप से भेंट करने की विधिक परंपरा सामान्यतः नहीं देखी जाती।
दोपहर बाद पुनः संपर्क करने का प्रयास
इस बीच तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने स्थिति पर अपनी बात रखते हुए कहा कि विपक्षी दलों का समूह सोमवार को दोपहर दो बजे के बाद एक बार फिर मुख्य न्यायाधीश से संपर्क साधने का प्रयास करेगा। उन्होंने दोहराया कि मुख्य चुनाव आयुक्त का पदमुक्त होना विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासनिक उपायों की ओर इशारा करते हुए यह भी कहा कि कड़ी सुरक्षा जांच और यातायात प्रबंधन के चलते कई स्थानों पर आम नागरिकों को आवाजाही में असुविधा का सामना करना पड़ा है।
राहुल गांधी का कार्यक्रम और राजधानी में लामबंदी
राजधानी में प्रस्तावित मार्च और आगामी रणनीति को ध्यान में रखते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपना गोवा दौरा स्थगित कर दिया। वे चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेने के तुरंत बाद दिल्ली पहुंचे, ताकि स्थिति और रणनीति का प्रत्यक्ष आकलन कर सकें। राहुल गांधी ने आम नागरिकों, विपक्षी दलों और नागरिक समाज के लोगों से संवाद करते हुए बाराखंभा रोड पर एकत्र होकर मार्च का हिस्सा बनने का आह्वान किया था। कांग्रेस पार्टी ने यह बात भी उठाई कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों पर प्रशासन द्वारा आवश्यकता से अधिक पाबंदियां लगाई जा रही हैं। दूसरी तरफ, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के निर्देश पर हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे निकटवर्ती राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों ने भी कार्यकर्ताओं को राजधानी पहुंचने के लिए कहा है।
सीमाओं पर सख्त पहरा, कानून-व्यवस्था पर जोर
विपक्षी दलों के दिल्ली आने के आह्वान को देखते हुए दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क मोड पर आ गई हैं। दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों, विशेषकर कुंडली बॉर्डर पर वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है। बैरिकेडिंग और सुरक्षा जांच के कारण कई प्रमुख मार्गों पर यातायात की गति काफी धीमी दर्ज की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा के ये पुख्ता इंतज़ाम किसी दल विशेष को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी में शांति-व्यवस्था को अक्षुण्ण रखने और आमजन के आवागमन को सुरक्षित बनाए रखने के उद्देश्य से किए गए हैं। अब सारा ध्यान इस बात पर है कि विपक्षी दलों के आगामी कदमों पर सुप्रीम कोर्ट प्रशासन और दिल्ली पुलिस की क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया रहती है।






