​मिडिल ईस्ट में बड़ा टकराव: ‘मक्का पैक्ट’ एक्टिव, सऊदी में सेना भेजेंगे पाक और तुर्किए!

​संवाद 24 नई दिल्ली। पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट का सुलगता संघर्ष अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां से किसी भी पल बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय युद्ध छिड़ने का अंदेशा गहरा गया है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के पवित्र धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने के दुस्साहस के बाद पूरे इस्लामी जगत में भारी आक्रोश और खलबली मच गई है। हूती हमलों से उपजे इस गंभीर सैन्य संकट को देखते हुए सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान ने अपनी ऐतिहासिक त्रिस्तरीय सुरक्षा संधि ‘मक्का डिफेंस पैक्ट’ को औपचारिक रूप से सक्रिय (एक्टिव) कर दिया है। इसके तहत अब पाकिस्तान और तुर्किए अपनी सेनाओं और आधुनिक रक्षा उपकरणों की सऊदी अरब में त्वरित तैनाती करने जा रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में रणनीतिक हलचल तेज हो गई है।

​नाटो की तर्ज पर लागू हुआ सामूहिक रक्षा सिद्धांत
​रियाद में आयोजित मक्का डिफेंस अलायंस की हाई-लेवल आपात बैठक के बाद एक कड़ा संयुक्त बयान जारी किया गया। इसमें पश्चिमी सैन्य संगठन ‘नाटो’ के आर्टिकल-5 की तर्ज पर स्पष्ट चेतावनी दी गई कि तीनों में से किसी भी एक सदस्य मुल्क पर हुआ सशस्त्र हमला तीनों पर सामूहिक हमला माना जाएगा। ​तुर्किए के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से मजबूत करने और संयुक्त सैन्य तंत्र को जमीन पर उतारने पर पूर्ण सहमति बन चुकी है। वहीं, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि हूती विद्रोहियों के हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए गठबंधन ने संयुक्त सैन्य निवारक उपायों को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। तीनों देशों ने दोहा और रियाद की बैठकों में दो-टूक कहा कि सऊदी की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर कोई भी आंच तीनों राष्ट्रों की सामूहिक सुरक्षा के लिए सीधा और खुला खतरा है।

​मदीना हमले के बाद फूटा सऊदी और सहयोगियों का गुस्सा
​तनाव की ताजा आग तब भड़की जब हूती विद्रोहियों ने मदीना शहर में स्थित उस प्रमुख बिजली वितरण स्टेशन को ड्रोन और मिसाइल हमले का निशाना बनाया, जो पैगंबर की पवित्र मस्जिद (मस्जिद-ए-नबवी) को बिजली आपूर्ति करता है। इस दुस्साहसिक हमले के कारण शहर के कई हिस्सों में बिजली गुल हो गई। पवित्र स्थलों की सीमा के पास हुए इस हमले को सऊदी अरब और उसके सहयोगियों ने ‘रेड लाइन’ पार करना करार दिया। इससे पहले मक्का की दिशा में भी दागी गई मिसाइलों को सऊदी एयर डिफेंस ने हवा में ही मार गिराया था। धार्मिक संवेदनशीलता और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए रियाद ने अपने पुराने सहयोगी पाकिस्तान और सैन्य ताकत तुर्किए से तत्काल रणनीतिक हस्तक्षेप की मांग की, जिसे दोनों देशों ने बिना किसी हिचकिचाहट के स्वीकार कर लिया।

​’ऑपरेशन यमन डॉन’: 100 लड़ाकू विमानों से हूतियों पर भीषण प्रहार
​हमलों के जवाब में केवल रक्षात्मक रुख अपनाने के बजाय सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन और यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने एक व्यापक और आक्रामक सैन्य अभियान छेड़ दिया है, जिसे ‘ऑपरेशन यमन डॉन’ नाम दिया गया है। यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख रशाद अल-अलीमी ने घोषणा की कि इस चौतरफा ऑपरेशन का अंतिम लक्ष्य यमन की राजधानी सना को विद्रोहियों के चंगुल से आजाद कराना और हूती तख्तापलट को पूरी तरह जड़ से खत्म करना है।
​सऊदी गठबंधन के सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने जानकारी दी कि लगभग 100 लड़ाकू विमानों ने हूती ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए हैं। इन भीषण एयरस्ट्राइक्स में विद्रोहियों के दर्जनों हथियार डिपो, मिसाइल लॉन्चिंग पैड और कमांड सेंटर मलबे के ढेर में तब्दील हो गए हैं। सऊदी समर्थित जमीनी बलों ने पलटवार करते हुए रणनीतिक रूप से बेहद अहम शहर धुबाब, बाब और हदीद पर दोबारा कब्जा जमा लिया है।

​लाल सागर और वैश्विक व्यापार पर मंडराता संकट
​यह भीषण सैन्य टकराव ऐसे बेहद नाजुक मोड़ पर सामने आया है जब हूतियों ने हाल के दिनों में लाल सागर के तटीय इलाकों और मोखा द्वीप पर कब्जा कर लिया था। इस कब्जे से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Strait) पर हूतियों का प्रभाव काफी बढ़ गया था। गौरतलब है कि दुनिया का करीब 12 प्रतिशत समुद्री व्यापार और कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि पाकिस्तान और तुर्किए की सेनाएं जमीनी और नौसैनिक स्तर पर सऊदी अरब की सुरक्षा में तैनात होती हैं, तो यह सीधे तौर पर हूती विद्रोहियों और उनके पीछे खड़ी ताकतों के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका साबित होगा। आने वाले दिन न केवल खाड़ी देशों बल्कि पूरी दुनिया की भू-राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *