जब मिठास के साथ जुड़ जाती है परंपरा| गुजिया: त्योहारों की मिठास समेटे पारंपरिक स्वाद

संवाद 24 डेस्क। भारतीय खानपान की सबसे खूबसूरत विशेषताओं में से एक यह है कि यहां कई व्यंजन केवल भोजन नहीं होते, बल्कि वे संस्कृति, मौसम, त्योहार और पारिवारिक परंपराओं का हिस्सा बन जाते हैं। गुजिया भी ऐसा ही एक पारंपरिक पकवान है। बाहर से हल्की कुरकुरी और भीतर से स्वादिष्ट भरावन से भरी गुजिया विशेष रूप से होली के अवसर पर बनाई जाती है, हालांकि कई क्षेत्रों में इसे अन्य त्योहारों और शुभ अवसरों पर भी तैयार किया जाता है। मैदा या आटे की पतली परत के भीतर खोया, मेवे, नारियल और चीनी से तैयार भरावन इसका मुख्य आकर्षण होती है। इसका अर्धचंद्राकार आकार और सुनहरा रंग इसे देखने में भी बेहद आकर्षक बनाता है।

गुजिया की खासियत आखिर क्या है?
गुजिया की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसका संतुलित स्वाद है। इसमें बाहर की परत कुरकुरी होती है, जबकि अंदर की भरावन मुलायम, सुगंधित और हल्की मिठास वाली होती है। पारंपरिक गुजिया में खोया प्रमुख सामग्री माना जाता है, लेकिन अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसकी भरावन बदलती रहती है। कहीं इसमें सूजी का प्रयोग होता है तो कहीं नारियल, तिल, खसखस, किशमिश या विभिन्न प्रकार के मेवे डाले जाते हैं। यही विविधता गुजिया को भारतीय मिठाई परंपरा का एक जीवंत हिस्सा बनाती है।

पहले जानिए कितनी सामग्री चाहिए
लगभग 18 से 20 मध्यम आकार की गुजिया बनाने के लिए सामग्री को दो भागों में बांटना सुविधाजनक रहता है।

बाहरी परत के लिए सामग्री

  1. मैदा – 2 कप
  2. घी – 4 बड़े चम्मच
  3. पानी – आवश्यकता अनुसार
  4. तलने के लिए घी या तेल – आवश्यकता अनुसार

भरावन के लिए सामग्री

  1. मावा या खोया – 250 ग्राम
  2. बूरा या पिसी चीनी – ¾ कप
  3. सूजी – 2 बड़े चम्मच
  4. बारीक कटे बादाम – 2 बड़े चम्मच
  5. बारीक कटे काजू – 2 बड़े चम्मच
  6. किशमिश – 1 बड़ा चम्मच
  7. सूखा नारियल कद्दूकस किया हुआ – 2 बड़े चम्मच
  8. छोटी इलायची का पाउडर – ½ छोटा चम्मच
  9. चिरौंजी – 1 बड़ा चम्मच, वैकल्पिक
  10. घी – 1 छोटा चम्मच, भरावन भूनने के लिए
    सामग्री की मात्रा स्वाद और गुजिया के आकार के अनुसार थोड़ी कम या अधिक की जा सकती है। यदि भरावन अधिक मीठी पसंद हो तो चीनी की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।

स्वाद की असली शुरुआत आटा गूंधने से होती है
गुजिया की बाहरी परत जितनी सही बनेगी, अंतिम परिणाम उतना ही अच्छा होगा। सबसे पहले एक बड़े बर्तन में मैदा लें और उसमें घी डालें। अब दोनों हाथों से मैदा और घी को अच्छी तरह मिलाएं। इसे इतना मिलाएं कि मैदा मुट्ठी में दबाने पर कुछ देर के लिए एक साथ बंधा हुआ दिखाई दे। यही चरण गुजिया की परत को खस्ता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसके बाद थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए मध्यम सख्त आटा गूंधें। आटा न तो बहुत नरम होना चाहिए और न ही अत्यधिक कठोर। गूंधे हुए आटे को गीले कपड़े से ढककर लगभग 20 से 30 मिनट के लिए रख दें। इससे आटा थोड़ा सहज हो जाता है और उसे बेलना आसान होता है।

भरावन में छिपा है गुजिया का असली स्वाद
जब तक आटा विश्राम कर रहा हो, तब तक भरावन तैयार की जा सकती है। सबसे पहले कड़ाही गर्म करें और उसमें थोड़ी मात्रा में घी डालकर सूजी को धीमी आंच पर भूनें। सूजी का रंग बहुत गहरा नहीं करना है। हल्की सुगंध आने तक इसे भूनकर अलग रख दें।
अब उसी कड़ाही में मावा डालें और धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें। मावा भूनते समय सावधानी रखना जरूरी है, क्योंकि तेज आंच पर यह जल्दी चिपक सकता है या उसका स्वाद बदल सकता है। मावा हल्का सुनहरा होने और अच्छी खुशबू आने तक पकाएं। इसके बाद इसे थोड़ा ठंडा होने दें।
एक अलग बर्तन में भुनी हुई सूजी, ठंडा किया हुआ मावा, बूरा, कटे हुए बादाम, काजू, किशमिश, नारियल, चिरौंजी और इलायची पाउडर डालें। सभी सामग्री को अच्छी तरह मिला लें। ध्यान रखें कि मावा बहुत गर्म न हो, क्योंकि गर्म मावे में चीनी डालने पर भरावन अनावश्यक रूप से गीली हो सकती है।

गुजिया का आकार बनाना जितना आसान लगता है, उतना है नहीं
अब तैयार आटे को एक बार फिर हल्के हाथों से गूंधें और उसकी छोटी-छोटी लोइयां बना लें। प्रत्येक लोई को पतली पूरी के आकार में बेलें। पूरी न तो बहुत मोटी हो और न ही इतनी पतली कि भरावन डालते समय फटने लगे।
अब बेली हुई पूरी के बीच में एक से डेढ़ चम्मच भरावन रखें। किनारों पर थोड़ा पानी लगाएं और पूरी को आधा मोड़कर अर्धचंद्राकार बना दें। किनारों को उंगलियों से अच्छी तरह दबाकर बंद करें। इसके बाद पारंपरिक गुजिया की पहचान वाली मोड़दार किनारी बनाई जा सकती है। इसके लिए किनारे को हल्का मोड़ते हुए अंदर की ओर दबाया जाता है।
यदि यह प्रक्रिया कठिन लगे तो गुजिया बनाने वाले सांचे का भी उपयोग किया जा सकता है। हालांकि हाथ से बनाई गई गुजिया में पारंपरिक स्पर्श और आकर्षण अलग ही दिखाई देता है।

अब आती है सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा—तलने की
गुजिया को तलते समय सबसे अधिक ध्यान तापमान पर देना चाहिए। कड़ाही में पर्याप्त मात्रा में घी या तेल गर्म करें। आंच मध्यम से धीमी रखें। बहुत तेज गर्म तेल में गुजिया डालने से बाहरी परत जल्दी रंग पकड़ सकती है, जबकि अंदर की परत और भरावन ठीक तरह से पक नहीं पाएंगे।
तेल या घी पर्याप्त गर्म होने पर कुछ गुजिया सावधानी से डालें। उन्हें तुरंत तेज आंच पर न तलें। धीमी या मध्यम आंच पर धीरे-धीरे तलने से गुजिया की परत अधिक कुरकुरी बनती है और उसका रंग भी सुंदर सुनहरा आता है। गुजिया को बीच-बीच में पलटते रहें, ताकि दोनों तरफ समान रूप से पक जाए।
जब गुजिया हल्की सुनहरी और कुरकुरी दिखाई देने लगे तो उसे निकालकर छलनी या कागज पर रखें, ताकि अतिरिक्त घी या तेल निकल जाए।

कुरकुरापन बनाए रखने का छोटा-सा राज
गुजिया को लंबे समय तक कुरकुरा बनाए रखने के लिए उसे पूरी तरह ठंडा होने देना जरूरी है। गर्म गुजिया को तुरंत बंद डिब्बे में रखने से उसके भीतर की गर्म भाप बाहर नहीं निकल पाती और बाहरी परत नरम हो सकती है। इसलिए गुजिया को पहले कमरे के तापमान पर पूरी तरह ठंडा होने दें और उसके बाद ही किसी साफ, सूखे और वायुरोधी डिब्बे में रखें।
भरावन में अत्यधिक नमी भी गुजिया को जल्दी नरम कर सकती है। इसलिए मावा अच्छी तरह भुना हुआ और भरावन पर्याप्त सूखी होनी चाहिए।

गुजिया के स्वाद में किए जा सकते हैं कई प्रयोग
पारंपरिक खोया गुजिया अपने आप में बेहद लोकप्रिय है, लेकिन आज इसके कई रूप देखने को मिलते हैं। कुछ लोग भरावन में नारियल की मात्रा बढ़ाते हैं, तो कुछ सूखे मेवों के साथ खसखस या तिल का प्रयोग करते हैं। इसी तरह कम मिठास पसंद करने वाले लोग चीनी की मात्रा घटा सकते हैं।
कुछ घरों में गुजिया को तलने के बजाय बेक करने का विकल्प भी अपनाया जाता है। हालांकि इससे पारंपरिक तली हुई गुजिया जैसी बनावट पूरी तरह नहीं मिलती, लेकिन यह खाना पकाने का एक अलग तरीका जरूर है। इसी तरह गुजिया को बाद में चाशनी में हल्का डुबोकर या ऊपर से पिसी चीनी और मेवों से सजाकर भी परोसा जा सकता है।

गुजिया केवल मिठाई नहीं, पारिवारिक स्मृति भी है
गुजिया की सबसे बड़ी खूबी शायद इसका स्वाद नहीं, बल्कि इससे जुड़ी यादें हैं। त्योहारों के दिनों में घर के कई सदस्य मिलकर आटा गूंधते हैं, भरावन तैयार करते हैं, गुजिया भरते हैं और फिर उन्हें तलते हैं। बच्चों के लिए गुजिया बनाना अक्सर किसी उत्सव से कम नहीं होता। कोई आटा बेलता है, कोई भरावन रखता है और कोई किनारों को सुंदर आकार देता है।
इसी सामूहिक प्रक्रिया के कारण गुजिया केवल रसोई में तैयार होने वाली मिठाई नहीं रह जाती, बल्कि परिवार को एक साथ जोड़ने वाली परंपरा बन जाती है।

परोसने का अंदाज भी बढ़ाता है स्वाद
ताजी और कुरकुरी गुजिया को सामान्य रूप से चाय या दूध के साथ परोसा जा सकता है। त्योहारों पर इसे अन्य मिठाइयों और नमकीन व्यंजनों के साथ सजाकर रखा जाता है। यदि गुजिया को थोड़ा आकर्षक रूप देना हो तो ऊपर से बारीक कटे मेवे या हल्की पिसी इलायची छिड़की जा सकती है।
गुजिया परोसते समय उसकी बाहरी परत की कुरकुराहट और भीतर की भरावन का संतुलन सबसे महत्वपूर्ण होता है। यही संतुलन इसे साधारण मिठाई से अलग पहचान देता है।

कुछ छोटी गलतियां बिगाड़ सकती हैं पूरी मेहनत
गुजिया बनाते समय कुछ सामान्य गलतियों से बचना जरूरी है। आटे में घी बहुत कम होने पर बाहरी परत अपेक्षाकृत सख्त हो सकती है। दूसरी ओर बहुत अधिक घी डालने से आटा संभालना कठिन हो सकता है। भरावन में अधिक नमी होने पर गुजिया तलते समय फटने की संभावना बढ़ सकती है।
इसी तरह गुजिया को जरूरत से ज्यादा भरना भी सही नहीं है। भरावन और बाहरी परत के बीच थोड़ा स्थान रहने से किनारे अच्छी तरह बंद किए जा सकते हैं। किनारों को ठीक से सील न करने पर तलते समय भरावन बाहर निकल सकती है और तेल या घी भी खराब हो सकता है।

स्वाद के साथ संतुलन भी जरूरी
गुजिया एक पारंपरिक मिठाई है, इसलिए इसमें मावा, चीनी और घी जैसी ऊर्जा देने वाली सामग्री का प्रयोग होता है। इसका आनंद सामान्यतः संतुलित मात्रा में लेना बेहतर रहता है। त्योहारों के अवसर पर अलग-अलग मिठाइयों के साथ गुजिया भी खाई जाती है, इसलिए मात्रा का ध्यान रखना उपयोगी होता है।
यदि घर पर गुजिया बनाई जा रही है तो सामग्री की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ताजा मावा, अच्छी गुणवत्ता के मेवे और स्वच्छ तरीके से तैयार किया गया आटा स्वाद के साथ-साथ भोजन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाते हैं।

आखिर क्यों हर पीढ़ी को पसंद आती है गुजिया?
समय बदलता गया, खानपान के तरीके बदले और मिठाइयों के नए रूप सामने आए, लेकिन गुजिया की लोकप्रियता आज भी बनी हुई है। इसकी वजह सिर्फ इसका स्वाद नहीं है। गुजिया में भारतीय त्योहारों की आत्मीयता, घर की रसोई की खुशबू और परिवार के साथ मिलकर कुछ बनाने की खुशी समाई हुई है।
एक अच्छी गुजिया की पहचान उसकी सुनहरी कुरकुरी परत, संतुलित मिठास, सुगंधित भरावन और सुंदर आकार से होती है। लेकिन घर की बनी गुजिया की सबसे खास बात यह है कि उसमें केवल सामग्री नहीं, बल्कि बनाने वाले के हाथों की मेहनत और त्योहार की खुशी भी शामिल होती है। शायद यही कारण है कि थाली में रखी कई मिठाइयों के बीच भी गुजिया अपनी अलग पहचान बनाए रखती है।

त्योहारों की मिठास को अगर किसी एक पारंपरिक पकवान में समेटना हो, तो गुजिया उसका बेहतरीन उदाहरण कही जा सकती है। कुरकुरी परत के भीतर छिपी मीठी भरावन हर निवाले के साथ उस घरेलू स्वाद की याद दिलाती है, जो आधुनिक मिठाइयों की लंबी सूची के बावजूद आज भी लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए हुए है।

Radha Singh
Radha Singh

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